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Annasvarupa vijnaniya adhyaya aiapget mcqs

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6. Annasvarupa vijnaniya adhyaya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शूक धान्य में रक्त शाली श्रेष्ठ हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार रक्तशाली तृष्णा नाशक और त्रिदोष नाशक हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Rakta Shālī is best in Shūka Dhānya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Rakta Shālī destroys Trushnā and Tridosha.

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शुक्रवृद्धि विरेककृत् गुण युक्त है -
"Shukra vriddhi virekakrita" is guna of

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निन्दित क्रम में उत्तरोत्तर निन्दित सही क्रम है -
In the nindita krama the correct sequence of progressively nindita is

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आर्द्र पिप्पली होती है
Ārdra pippalī is

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....... वयस: स्थापनी परं किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
".........vayasah sthāpanī param" has been said in context of

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यथापुर्व मांस में गुरुत्व की दृष्टि से सही है -
On the basis of guruṭva what is correct sequence in decreasing order of māmsa?

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निम्न में से आध्मान कारक है -
Which of the following is Ādhamāna kāraka

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वार्ताक का दोषों पर प्रभाव है -
Prabhāva of Vātārka on doshas

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निम्न में महामृग है
Which of the following is Mahāmriga

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...... शुक्रकृत्परं किस शाक का गुण है -
"..........shukrakritparam" is guna of which shāka

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शुक्राश्मश्वास्पीनसान् .........घ्नन्ति पित्तास्रदा: परं किस शिम्बी धान्य का गुण है ?
"Shukrāshma shvāspīnasān...... ghnanti pittāsradāh param" is guna of which shimbī dhānya

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मेधाग्निबलशुक्रकत् किस के मांस के लिए कहा गया है ?
"Medhā agni bala shukra krita" has been said for which māmsa

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शरीरधातुसामान्याद अनभिष्यंदिबृंहणं किसके मांस के लिए कहा गया है ?
"Sharīra dhātu sāmānyāda anabhishyandi brimhanam" this has been said for which māmsa

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कफवातघ्नं,नातिपित्तकरं सरम् गुण है -
"Kaphavātaghnam, nātipittakaram saram" is guna of

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श्लेष्मलो, नातिपित्तल: किसके लिए कहा गया है ?
"Shleshmalo, nātipittala, kaphavātārshasām pathyah" has been said for

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पिप्पली, पिप्पलीमूल, चव्य, चित्रक और सौंठ से पंचकोल बनता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार चित्रक पाचन में अग्नि समान होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Panchakola is made from Pippalī, Pippalīmūla, Chavya, Chitraka and Shuntha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Chitraka is similar to Agni in Pāchana.

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जांगल मांस वर्ग है
Jāmgala māmsa varga is

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जीवनीयपञ्चमूल में निम्न में से किसका समावेश है ?
Which of the following is included in Jīvanīya Panchmūla

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कथन 1.चक्षुष्या सर्वदोषघ्नी ..........मधुरा हिमा " विदारी के सन्दर्भ में कहा गया है ।( A.H) कथन 2. वल्लीफलों में कुष्मांड श्रेष्ठ है ।(A.H)
Statement 1- "Chakshushyā Sarvadoshaghnī......... Madhurā Himā" is said in context to Vidārī. ( A. H.) Statement 2- Kushmānda is best in Vallīphala. ( A. H.)

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निम्न में अतिवातल है
Which of the following is Ati vātala

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निम्न में से शिव व धातुसाम्यकृत् एवं स्त्रोतोमार्दवकृत गुण वाला है -
Shiva, dhātusāmyakrita and srotomārdavakrita are guna of which of the following

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शूर्पपर्णी द्वय सम्मिलित है -
Shūrpaparnī dvaya is included in

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किस फल को छोड़कर सभी कच्चे फल त्याज्य होते हैं
Except which fruit all raw fruits are non consumable

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सभी फल अशुष्क अवस्था में सेवनीय है सिवाय -
Which fruits are consumable in Ashushka avasthā

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कथन 1."शुक्रकृत्परं " मुंजात शाक का गुण है ।(A.H) कथन 2. "मदघ्नी " मुंजात शाक का गुण है। (A.H)
Statement 1- "Shukrakrutparam" is the property of Munjāta Shāka. ( A. H.) Statement 2- "Madaghnī" is the property of Munjāta Shāka. ( A. H.)

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शिम्बीधान्यो में अवर है -
Avara in shimbī dhānya is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "विशेषादर्शसां पथ्य:" सूरण के गुण है । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार शाको में सरसों का शाक सबसे अवर शाक है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Visheshādarshasām Pathyah" is the property of Sūrana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shāka of Saraso is inferior in all Shāka.

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. विषम ज्वर नाशक है -
Vishama jvara nāshaka is

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार मंड वात अनुलोमक हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार तिल केश्य होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Manda is Vāta Anulomaka. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Tila is Keshya.

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पक्वाम्ल आम्र के गुण है -
Guna of pakvāmla Āmra

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वर्षाभू किसका पर्याय है -
Varshābhū is synonym of

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नन्दी मुखी है -
Nandī mukha is

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार तिल वात नाशक और शुक्र वृद्धि करता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार उमा दृष्टि और शुक्र नाश करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Tila destroys Vāta and increases Shukra. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Umā destroys Drushti and Shukra.

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A. अष्टांग हृदय अनुसार आर्द्र पिप्पली कफ कारक होती हैं । R. अष्टांग हृदय अनुसार आर्द्र पिप्पली का वीर्य उष्ण होता हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, Ārdra Pippalī is Kapha Kāraka. R. According to Ashtānga Hrudya, Ārdra Pippalī Vīrya is Ushna.

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निम्न में से असत्य कथन है -
Which of the following statement is not true

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गुल्म तूनी प्रतूनिजित्' है
"Gulma tūnī pratūnijita" is

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षष्टिक व्रीहि के प्रकार है -
Tyes of Shashtika vruhi are

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निम्न में से सद्यबलप्रदा है -
Which of the following is sadhya bala pradā

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किसका मांस "वृष्य: ग्राम्यस्तु श्लेष्मलो गुरु " कहा गया है ?
" Vrishyah grāmyastu shleshmalo guru" is which māmsa

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विशेषादर्शसां पथ्य: किसका शाक है -
"Visheshādarshasām pathyah" is shāka of
ed

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A. अष्टांग हृदय अनुसार सैंधव नमक वृष्य होता हैं । R. अष्टांग हृदय अनुसार सैंधव नमक त्रिदोष कारक होता हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, Saindhava salt is Vrushya. R. According to Ashtānga Hrudya, Saindhava salt is Tridosha Kāraka.

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.........गुरुवो बल्या: कफविष्टंभकारिण: कृतान्न वर्ग के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है -
"........ guruvo balyāh kapha vishtambhakārinah" this is in context of which kritānna varga

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कथन 1."जीर्णार्शोग्रहणीदोषशोषार्तानां परं हिता: " आवि मांस हेतु कहा है । (A.H) कथन 2. चिलचिम मछली त्रिदोष कारक होती हैं ।(A.H)
Statement 1- "Jīrnārshograhanīdoshashoshānrtānām Param Hitāh" is said for Āvi Māmsa. ( A. H.) Statement 2- Chilachima fish is Tridosha Kāraka. ( A. H.)

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कंठ के लिए हानिकारक है -
What is harmful for throat

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सूरण शाक होता है
Sūrana shāka is

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भग्नसन्धानकृत व बृंहण गुण वाला तृण धान्य है-
Bhagna sandhānakrita and brimhana guna yukta trina dhānya is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "सुगंध्युद्गारशोधनं " सैंधव लवण का गुण है । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "उर्ध्वाध: कफवातानुलोमनं " विड लवण के गुण है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Sugandhyudgāra Shodhanam" is the property of Saindhava Lavana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Ūrdhvādhah Kaphavātānulomanam" is the property of Vid Lavana.

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..........बृंहणी वृष्या स्निग्धा बल्या रुचिप्रदा कृतान्न वर्ग के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है -
"...............brimhanī vrishyā snigdhā balyā ruchipradā" fill in the blank in relation to kritānna varga

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार अक्ष का वीर्य उष्ण होता हैं। कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार आमलकी का वीर्य शीत होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vīrya of Aksha is Ushna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vīrya of Āmalakī is Shīta.

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निम्नलिखित में से कौन सा द्रव्य वातकोपक के रूप में कार्य नहीं करता करता है ?
Which of the following dravya does not work as Vāta aggrevator ?

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निम्न में से सत्य कथन है -
Which of the following saying is true

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भग्नसंधानकृत बृहणी गुरु' किसके लिए कहा गया है
"Bhagna samdhānakrita brihanī guru" has been said for

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अंशुमती द्वय सम्मिलित है -
Amshumatī dvaya is included in

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परं ग्राही स्पर्श शीतो विषापह' किसका लक्षण है
"Param grāhī sparsha shīto vishāpaha" is symptom of

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गुरुष्णं ....... बद्धविण्मूत्रम् सर्वदोषकृत । शाक के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है -
"Gurushnam..........baddhavinamūtram sarvadoshakrita" fill in the blank in context of Shāka

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षडूषण है -
Shadūshna is

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क्षार निम्न रस भुयिष्ठ है -
Kshāra is which Rasa bhuyishtha

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार पेया हृदय के लिए हितकारी होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "गुलमतूनीप्रतूनिजित् " कुलथी का गुण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Peyā is beneficial for Hrudya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Gulmatūnīpratūnijit" is the property of Kulathhī.

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गुल्मतूनीप्रतूनिजित्है -
"Gulma tūnī pratūni jita" is

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कथन 1. "बध्दविण्मूत्र सर्व दोषकृत" सरसों के लिए कहा हैं । (A.H) कथन 2. "बध्दविण्मूत्र सर्व दोषकृत" पिण्डालु के लिए कहा हैं । (A.H)
Statement 1- "Baddhavinmūtra Sarva Doshakrut" is said for Saraso. ( A. H.) Statement 2- "Baddhavinmūtra Sarva Doshakrut" is said for Pindālu. ( A. H.)

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तीक्ष्ण, ग्राही एवं पित्तविकारों मे अहितकर है
Ahitakara in tīkshana, grāhi and pitta vikāra is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वृहत पंचमूल वात कफ नाशक होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मध्यम पंचमूल वात कफ नाशक होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Bruhat Panchamūla destroys Vāta Kapha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Madhyama Panchamūla destroys Vāta Kapha.

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मांसवर्ग में उत्तरोत्तर गुरुता का सही क्रम है -
Correct sequence of ascending Gurutā in Māmsa varga is

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कुष्मांड, कलिंग आदि के कच्चे फल कैसे होते है
Raw fruits of kushmānda, kalimga etc are

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धातुओं में सर्वाधिक गुरु है -
Which dhātu is most Gurū

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कथन 1.रक्त शाली, महान् शालि से श्रेष्ठ होता हैं । कथन 2.षष्टिक व्रीहि के दो भेद होते हैं ।
Statement 1- Rakta Shālī is superior than Mahān Shāli. Statement 2- Shashtika Vrīhi is of two types.

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बिलेशय व प्रसह मांसवर्ग किस श्रेणी के मांस है ?
Bileshaya and prasaha māmsa varga are māmsa of which of the following category

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सबसे प्रवर व अवर शाक है क्रमशः-
Most superior and inferior shāka respectively

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मांस वर्ग की 8 योनियों में जांगल,आनूप, साधारण श्रेणी के क्रमशः वर्ग है -
Among ashta yoni of māmsa varga. jāmgala, ānupa and sādhārana varga respectively are

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कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार कृष्ण लवण में गन्ध को छोडकर शेष सभी गुण सौवर्चल लवण के समान है । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार " सर्वश्च परम तीक्ष्णौष्ण " क्षार के गुण है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, all the properties of Krushna Lavana are same as Sauvarchala Lavana except smell. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Sarvashcha Param Tīkshnaushna" is the property of Kshāra.

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किस अन्नवर्ग को सूप्य भी कहा जाता है-
Which Anna varga is sūpya

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कथन 1. "बध्दविण्मूत्र सर्व दोषकृत" पिण्डालु के लिए कहा हैं । (A.H)। कथन 2. शुष्क मूलक वात कफ नाशक होती हैं। (A.H)
Statement 1- "Baddhavinmūtra Sarva Doshakrut" is said for Pindālu. Statement 2- Shushka Mūlaka destroys Vāta Kapha.

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पित्तोत्तरे वातमध्ये सन्निपाते कफानुगे किस मांस के लिये कहा गया है ?
"Pittottare vāta madhye sannipāte kaphānuge" has been said for which māmsa

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वल्लीफलों में श्रेष्ठ है -
Best in Vallīphala is

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ग्रहणी व् अर्श का नाश करने वाले शाकों में उत्तम शाक होता है।। वाग्भट
Best shāka among grahanī and arsha nāshaka shāka according to Vāgabhatta is

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मदपित्तविषास्त्रघ्न: किसका गुण है ?
"Mada pitta vishāstraghnah" is guna of

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हृद्य: केश्यो गुरुर्वृष्य: स्निग्धो रोचन दीपन: ...... किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Hridhyah keshyo gururvrishyah snigdho rochana dīpanah" has been said in context of

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कथन 1."फलोत्तमा वृष्या चक्षुष्या " द्राक्षा फल के सन्दर्भ में कहा गया है । (A.H) कथन 2. सूरण कंद अर्श रोगी के लिए पथ्य है ।(A.H)
Statement 1- "Phalottamā Vrushyā Chakshushyā" is said in context to Drākshā Phala. Statement 2- Sūrana Kanda is beneficial for patients of Arsha.

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वाग्भट्ट मतानुसार, हृद्य व कृमिनुत द्रव्य है -
According to Vāgbhata, Hrudya and Kruminuta dravya is -

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अष्टांग हृदय मतानुसार , निम्न में से "पथ्या " है -
Which of the following is" Pathyā" according to Ashtanga Hrudya ?

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वाग्भट के अनुसार लवण का वर्णन किस वर्ग के अंतर्गत आता है
According to Vāgabhatta lavana is categorised under which Varga

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हृद्यं कृमिनुत्स्वादुपाकं रुचिप्रदम' किसके लिए कहा गया है
"Hridhyam kriminutsvādupākam ruchipradam" has been said for

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पक्व आम्र के गुण है -
Guna of pakva āmra

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कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार काणकपोत सर्वदोष कृत होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय में "शुक्रला परम् " चटक का मांस के लिए कहा हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kānakapota is Sarvadoshakruta. Statement 2- In Ashtānga Hrudya, "Shukalā Param" is said for Chataka Māmsa.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शुष्क पिप्पली वृष्य होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार नागर हृदय के लिए लाभकारी होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Shushka Pippalī is Vrushya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Nāgara is beneficial for the Heart.

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, लघुत्तम शाक है -
According to Ashtānga Samgraha, Laghuttma shāka is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार बिभीतक केश्य होता हैं। कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार वरा रसायन कर्म करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Bibhītaka is Keshya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Varā does Rasāyana Karma.

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सर्वश्च परम तीक्ष्णौष्ण है -
" Sarvashcha parama tīkshanaushna" is

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व्रणाक्षिरोगसंशुद्धदुर्बलस्नेहपायिनां गुण युक्त है -
"Vrana akshiroga samshuddha durbala sneha pāyinām" is guna of

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अष्टांग हृदयोक्त वर्णित पंचमूल नही है -
Which of the following is not a Panchmūla explained in Ashtāmga Hridaya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार हरीतकी में लवण रस नही होता हैं। कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार हरीतकी वय को स्थिर रखती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Lavana Rasa is not present in Harītakī. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Harītakī keeps the age stable.

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औषध वर्ग किस आचार्य की मौलिक देन है -
Aushadha varga is given by which Āchārya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार त्रिजातक में त्वक,पत्र,एला होते हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार चतुर्जातक में त्वक,पत्र,एला और नागकेशर होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Trijātaka has Tvaka, Patra, Elā. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Chaturjātaka has Tvaka, Patra, Elā and Nāgakeshara.

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बला, एरण्ड, पुनर्नवा, माषपर्णी, मुद्गपर्णी है -
Balā, Eranda, Punarnavā, Māshaparnī, Mudgaparnī is -

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शश किस वर्ग में आता है -
"Shasha" is in which varga

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त्रिदोषकारक मांस है -
Tridoshakāraka māmsa is

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वृष्य गुण युक्त है -
Vrishya is guna of

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न तामत्युपयुंजीत रसायनविधी विना किसके लिये कहा गया है ?
"Na tāmatyupayumjīta rasāyana vidhi vinā" has been said for

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कथन 1. काकमाची त्रिदोष नाशक होती हैं । (A.H.) कथन 2. काकमाची स्वर के लिए हितकर होती हैं । (A.H)
Statement 1- Kākamāchī destroys Tridosha. ( A. H.) Statement 2- Kākamāchī is beneficial for Voice. ( A. H.)

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निम्न में से अतिमूत्रल गुण युक्त शाक है-
Which of the following is atimūtral guna yukta shāka

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार आर्द्र पिप्पली स्निग्ध होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार शुष्क पिप्पली स्निग्ध होती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Ārdra Pippalī is Snigdha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shushka Pippalī is Snigdha.
wait

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वृष्य लवण है -
Vrishya lavana is

103 / 213

सकटुकं दीपनं कफजित्परं' किसके लिए कहा गया है
"Sakatukam dīpanam kaphajitparam" has been said for
ed

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लघु पंचमूल का वीर्य है -
Vīrya of Laghupanchmūla is

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......... तृट्छर्द्यतीसारमेहमेद: कफच्छिद: कृतान्नवर्ग के संदर्भ में उपरोक्त्त गुण किसका है ?
"..............trita Chardī atisāra meha medah kaphachchidah" this is guna of which among the kritānna varga

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A. अष्टांग हृदय अनुसार तृण पंचमूल पित्त नाशक होता हैं । R.अष्टांग हृदय अनुसार दर्भ,कास, इक्षु, शर शालि से तृण पंचमूल बनता हैं ।
A- According to Ashtānga Hrudya, Truna Panchamūla destroys Pitta. R - According to Ashtānga Hrudya, Truna Panchamūla is made from Darbha, Kāsa, Ikshu, Shara Shāli.

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कोद्रव है -
Kodrava is

108 / 213

मध्यम पंचमूल का सर्वप्रथम स्वतंत्र वर्णन किसने किया है ?
Who has first mentioned Madhyama Panchamūla independently ?

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रसे पाके च कटूकमुष्णवीर्य त्रिदोषकृत: किस शाक का गुण है -
"Rase pāke cha katukamushnavīrya tridoshakritah" is guna of which shāka

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कृतान्न में उत्तरोत्तर लघुता का सही क्रम है -
What is progressively correct order of laghutā of kritānna

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हितं लेपोपसेकयो: किसका गुण है ?
"Hitam lepopasekayoh" is guna of

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अष्टाङ्ग हृदयानुसार जाङ्गल मांसरस होता है -
According to Ashtānga Hrudya, Jāngala Māmsarasa is -

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......... सरा स्वर्या शाकों के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है-
".............sarā svaryā" fill in the blank in context of shāka

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मृग,विष्किर,प्रतुद मांसवर्ग किस श्रेणी में आते है ?
Mriga, vishkira, pratuda māmsa varga are categorised under which of the following

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पालक गुरु और मल भेदक हैं । कथन 2 . अष्टांग हृदय अनुसार उपपोदिका मद का नाश करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Pālaka is Guru and Mala Bhedaka. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Upapodikā destroys Mada.

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जीर्णार्शोग्रहणीदोषशोषार्तानां परं हिता: किस मांस हेतु कहा है ?
"Jīrna arsho grahanī dosha shoshārtānām param hitāh" has been said for which māmsa

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निम्न में से शालनगण के द्रव्य है -
Dravya of Shālanagana are

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निम्न में से कौनसा लवण सस्वादु,वृष्य व पथ्य है ?
Which of the following lavana is sasvādu, vrishya and pathya?

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पटोल है
Patola is

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चक्षुष्या सर्वदोषघ्नी ..........मधुरा हिमा किस शाक के सन्दर्भ में कहा गया है -
"Chakshushyā sarvadoshaghnī .........madhurā himā" has been said in context of which shāka

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार आर्द्र पिप्पली का वीर्य है
Vīrya of ārdra pippalī according to Ashtāmga Hridaya is

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निम्न में अनुलोमक है(अष्टांगहृदय)
Which of the following is Anulomaka(Ashtāmga Hridaya)

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किस कृतान्न को खाते समय बीच बीच में जल सेवन तथा दिन में दो बार सेवन, रात्रि में सेवन तथा केवल अकेले सेवन करने का निषेध है -
While eating which Krutānna, having water in between and having it twice in a day, having in the night, and having alone is restricted

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार माष वात नाशक और शुक्र वृद्धि करता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार तिल का तेल केश्य होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Māsha destroys Vāta and increases Shukra. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Tila Taila is Keshya.

125 / 213

........अग्निसमं मेध्यं कफवातहरं परं ।। किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"..............agnisamam medhyam kaphavātaharam param" has been said in context of

126 / 213

बद्धास्थि आम्र के गुण है -
Guna of baddhāsthi āmra

127 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार कुष्मांड वात,कफ नाशक होता हैं । कथन 2 .अष्टांग हृदय अनुसार कुष्मांड वात,पित्त नाशक होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kushmānda destroys Vāta, Kapha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Kushmānda destroys Vāta, Pitta.

128 / 213

मेधा गुण युक्त शिम्बीधान्य है -
Medhā guna yukta shimbī dhānya is

129 / 213

पृथुक होता है
Prithuka is

130 / 213

सर्वदोषकृत किस मांस के लिए कहा गया है ?
"Sarvadoshakrita" is said for which māmsa

131 / 213

अष्टविध मांसवर्ग में जांगल मांस के कितने वर्ग है -
How many varga of jāmgala māmsa are there in Shadhavidha māmsa varga

132 / 213

सन्धान्कारी मधुरो .........अन्न द्रव्यों के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है -
"Sandhānkārī madhuro........" fill in the blank in relation to anna dravya

133 / 213

कृमिनुत् किस शाक का गुण है -
"Kriminuta" is guna of which shāka

134 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार यव विड व वात को बढ़ाता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार गोधूम वात पित्त को कुपित करता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Yava increases Vida and Vāta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Godhūma aggravates Vāta Pitta.

135 / 213

चक्षुष्य व वृष्य है -
Chakshushya and vrishya is

136 / 213

शिम्बी धान्य होते है -
Shimbī dhānya are

137 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार माष उष्ण होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार माष शीत होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Māsha is Ushna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Māsha is Shīta.

138 / 213

शूकधान्यों में सबसे अवर है -
Avara in shūka dhānya isw

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कुक्षिरोगज्वरापहा है -
"Kukshī roga jvara āpahā" is

140 / 213

पंचकोल में सम्मिलित नही है -
What is n it included in Panchkola

141 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार प्रियंगु भग्नसंधानकृत होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार कोदो विरेचक होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Priyangu is Bhagnasandhānakrut. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Kodo is Virechaka.

142 / 213

कौनसा द्रव्य "विडवातकृत्" गुण वाला है -
Which dravya is "Vida vāta krita"

143 / 213

अनिलकरो रुक्षो बहुशकृद्गुरु' किसके लिए कहा गया है
"Anilakaro ruksho bahu shakrida guru" has been said for

144 / 213

विष्टम्भ निर्माण करने वाल एवं दृष्टिदूषण है
Vishtambha kāraka and drishti dushana are

145 / 213

त्रिफला में से किस द्रव्य में केश्य गुणधर्म है -
Which content of Triphalā is Keshya

146 / 213

दृक्शुक्रकफशोफ विषापह: गुण वाला है -
"Drika shukra kapha shopha vishāpahah" is guna of

147 / 213

सुगंध्युद्गारशोधनं किस लवण का गुण है -
"Sugamdhyaudagārashodhanam" is guna of which lavana

148 / 213

कथन1."गुल्महृदयगृहणीपांडुप्लीहाआनाहगलामयान" को यवक्षार नष्ट करता हैं । (A.H) कथन 2.."गुल्महृदयगृहणीपांडुप्लीहाआनाहगलामयान" को हींग नष्ट करता हैं । (A.H)
Statement 1- Yavakshāra destroys "Gulmahrudyagrahanī Pānduplīhā Ānāhagalāmayān" . Statement 2- Hīnga destroys "Gulmahrudyagrahanī Pānduplīhā Ānāhagalāmayān" .

149 / 213

क्षोत्रस्वरवयोदृशाम् पथ्य: किसके मांस के लिए कहा गया है ?
"Shrotra svara vayo drishām pathyah" has been said for which māmsa

150 / 213

फलवर्ग में सबसे अवर है -
Avara in phala varga is

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रक्तपित्तहरं परं किसके शाक को कहा गया है ?
Which shāka is "Raktapittaharam"

152 / 213

निम्नांकित में से कौनसा व्रीहिधान्य क्रमशः त्रिदोषकारक व त्रिदोषशामक है ?
Which of the following vrīhi dhānya is tridoshakāraka and tridoshashāmaka respectively

153 / 213

पालक में उपस्थित दो मुख्य गुण है -
Two main guna of pālaka(spinach)

154 / 213

हन्ति दोषत्रयं कुष्ठं वृष्या सोष्णा रसायनी ........... किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Hanti doshatrayam kushtham vrishyā soshnā rasāyanī .........." has been said in context of

155 / 213

स्वप्न दार्ढ्यबृहत्वकृत् किसके मांस के लिए कहा गया है ?
"Svapna dādharyabrihatvakrita" has been said for māmsa of

156 / 213

कितने वर्ष पुराने धान्य की लघु धान्य संज्ञा है -
How many years old dhānya is called laghu dhānya

157 / 213

पक्व कुष्माण्ड होता है -
Pakva Kushmānda is

158 / 213

कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार हृद्य: केश्यो गुरुर्वृष्य: स्निग्धो रोचन दीपन: ...... लशुन के गुण हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार लशुन वृष्य, रसायन हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Hrudyah Keshyo Gururvrushyah Snigdho Rochana Dīpanah..... " is the property of Lashuna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Lashun is Vrushya, Rasāyana.

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बस्तिशुद्धीकर व वृष्य किसका शाक है-
Bastishuddhikara and vrishya shāka is of

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उर्ध्वाध: कफवातानुलोमनं किस लवण के सन्दर्भ में कहा गया है -
"Urdhavādhah kaphavātanulomanam" has been said in context of which lavana

161 / 213

कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार वार्ताक उष्ण वीर्य और वात कफ नाशक होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार वार्ताक शीत वीर्य और पित्त नाशक होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vārtāka is Ushna Vīrya and Vāta Kapha Nāshaka. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vārtāka is Shīta Vīrya and Pitta Nāshaka.

162 / 213

उष्णस्त्वच्यो हिम: स्पर्शे केश्यो ........ उपरोक्त गुण किसका है ?
"Ushnastvachyo himah sparshe keshyo......" is guna of

163 / 213

वर्चोभेदि तु ...........शाको के सन्दर्भ में रिक्त की पूर्ति किजीए-
"Varchobhedi tu......." complete the sentence in context of Shāka

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निम्न में से किसे वृष्य, रसायन भी कहा है -
Which of the is vrishya Rasāyana

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शिम्बी धान्यो में माष सबसे अवर हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार शूक धान्यो में यावक सबसे अवर हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Māsha is most inferior in all Shimbī Dhānya. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudya, Yāvaka is most inferior in all Shūka Dhānya.

166 / 213

अष्टांग हृदय अनुसार लशुन का गुण नहीं है
Which of the following is not guna of Lashuna according to Ashtāmga Hridaya

167 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार कोदो विष नाशक होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कोदो स्पर्श में उष्ण होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kodo destroys Visha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Kodo is warm on touch.

168 / 213

वर्चोभेदि किसे कहा गया है
Varchobhedi is

169 / 213

भग्नसंधानकृत है
Bhagna samdhānakrita is

170 / 213

विषापह: गुण वाला है -
Vishāpah is guna of

171 / 213

अग्निमन्थ का समावेश किस पंचमूल में है ?
Agnimantha is included in which Panchmūla

172 / 213

अष्टांग हृदयानुसार जांगल मांसरस होता है -
Jāmgala māmsa rasa according to Ashtāmga Hridaya is

173 / 213

सतिक्तकटुकक्षारं' किस लवण का गुण है
"Satiktakatukakshāram" is guna of which lavana

174 / 213

निम्न अग्नि में पकाये गये अपूप में उत्तरोत्तर लघुता का सही क्रम है -
What is the v correct order of progressive laghutā of apūpa cooked in fire

175 / 213

........फलोत्तमा वृष्या चक्षुष्या किस फल के सन्दर्भ में कहा गया है ?
".............phalottamā vrishyā chakshushyā" has been said in context of which fruit

176 / 213

अष्टाङ्ग हृदयानुसार, निम्नोक्त में से किसका कार्य वातानुलोमन है ?
According to Ashtānga Hrudya, which of the following is having Vātānulomana effect ?

177 / 213

कुलत्थ का विपाक है (अष्टांगहृदय)
Vipāka of Kulattha (Ashtāmga Hridaya)

178 / 213

शुक्रला: परं किसके मांस के लिए कहा गया है ?
"Shukralāh param" has been said for which māmsa

179 / 213

षष्टिक होता है
Shashtika is

180 / 213

पक्वं सुदूर्जरं ............दोषलंपूतिमारुतं रिक्त स्थान में है -
"Pakvam sudurjaram...........doshalam pūti mārutam" fill in the blank

181 / 213

अष्टांगहृदय अनुसार उमा किसका पर्याय है
According to Ashtāmga Hridaya, umā is Paryāya of

182 / 213

कथन 1.. " शुक्राश्मश्वास्पीनसान् .........घ्नन्ति पित्तास्रदा: परं " कुलथी का गुण है । (A.H) कथन 2. निष्पाव विष नाशक होता हैं । (A.H)
Statement 1- "Shukrāshmashvāsapīnasān....... ghnanti pittāstradāh param" is the property of Kulathī. ( A. H.) Statement 2-Nishpāva destroys Visha. ( A. H.).

183 / 213

श्रमहा रुचिशुक्रबलप्रद: मांस है -
"Shramahā ruchi shukra bala pradah" māmsa is

184 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार हरीतकी का वीर्य उष्ण होता हैं। कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार हरीतकी का वीर्य शीत होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vīrya of Harītakī is Ushna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vīrya of Harītakī is Shīta.

185 / 213

कथन 1.हितं लेपोपसेकयो: " गोधूम का गुण है । (A.H) कथन 2. " शुक्राश्मश्वास्पीनसान् .........घ्नन्ति पित्तास्रदा: परं " मूंग धान्य का गुण है । (A.H)
Statement 1- "Hitam Lepopasekayoh" is the property of Godhūma. ( A. H.) Statement 2- "Shukrāshmashvāspīnasān....... ghnanti Pittāstradāh Param" is the property of Mūnga Dhānya. ( A. H.)

186 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शमी का फल केशघ्न होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार सभी फलों में लकुच अवर होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, fruit of Shamī is Keshaghna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, In all fruits, Lakucha is inferior.

187 / 213

चार पैर वाले प्राणियों मे किसका मांस अपेक्षाकृत लघु होता है
Whose meat is relatively Laghu in four legged beings

188 / 213

गृन्जनक किस दोष के विकारों में अहितकर है
Grinjanaka is ahitakara in vikāra of which dosha

189 / 213

निम्न में से ग्राहि व हृद्या गुण युक्त है -
Which of the following is grāhi and hridhyā guna yukta

190 / 213

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार हींग पित्त प्रकोप करती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार हींग वात कफ को शांत करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Hīnga aggravates Pitta. Statement 2- According to Ashtānga, Hīnga calms Vāta Pitta.

191 / 213

कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार शिंबी धान्य विबन्ध करते हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार शिंबी धान्य लेप और सेक में उपयोगी होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Shimbī Dhānya does Vibandha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shimbī Dhānya is useful in Lepa and Seka.

192 / 213

बाल आम्र के गुण है -
Guna of bāla āmra

193 / 213

पीलु फल का गुण है -
Property of pīlu phala is -

194 / 213

एरंड सम्मिलित है -
Eranda is included in