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Charak Chikitsha Chapter 15 Grahani Chikitsha

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Charak Chikitsha Chapter 15 Grahani Chikitsha

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भस्मक रोग में दोषों की स्थिति रहती है
Sthiti of dosha in bhasmaka roga

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चंदनाद्य घृत का रोगाधिकार है
Rogādhikāra of Chandanādhya ghrita

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चरक अनुसार विसूचिका किस ग्रहणी में लक्षण स्वरूप में मिलती है ?
Visūchikā is found as symptom of which type of grahanī

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चरक ने किस आसव के लिए "रोगनिक विनाशन:" कहा हैं ?
Charaka has said "Roganīka Vināshanah" for which Āsava

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निम्न में से किस दोषज ग्रहणी की चिकित्सा पंचकर्म है ?
Treatment of which of the following doshaj grahani is panchkarma ?

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कटु अवस्थापक किस अवयव में होता है ?
Katu Avasthāpāka is in which avayava

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आवस्थिकी चिकित्सा वर्णित है :
Avasthiki Chikitsā is explained in

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धात्वाग्नि कितने प्रकार की होती है ?
Dhātvāgni is of how many types ?

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नागराद्य चूर्ण का अनुपान है -
Anupan of nagaradya churna is -

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पूर्वरुपम् तु तस्येदं तृष्णाSSलस्यं बलक्षय: किसका पूर्वरूप है
“Pūrvarūpam tu tasyedam trishnālasyam balakshayah” is pūrvarūpa of

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चित्रकादि वटी का रोगाधिकार है -
Rogadhikar of Chitrakadi vati is -

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गृद्धि सर्वरसानां लक्षण किस ग्रहणी का है?
" gRiddhi sarvarasānām" is the lakshana of which type of grahani ?

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ग्रहणी रोग चिकित्सा में कृष्णात्रेय द्वारा पूजित चूर्ण है
Which chūrna from grahanī chikitsā is highly esteemed by krishnātreya

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उदावर्त में मन्दाग्नि होने पर क्या चिकित्सा की जाती है ?
What treatment is done if mandagni occurs in Udavarta ?

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आवस्थिकी क्रिया किस व्याधि में वर्णित है ?
Aavasthiki kriya is mentioned in which disease ?

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चरक ने किस आसव किस लिए "रोगानिक विनाशनः" कहा है ?
Charaka has termed "Rogānika vināshanah" for which Āsava ?

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अत्यग्नि रोग शांत्यर्थ निम्न योग का विधान है
Which yoga is advised to pacify atyagni

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रस का उपधातु है -
Updhatu of rasa is -

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अधस्तु पक्वामामं वा प्रवृत्तं' किससे सम्बंधित है
“Adhastu pakvamāmam vā pravritam” is related to

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सभी अग्नियों से जठराग्नि प्रधान होने में क्या कारण है ?
Why is jatharāgni pradhāna among all agnis?

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दुर्बलाग्नि में दीपनार्थ क्या श्रेष्ठ है ?
What is best for Dīpana purpose in durbalāgni ?

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शुक्तपाकं खरांगता किस ग्रहणी का लक्षण है
“Shuktapākam kharāngatā” is the symptom of which grahanī

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निम्नलिखित में से कौन सा 'सर्वात्मना परिणमन ' का पर्यायवाची है?
Which of the following is the synonym for "sarvātmanā parinamana" ?

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चरक द्वारा ग्रहणी की चिकित्सार्थ वर्णित क्षार गुटिका में कितने लवण है ?
According to Charak, how many lavan are there in kshar gutika mentioned for the treatment of grahani ?

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चित्रकादि गुटिका विशेषतः है
Chitrākādi gutikā is mainly

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देहाग्निहेतुका' किसे कहा गया है
“Dehāgnihetukā” has been said for

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तन्मूलास्ते हि तद् वृद्धिक्षय वृद्धिक्षयात्मका: किस अध्याय का सन्दर्भ है ?
"Tanmoolaste hi tad vruddhikshay vruddhikshayatmaka" is the reference of which chapter ?

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अन्नमादानकर्मा' किस वायु को कहा गया है
“Annamādānakarmā” has been said for which vāyu

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ग्रहणी रोग में प्रयुक्त क्षार है
Kshāra advised in grahani disease

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किसी रोग से आक्रान्त होने के कारण मन्दाग्नि हो गयी हो , तो क्या चिकित्सा करनी चाहिए ?
If a person has Mandāgani, due to any disease thethe treatment is

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मध्वरिष्ट का रोगाधिकार है
Rogādhikāra of madhvārishta is

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चरक संहिता मतानुसार, चित्रकादि वटी मुख्य रूप से निर्दिष्ट है -
As per Charaka Samhita, Chitrakadi Vati is mainly indicated in -

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लीनं पक्वाशयस्थम वाSप्यामम स्त्रावयं सदीपने किस व्याधि का चिकित्सा सिद्धांत है
"Līnam pakvāshayasthama vāapyāmam srāvyam samdīpane" is the chikitsā sutra of

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ग्रहणी दोष का सामान्य निदान नही है
What is not a cause of grahanī dosha

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हृतपीड़ा कार्श्यदौर्बल्यं वैरस्यं परिकर्तिका किसका लक्षण है
“Hritapīdā kārshyadaurbalyam vairasyam parikartikā” is the symptom of

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क्षार गुटिका का प्रयोग किस व्याधि की चिकित्सा में किया जाता है ?
Kshar gutika is used in the treatment of which disease ?

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षट्त्वचा यह किस धातु का उपधातु है ?
Shat tvachā is dhātu of which upadhātu ?

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तक्रारिष्ट का प्रयोग किन व्याधियों में निर्दिष्ट है ?
Takrārishta is advised in which vyādhi

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चरक चिकित्सा 15 में अग्नि के कितने भेद बताये हैं।
Types of Agni in charaka chikitsā 15 are

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स्वेद को किस धातु का मल कहा गया है ?
Sweda is said as Mala of which Dhātu ?

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कौनसी अग्नि विदाह उत्पन्न करती है ?
Which agni leads to Vidāha ?

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चरक मतानुसार, ग्रहणी रोग में कितने प्रकार की अग्नियाँ सहायक होती है ?
According to Charaka, how many types of Agni are responsible for causing Grahanī roga ?

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वृष्यादीनां ......... पुष्णाति बलमाशु हि ।
"Vrushyadinam ......... pushnati balamashu hi"

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अतिसृष्टं विबद्धम् वा द्रवं तदुपदिश्यते। किस रोग का लक्षण है
“Atisrishtam vibadadham vā dravam tadupdishyate” is the symptom of which disease

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चरक संहिता में किन दो व्याधियों के लक्षण एक समान बताये गए हैं। निम्न में सही विकल्प चुने।
Which two diseases have similar symptoms in Charaka samhita

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चरक अनुसार षट त्वचायों की उत्पति होती है -
According to Charaka , six type of skin originates from

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ग्रहणी रोग में आमदोष के उदरस्थ/पक्वाश्यस्थ होने पर चिकित्सा करनी चाहिये?
What treatment should be done when āmadosha is located in udara/pakvāshaya in grahanī roga

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दुरालभासव निर्माण में प्रयुक्त हरीतकी की संख्या है
Quantity of haritaki in the formation of durālabhāsava

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चरक अनुसार कौनसी अग्नि विदाह उत्पन्न करती है ?
According to Charaka which agni causes vidāha ?

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आचार्य चरकमतानुसार त्वचा की उत्पत्ति किससे होती है ?
According to Āchārya Charaka , tvachā is originated from ?

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मनसः सदनं लक्षण किस व्याधि में पाया जाता है ?
"Manasah sadanam" is the symptom found in which disease ?

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तक्र का विपाक है -
Vipāka of takra is

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अतिसृष्टम विबद्धम् वा द्रवं किस व्याधि का लक्षण है ?
"Atisrushtam vibaddham va dravam" is the symptom of which disease ?

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ग्रहणी स्थित अग्नि दोषो को "ग्रहणी दोष" नाम किसने दिया हैं ?
Grahanī sthita agni dosha are named as "grahanī dosha" by whom

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तक्रारिष्ट किस रोग में प्रयोजय है
Takrārishta is advised in which disease

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किस धातु का मल अक्षीविट होता है
Mala of which dhātu is like akshīvita

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गृद्धि सर्व रसानां किस ग्रहणी का लक्षण है ?
"Gruddhi sarva rasanam" is the symptom of which grahani ?

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भोजन के पाक से पूर्व ही फिर से भोजन ग्रहण करना है
Taking a meal before complete digestion of previous meal is

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तस्यान्नं पच्यते दुखं किसका लक्षण है
“Tasyānnam pachyate dukham” is the symptom of

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उपधातु व मलों का वर्णन आचार्य चरक ने कहाँ किया है
Where did charaka explain upadhātus and malās?

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तक्रं तु ग्रहणी दोषे .................. |'
"Takram tu Grahanī doshe........."

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चरक में अत्यग्नि

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रस धातु का मल है -
Mala of rasa dhatu is -

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पिण्डासव' का रोगाधिकार है
Rogādhikāra of Pindāsava is

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अत्यग्नि का उपद्रव है -
Updrava of atyaagni is -

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चरक ने साम एवं निराम मल की परीक्षा का वर्णन किस अध्याय में किया है ?
Charaka has explained Sāma and Nirāma mala parikshā in which chapter

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पिप्पलीमूलादि चूर्ण किस दोषज ग्रहणी में प्रयुक्त किया जाना चाहिए ?
Pippalimooladi churna should be used in which doshaj grahani ?

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आचार्य चरक के अनुसार "स्नायु" का निर्माण .......... के द्वारा होता है।
According to Āchārya Charaka , Snāyu is formed by .......

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चरक अनुसार मध्वरिष्ट में मधु की मात्रा है -
According to Charak, quantity of madhu in madhvarisht is -

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अम्लोद्गार,दाह किस अग्निमांद्य का लक्षण है
Amlodagāra, dāha is the symptom of which agnimāmdhya

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चतुर्थ क्षार की मात्रा है -
Dose of chaturth kshar is -

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स्नायु एवम् सन्धियों का निर्माण होता है
Snāyu and samdhī are formed from

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धातुओं का शोषण किस अग्नि द्वारा होता है ?
Dhatu gets exploited due to which agni ?

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युक्तं भुक्तवतो युक्तो........... रिक्त स्थान भरो।
“Yuktam bhuktavato yukto..............” fill in the blank

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नरे क्षीणकफे पित्तं कुपितम् मारुतागम् यह पंक्ति किस व्याधि के निदान के सन्दर्भ में है
“Nare kshīnakaphe pittam kupitam mārutāgama” this is in the context of nidāna of which vyādhi

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तक्र ग्रहणी में लाभदायक है , क्योंकि -
Takra is very useful in grahani because it is

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विदाहोSन्नस्य पाकश्च चिरात् कायस्य गौरवं किस व्याधि का पुर्वरूप है
“VidāhoAnnasya pākashcha chirāta kāyasya gauravam” is the pūrvarūpa of which vyādhi

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लोहामगन्धिस्तिक्ताम्ल उद्गारश्च किस व्याधि का लक्षण है ?
"Lohamagandhistiktamla udgarashch" is the symptom of which disease ?

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स्त्रीष्वहर्षण ..'लक्षण है -
Stīshvaharshana is the symptom of

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व्यत्यासात चिकित्सा किस ग्रहणी में की जानी चाहिए ?
Vyatyasat chikitsa should be done in which grahani ?

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किस व्याधि में यदि अजीर्ण भी हो जाए तो बार बार भोजन देना चाहिए
In which disease food should be given in regularly even if the patient suffers from ajīrna

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चरक अनुसार ग्रहणी का स्थान है -
According to Charak, region of grahani is -

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प्लीहाशङ्की किस प्रकार की ग्रहणी का लक्षण है
Plīhashamki is the symptom of which type of grahanī

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किस प्रकार की ग्रहणी से पीड़ित कृश न होते हुए भी दुर्बल होता है
In which type of grahanī the patient is not lean but still weak

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चरक अनुसार ग्रहणी के भेद
Types of grahanī according to charaka are

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पिण्डासव का प्रयोग रसायन रूप में कितने समय तक करने का विधान है
Use of pindāsava as rasāyana has been said for how long

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रक्त धातु का मल है -
Mala of rakt dhatu is -

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अत्यग्नि रोग में विरेचनार्थ कौन सा सिद्ध दुग्ध प्रशस्त है
The purgation therapy is administered to a patient of atyāgni by boiling milk with

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वैरस्य हृतपीड़ाकिस ग्रहणी का लक्षण है
“Vairasya hritapīdā” is the symptom of which grahanī

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चरकानुसार मरिचादि चूर्ण का रोगाधिकार है
Rogādhikāra of marichādi chūrna according to charaka is

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क्षार गुटिका में सुधाकाण्ड की मात्रा है -
Quantity of sudakanda in kshar gutika is -

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स वातगुल्महृद्रोगप्लीहाशंकी च मानव: ' कौनसी ग्रहणी का लक्षण है
“Sa vātagulmahridrogaplīhāshamkī cha mānavah” is the symptom of which grahanī

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कौन सी चिकित्सा अत्यग्नि रोग में निर्दिष्ट नही है
Which treatment is not advised in atyagni?

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पुरीष का रस होता है
Rasa of purīsha is -

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जीर्णे जीर्यति चाध्मानं भुक्ते स्वास्थ्यमुपैति किसका लक्षण है
“Jīrne jīryati chādhamānam bhukte svāsthyamupaiti” is the symptom of

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गृद्धि सर्वरसानां' किस व्याधि का लक्षण है
“Gridhi sarvarasanām” is the symptom of which disease

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पञ्चम त्रिफलादि क्षार की मात्रा है -
Dose of pancham triphaladi kshar is -

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अग्नि पर आश्रित होता है -
Dependent on agni is -

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नागराद्य चूर्ण किस ग्रहणी में दिया जाता है ?
Naagaradya churna is given in which grahani ?

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कर्णयो: स्वन: किस ग्रहणी का लक्षण हैं ?
"Karnayo swana" is the symptom of which grahani ?

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......... मेव परं विद्याद् दुर्बलानलदीपनम्
"............ mev param vidyad durbal analadipanam"

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रस का उपधातु है -
Updhatu of rasa is -

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चरक अनुसार रसों का विक्षेपण किस वायु द्वारा होता है ?
According to Charak, vikshepan of rasa is due to which vayu ?

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हृदयं मन्यते स्त्यानमुदरं किसका लक्षण है
“Hridyam manyate styānamudaram” is the symptom of

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भुक्ते अन्ने लभते शान्ति जीर्णमात्रे प्रताम्यति किसका लक्षण है ?
"Bhukte anne labhate shanti jirnamatre pratamyati" is the symptom of ?

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अन्नपाचन क्रिया में रसों की उत्पत्ति क्रमशः होती है -
Order of origin of rasa in the process of digestion is -

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त्वक् स्नेह किसका मल है
Tvaka sneha is mala of

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चित्रकादि गुटिका का भावना द्रव्य है -
Bhavna dravya of chitrakadi gutika is -

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हृदयं मन्यते स्त्यानम्' किस ग्रहणी का लक्षण है
“Hridyam manyate styānama” is the symptom of which grahanī

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मरिचादि चूर्ण का रोगाधिकार है -
Rogadhikar of marichadi churna is -

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शोथं कुष्ठं किलासं च प्रमेहांश्च प्रणाशयेत् किस योग की फलश्रुति है ?
"Shotham kushtham kilasam ch pramehanshch pranashyet" is the property of which yog ?

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अधिक स्निग्ध पदार्थ के सेवन से यदि अग्नि मन्द पड़ गयी हो तो क्या हितकारी होता है
What should be given in agni māndhya due to excessive intake of snigdha dravya

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पालयेत् प्रयतस्तस्य स्थितौ ह्यायुर्बलस्थिति: सन्दर्भ है
“Pālayeta prayatastasya sthitau hayāyurbalasthitih” is the context from

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रसादि धातुओं की उत्पत्ति होती है -
Rasa etc dhatu originates -

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भूनिम्बाद्य चूर्ण का प्रयोग किस व्याधि में होता है
Bhūnimbādhya chūrna is used in which disease

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कांडरा किसका उपधातु है
Kamdara is updhātu of

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चरक मतानुसार "लीनं पक्वाशयस्थं वाप्यामं स्राव्यं संदीपनै:| शरीरानुगते सामे रसे लंघन पाचनम्" यह किसका चिकित्सा सूत्र है ?
As per Charaka, "Leenampakvashyastham Vāpyamam Sravyam Sandeepanaih I Sharīrānugate Sāme Rase Langhana Pāchanam" ll is the chikitsā sūtra of which of the following condition ?

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आचार्य चरक के अनुसार दुरालभासव निर्माण में दुरालभा का प्रयुक्त प्रमाण कितना है
Quantity of durālabha in the preparation of durālabāsava according to charaka is

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किस प्रकार की ग्रहणी में अन्न दुखपूर्वक पचता है
In which type of grahanī digestion of food is difficult

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चरकानुसार अस्थि का मल है
According to charaka Mala of asthi is

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चरकानुसार श्रेष्ठ दीपन द्रव्य है -
According to Charaka, best Dīpana drug is -

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शान्तेSग्नौ म्रियते यह श्लोक चरक संहिता के किस अध्याय में उल्लिखित है ?
According to Charaka Samhitā, the verse "Shānte Agnou Mriyate" is mentioned in which chapter ?

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अन्नमादानकर्मा तु ....... कोष्ठं प्रकर्षति
"Annamadanakarma tu ........ koshtham prakarshati"

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किस ग्रहणी में चन्दनाद्य घृत का प्रयोग करने का निर्देश है
Chandanādhya ghrita has been asked to use for treatment of which grahanī

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पथ्य और अपथ्य का एक साथ सेवन करना क्या कहलाता है ?
Intake of pathya & apathya together is called as ?

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अत्यग्नि रोग में प्रशस्त घृत है।

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मध्वरिष्ट का गुण है -
Guna of Madhwarishta is

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चरक अनुसार तक्रारिष्ट की मात्रा है -
According to Charak, dose of takrarishta is -

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मात्रा से अधिक या अल्प या निश्चित काल से पहले ही किये गए आहार को क्या कहते हैं
If the food is taken too much or too little in quantity or taken too early then it is called

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