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Charak Chikitsha Chapter 20 Chardi Chikitsha

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Charak Chikitsha Chapter 20 Chardi Chikitsha

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सैंधव लवण के साथ में मंदोष्ण घृत का सेवन करना -कौन से रोग की चिकित्सा है।
Consuming mandoshna ghrita with saindhava lavana is treatment of which disease

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वमन में लवण,अम्ल,नील ऊष्ण और रक्त मिला हुआ पदार्थ होना किस छर्दि का लक्षण है
Vomit which is lavana, amla, nīla , sandra, ushna and rakta mishrita padārtha is the symptom of which chardi

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छर्दि के उपद्रवों की चिकित्सा किसके समान करनी चाहिए वमन के अत्यधिक रूप में होने पर)
Complications of chardi should be treated like due to excessive vomiting

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मनशिला प्रयोग किस अवस्था मे किया जाता है ?
When Manahshilā is used in Chhardī

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चरकानुसार छर्दि के कितने भेद हैं
Types of chardi according to charaka

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चरक अनुसार छर्दि का भेद नहीं है
Which of the following is not a types of chardi

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अतितीव्र छर्दी वेग को शांत करने हेतु कौनसे द्रव्य का प्रयोग किय़ा जाता हैं ?
To pacify extremely forceful urge to vomit what should be used

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असाध्य छर्दि की सम्प्राप्ति मे वात द्वारा किन स्त्रोतो का अवरोध होता है ?
Which strotās are obstructed by Vāta in the Samprāpti of Asādhya Chhardī

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उद्गारशब्दप्रबलम् किस छर्दी का लक्षण हैं ?
"Udgārashabdaprabalam" is the symptom of which type of chardi

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छर्दि में किस दोष की चिकित्सा करनी चाहिए ?
Treatment of which dosha should be done in Chhardi ?

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छर्दी में संशोधन किस प्रकार का होना चाहिये?
Samshodhāna in chardi should be

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हृदुत्क्लेश, कफप्रसेक, द्वेषोsशने' किसका पूर्वरूप है
"Hridautklesha, kaphapraseka, dveshoashane" is premonitory symptom of

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आमाशयोत्क्लेशभवा' किस व्याधि के लिए कहा गया है
"Āmāshayotkleshahava" has been said fir

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बीभत्स दृश्य को देखने से उत्पन व्याधि है -
Bībhatsa darshana

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नीचे दो कथन दिये हुए है - असरशन A - छर्दिरोग में सर्वप्रथम लंघन ही कराना चाहिए। रिसन R - क्योंकि छर्दि रोग आमाशय में उत्कलेश से ही उत्पन्न होते हैं उपरोक्त विकल्प में से सही विकल्प चुनिये।

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सलोमहर्षोअ्ल्परूजं वमेत्तु - छर्दि की किस अवस्था का लक्षण है ?
Salomharshamalparujo Vamettu is the lakshana of which stage of Chhardī

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हृदुत्क्लेशकफप्रसेकौ द्वेषोsशने' किसका पूर्वरूप है
Hrudutklesha kaphaprashekauh Dweshoashne is the pūrwarūpa of

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दोषर्तुरोगाग्निबलान्यवेक्ष्य प्रयोजयेच्छास्त्रविदप्रमत्तः - किस छर्दि रोग की चिकित्सा है ?
Dosha tu Rogāgnibalānyavekshya Proyojayechchhāstravidpramattāh is the treatment of which Chhardī

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चरकोक्त कफज छर्दि में निःसृत कफ का स्वरूप क्या है
Kapha that expels out in kaphaja chardi is

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मनशिला प्रयोग किस अनुपान सङ्ग करना चाहिए ?
Anupāna of Manahshilā is

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नीचे दो कथन दिये हुए है - असरशन A - वातजन्य छर्दिरोग में लंघन व विरेचन नहीं कराना चाहिए। रिसन R - क्योंकि इनके प्रयोग से पित्त की अतिवृद्धि हो जाती है । उपरोक्त विकल्प में से सही विकल्प चुनिये।

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वातज छर्दि मे निकला आमाशयिक पदार्थ किस रस का होता है ?
The Āmāshayika substance comes out in Vātaja Chhardī is of which Rasa

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लवणाम्लनीलसान्द्रोष्णरक्तं वमतां नृणां स्यात्- किस छर्दि का लक्षण है ?
Lavanāmlanēlasāndroshnaraktam vamatām nranām syāt is the lakshana of which Chhardī

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वातज छर्दि से पीडित रोगी का हृदय दुर्बल होने की स्थिति मे किस द्रव्य युक्त घृत का पान करवाया जाता है ?
Which dravya yukta Ghrita is used in Vātaja Chhardī if the patient is having a weak hridaya

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वातज छर्दी की चिकित्सा है -
Chikitsa in Vataja Charddi

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शोणितपूययुक्ता , सचन्द्रिका- किस छर्दि का लक्षण है ?
Shonitapūyayukta Sachandrikā is the lakshana of

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असाध्य छर्दि होगी?
Asādhya chardi is

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किस छर्दि में प्रथम लंघन नही कराना चाहिए
Lamghana should not be done first in which type of chardi

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विछिन्न द्रव्य किस प्रकार की छर्दि में निकलता है
Vicchinna dravya is expelled out in which type of chardi

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चरकानुसार दीर्घकालिक छर्दि की चिकित्सा है
Treatment of dīrghakālika chardi according to charaka is

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नीचे दो कथन दिये हुए है - असरशन A -आमातिसार में सर्वप्रथम संग्राही औषध प्रयोग वर्ज्य है । रीज़न R - अन्यथा गुल्म, ज्वर, ग्रहणी,श रोग उत्पन्न होते हैं उपरोक्त विकल्प में से सही विकल्प चुनिये।

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पित्तज छर्दि मे निकला आमाशयिक पदार्थ किस रस का होता है ?
The Āmāshayika substance comes out in pittaja Chhardī is of which Rasa

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छर्दि रोग में पहले लंघन ही करना चाहिए सिवाय
Lamghana should be done first in chardi except for

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विण्मूत्रयोस्तत समवर्णगन्धं तृट्श्वासहिक्कार्तियुतं किसका उपद्रव है ?
Vinmūtrayostat samvarnagandham trathikkashwāsārtiyutam is the Upadrava of

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समश्र्तः सर्वरसानां प्रसक्तमामप्रदोषर्तुविपर्ययैश्र्च - किस छर्दि का निदान है ?
Samsratāh sarvarasānām Prasaktamāmapradoshārtuviparyayaischa is the nidāna of which Chhardī

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