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Charak Chikitsha Chapter 29 VatRakta Chikitsha

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Charak Chikitsha Chapter 29 VatRakta Chikitsha

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विरेच्यः स्नेहयित्वाअ्अ्दौ स्नेहयुक्तैर्विरेचनैः । - इस श्लोक का रेफेरंस बताये ।
Virechyah snehyitwāādo snehayuktai virechaneh is the reference of

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चरक ने प्रवेपक

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चरकोक्त सुकुमारक तैल में प्रयुक्त मधुक

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तस्य स्थानकरौ पादावङ्गुल्यः सर्वसन्धयः - निम्न मे से किस व्याधि के स्थान है ?
Tasya sthāna karau pādāvangulāh Sarvasandhyah is the site for which disease

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.....रुक्षैर्वा मृदुभि: शस्तमस्कृद्वस्तिकर्म च' चरकानुसार किस व्याधि का चिकित्सा सूत्र है?
".......rukshairavā mridubhih shastamaskridavastikatma cha" chikitsā sutra of which disease

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उत्तान वातरक्त किस स्थान मे आश्रित होता है ?
Site for Uttāna Vātarakta is

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निम्न में से वातरक्त मे किस उपद्रव का होना मात्र उसके असाध्य होने का सूचक है ?
Which of the following Upadrava when present in Vātarakta, states that it is Asādhya

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सन्धिशैथिल्यमालस्यं सदनं पिडकोद्गमः - वातरक्त की किस अवस्था के लक्षण है ?
Sandhisaithilyamālasyam sadanam pidikodagmah is the symptoms of which stage of Vātarakta

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वातरक्त में मलावृत होने पर ......विरेचन देना चाहिए |
If malavruta occurs in vatrakta , ......... virechan should be given.

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जीवनीय घृत की मात्रा है -
Quantity of jeevaniya ghrut is

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सुप्ति मन्दा च रुक किस वातरक्त का लक्षण है
"Supti mandā cha ruka" is the symptom of which Vāta rakta

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चरक अनुसार तगरादि लेप का प्रयोग किसमें निर्दिष्ट है ?
According to Charaka, use of Tagarādi Lepa is indicated in which of the following ?

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प्रायशः सुकुमाराणां मिष्ठान्नसुखभोजिनाम् । अचंक्रमणशीलानां कुप्यते.... निदान किस व्याधि से सम्बन्धित है
"Prāyashah sukumārānām mishthānnabhojināma. Achamkramana shīlānām kupyate..... cause of which disease

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चतुष्यप्रयोगात्तद्धन्ति मारुतशोणितम् - निम्न मे से किस के विषय मे कहा गया है ?
Chatushya Prayogāttaddhanti Mārutshonitamis

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पिण्डतैल में कौनसा घटक द्रव्य नहीं है ?
Which of the following is not a content of pinda taila

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वातरक्त का स्थान क्या है
Sthāna of Vāta Rakta is

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वातरक्त की उत्तम चिकित्सा है
Best treatment for Vātarakta

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त्रिदोषज वातरक्त होता है
Tridoshaja vātarakta is

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वन्ध्यसुतप्रदम घृत है
Vandhyasutapradam ghrut is

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चरकानुसार शतपाक बला तैल का विशेष रोगाधिकार है
Rogādhikāra of shatapāka balā taila according to charaka

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कफ प्रधान वातरक्त में किसका अधिक प्रयोग निषिद्ध है
Use of which of the following is contraindicated in Kapha Pradhāna Vātarakta

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श्वयथुभृशरुक तोदताम्रश्चिमीचिमायते किस वातरक्त का लक्षण है ?
"Shvayathubhrisharuka todatāmrashchchimchimāyate" is the symptom of which Vāta rakta

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वातरक्त में रक्तमोक्ष्ण के लिए निषेध है
Which is contraindicated for Raktamokshana in Vātarakta

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वातबलास किस व्याधि का पर्याय है
Vātabalāsa is synonym of which disease

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चरकानुसार तैल एवम् उसके मुख्यघटक के सन्दर्भ में असत्य युग्म है
Which of the following is untrue in regards of an oil preparation and its main content as per charaka

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वातरक्त मे निम्न में से किस दाल का सेवन उत्तम है ?
Which pulse consumption is best for Vātarakta

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पारुषक घृत का प्रयोग किस रोग की चिकित्सा में किया जाता है ?
Use of parushak ghrut is done in which of the following roga ?

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चरक के अनुसार वातरक्त सर्वप्रथम अपना स्थान कहाँ बनाता है
First site of manifestation of Vāta Rakta according to Charaka is

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सौक्षमयात सर्वसरत्वाच्च पवनस्यासृजस्तथा -निम्न मे से किस व्याधि के स्थान है ?
Saukshamyāt sarvasaratvāchcha Pawanasyāsrajstathā is the site of following disease

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पिण्डतैल का रोगाधिकार है -
Rogādhikāra of Pinda Taila is -

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चरकानुसार वातरक्त में वेदना,दाह,तोद होने पर रक्तमोक्षण के लिए प्रयुक्त उपकरण है
What should be used in Vātarakta for raktamokshana if there is vedana, dāha and toda according to Charaka

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वातरक्त का उपद्रव है
Complication of Vāta Rakta is

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खंज पंगु किस वातरक्त का लक्षण है
Khamja pamgu is symptom of which Vāta rakta

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दोषानुसार वातरक्त के कितने भेद है ?
Types of Vātarakta by Dosha

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न हि ....... किंचिद्वातरक्तचिकित्सितम् " - निम्न मे से किस के विषय मे कहा गया है ?
Na hi ....... Kimchita Vātarakta Chikitsha is

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श्यावस्ताम्रोअ्थवा दाहःतोदस्फुलणपाकवान् - वातरक्त की किस अवस्था के लक्षण है ?
Shyāvāh Tāmro Athavā Dāhah Todsphuranapākwān is the lakshana of which stage of Vātarakta

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रक्तमार्ग निहन्त्याशु शाखासन्धिषु - वातरक्त की किस अवस्था के सन्दर्भ मे कहा गया है ?
Raktamārga Nihantyāshu shākhāsamdhishu is said for which stage of Vātarakta

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बोधिकवृक्ष कषाय का निर्देश किसकी चिकित्सा हेतु किया गया है ?
Indication of Bodhikavruksha Kashāya is done for the treatment of which disease ?

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चरक अनुसार तगरादि लेप का प्रयोग किसमें निर्दिष्ट है ?
According to Charak, application of tagaradi lepa is indicated in which of the following ?

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जब वातरक्त के लक्षण एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हुए दिख रहे हो , तब रक्तमोक्षण की कौनसी विधि का प्रयोग करना चाहिए ?
When the symptoms of Vāta Rakta are seen moving from one site to the other, which type of rakta mokshana should be done

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आचार्य चरक के अनुसार " स्वेदोअ्तयर्थ वा कार्ष्ण्य स्पर्शाज्ञत्वं क्षतेअ्तिरुक् " -निम्न मे से किस व्याधि के स्थान है ?
Acc. to Acharya charak " Swedoatyartham vā kārshanyam sparshāgatwam kshateatiruk " is the symptom of which of the following disease ?

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अन्विता श्यावरक्ता त्वग्बाह्ये ताम्रा तथेष्यते - वातरक्त की किस अवस्था के लक्षण है ?
Anvitā Shyāvaraktā Twagbāhye Tāmrā tathishyate is said for which stage of Vātarakta

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वातरक्त मे " सुप्ति , कण्डू , चिमचिमायन " होने पर किसके द्वारा रक्तमोक्षण करना चाहिए ?
Raktamokshana in Vātarakta, when is associated with Supti kandū Chimchāyanam is done by

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स्वेदोSत्यर्थं न वा कार्ष्यणं स्पर्शाज्ञत्वं क्षतेSतिरूक किस व्याधि के पूर्वरूप है ?
"Svedo ayartham na vā kārshyanam sparshāgnatvam kshate atirūka" is the Pūrvarūpa of which disease ?

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शूलनिवारणम् । परिषेकोअ्निलप्राये तद्वत् कोष्णेन सर्पिषा - निम्न मे से किस के विषय मे कहा गया है ?
Shūla Nivāranam Parishekoanilaprāye Tat Vat koshanen Sarpishā is said in

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वातरक्त का श्रेष्ठ चिकित्सा उपक्रम माना गया है -
Best line of treatment for Vātarakta is -

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वातरक्त की चिकित्सा में निम्न प्रयोग निर्दिष्ट है
What is advised in treatment of Vāta Rakta

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बोधिवृक्ष कषाय का किसके साथ सेवन करने पर त्रिदोषज वातरक्त नष्ट होता है ?
Bodhivriksha kashāya along with what pacifies tridoshaja Vāta Rakta

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दो दोषों से उत्पन्न वातरक्त होता है
Vātarakta caused due to two doshas is

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प्रपौण्ड्रीकादि लेप किस वातरक्त का नाश करता है
Prapondarikādi lepa cures which type of Vātarakta

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वातशोणित के भेद चरक अनुसार है -
Types of vāta shonita according to Charaka are -

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चरक मतानुसार वातरक्त में किस उपद्रव के प्रधान रुप से होने पर यह असाध्य हो जाता है ?
According to Charaka, predominance of which complication in Vātarakta leads to incurable ?

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वातरक्त में अपथ्य है
Apathya in Vātarakta

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गम्भीर वातरक्त किस स्थान मे आश्रित होता है ?
Site for Gambhīra Vātarakta is

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दशमूल श्रुतं क्षीर सद्यः शूलनिवारणं। किस व्याधि के सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Dashamūla shrutam kshīra sadhyah shūlanivāranam" has been said in context of which disease

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पिण्ड तैल का रोगाधिकार है ?
Rogādhikāra of Pinda Taila is -

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वायुर्विवृद्धो वृद्धेन रक्तेनावारितः पथि - निम्न मे से किस व्याधि की सम्प्राप्ति है ?
Vāyuh Viveaddho Vraddhena Raktenāvāritah pathi is the samprāpti of

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वातरक्त में कफ मेदो हर ..........के कारण होता है |
Kapha medo hara in Vātarakta is due to

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बन्ध्या सुत् प्रदम् - निम्न मे से किस कल्पना के विषय मे कहा गया है ?
Bandhyā sut Pradam is said for which Kalpanā

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वातरक्त के किस प्रकार में स्निध एवं रुक्ष उपचारो से रोग का शमन नहीं होता है ?
Which type of Vāta Rakta does not gets pacified by snigdha and ruksha upachāra

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कफ़वातप्रधान वातरक्त में शीतल लेप करने से उत्पन्न है
Shītala lepa in kapha vāta pradhāna Vātarakta results in

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सुकुमारक तैल का रोगाधिकार है -
Rogādhikāra of Sukumāraka Taila is -

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सर्वांगैकाङ्गवाते च क्षतक्षीणे क्षतज्वरे - निम्न मे से किस के विषय मे कहा गया है ?
Satwāngaikāngavāte cha khatakshīne kshatjwareis said for

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पिण्डतैल का गुणधर्म होता है -
Gunadharma of Pinda taila is

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सर्षपादि लेप हितकर है
Sarshapādi lepa is beneficial in

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दशमूल शृत क्षीर सद्य शूलनिवारणम् किस व्याधि के सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Dashamūla Shruta Kshīra Sadya Shūlanivāranam" is said in context to which disease ?

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खुडड रोग' किस व्याधि का पर्याय है
"Khudda roga" synonym of which disease

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एकदोष से उत्पन्न वातरक्त होता है
Ekadosha utapanna Vāta rakta is

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वातरक्त में दाहशान्त्यार्थ प्रयुक्त योग है
Yoga for dāhashānti in Vātarakta

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खुडड वातबालसाख्यमाद्यवातमं च नामभी: आचार्य चरक का उपर्युक्त कथन किस व्याधि के सन्दर्भ में है ?
"Khudda Vātabalāsākhyamādyavātamam cha Nāmabhīh" is the statement of Āchārya Charaka in context to which disease ?

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