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Charak Siddhi Chapter 2 Panchakarmiya Siddhi

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Charak Siddhi Chapter 2 Panchakarmiya Siddhi

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार पांडु रोगी अनुवासन बस्ती के योग्य होता हैं। कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार कमला रोगी अनुवासन बस्ती के योग्य होता हैं।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Anuvāsana Basti is indicated in patient of Pāndu. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Anuvāsana Basti is given in patient of Kāmalā.

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कथन 1.चरक अनुसार अति कृश वमन के अयोग्य हैं । कथन 2. चरक अनुसार अति कृश वमन के योग्य हैं ।
Statement 1- According to Charaka, excess weak are contraindicated for Vamana. Statement 2- According to Charaka, excess weak are indicated for Vamana.

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कथन 1.चरक अनुसार अति कृश वमन के अयोग्य हैं । कथन 2.चरक अनुसार अति स्थूल वमन के अयोग्य हैं ।
Statement 1- According to Charaka, excess lean is contraindicated for Vamana. Statement 2- According to Charaka, excess obese is contraindicated for Vamana.

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प्रमेह व्याधि से पीड़ित रोगी को अनुवासन बस्ति देने से कौनसा विकार उत्पन्न होता है ? ( चरक )
Which disorder is developed if anuvāsana basti is given to a person suffering from prameha ? ( Charaka )

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार गुल्म रोगी निरुह बस्ती के योग्य होता हैं। कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार भगंदर रोगी निरुह बस्ती के योग्य होता हैं।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Nirūha Basti is indicated in patient of Gulma. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Nirūha Basti is indicated in patient of Bhagandara.

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार अजीर्ण रोगी निरुह बस्ती के अयोग्य होता हैं। कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार अतिस्निग्ध रोगी निरुह बस्ती के अयोग्य होता हैं।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, patient of Ajīrna is contraindicated for Niruha Bastī. Statement 2- According to Charaka Siddhi, patient of excess Snigdhatā is contraindicated for Niruha Basti.

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निम्न में से कौन से रोगी अनुवासन बस्ति के अयोग्य है ?
Which of the following patient is not suitable for Anuvāsana Bastī

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कथन 1.चरक अनुसार गुल्म रोगी वमन के अयोग्य हैं । कथन 2.चरक अनुसार हृदय रोगी वमन के अयोग्य हैं ।
Statement 1- According to Charaka, patient of Gulma is contraindicated for Vamana. Statement 2- According to Charaka, patient of Hrudya is contraindicated for Vamana.

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नव प्रतिश्याय के रोगी को नस्य देने से क्या परिणाम हो सकता है ? ( चरक )
According to charaka, what are the consequences of giving nasya to a nava pratishyāya rogī ?

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तिमिर ........योग्य है
"..............is indicated for Timira"

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निरूह बस्ति के अयोग्य है
Contraindicated for Niruha vasti is

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चरक अनुसार किस स्थिति में नस्य का निषेध है ?
Nasya is contraindicated in which disease

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गर्भिणी स्त्री को नस्य देने से क्या परिणाम हो सकता है ? ( चरक )
What is the consequence when nasya is administered in a pregnant woman ? ( Charaka )

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A.चरक सिद्धि अनुसार नूतन प्रतिश्याय से पीड़ित रोगी शिरो विरेचन के अयोग्य होता हैं । R. ऐसा करने से रोगी को अतिसार हो जाता हैं।
A. According to Charaka Siddhi, patient suffering from acute rhinitis is contraindicated for Shirovirechana. R. Doing this can lead to Atisāra.

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अर्श रोग मे अनुवासन बस्ति देने से कौन सी व्याधि उत्पन्न होती है ?
Which disease is seen after we give Anuvāsana Bastī in piles patient

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पीतस्नेहमद्यतोयपातुकामानां इस अवस्था में नस्य देने से क्या परिणाम होता है ? ( चरक )
What is the consequence if nasya is given in the condition of "pītasnehamadyatoyapātukāmānām" ? ( Charaka )

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चरक सिद्धिस्थान अध्याय 2 मे कितनी चिकित्साओं का वर्णन किया गया है ?
How many chikitshā are described in Charaka Siddhī sthāna 2 Chapter

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वमन का निषेध किया गया है
Vaman is contraindicated in

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निम्न में से किस स्थिति में नस्य का निषेध है ?
Nasya is contraindicated in which condition ?

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नवज्वर एवं शोकाभिघात से पीड़ित व्यक्ति में नस्य देने से क्या परिणाम हो सकता है ? ( चरक )
What could be the consequences if a person suffering from navajwara and Shokābhighāta is administered with nasya ? ( Charaka )

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार नूतन ज्वर का रोगी विरेचन के अयोग्य होता हैं । कथन2 .चरक सिद्धि अनुसार मदात्यय का रोगी विरेचन के योग्य होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, patient of Nūtana Jwara is contraindicated for Virechana. Statement 2- According to Charaka Siddhi, patient of Madātyaya is indicated for Virechana.

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नव ज्वर मे निम्न में से कौन सा कर्म निर्दिष्ट है ?
Which is indicated in Nava jwara

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नवज्वर एवं पाण्डुरोग से ग्रस्त व्यक्ति में अनुवासन बस्ति देने से कौनसा विकार उत्पन्न होता है ? ( चरक )
What consequences occur when anuvāsana basti is given in a person suffering from navajwara and pāndu roga ? ( Charaka )

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गर्भिणी को शिरोविरेचन देने से गर्भ/बालक मे निम्न में से कौन सी स्थिति उत्पन्न होती है ?
Which disease is likely to happen to Garbha / child if we give shirovirechana to Garbhinī

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार गर्भिणी को नस्य देने से बालक पक्ष हत से पीड़ित हो जाता हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार शिर से स्नान किया हुआ शिरो विरेचन के अयोग्य होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, if pregnant woman is given Nasya, the offspring suffers from hemiplegia. Statement 2- According to Charaka, a person who has taken head bath is contraindicated for Shiro Virechana.

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शिर से स्नान किये हुए व्यक्ति को नस्य देने से कौनसा विकार उत्पन्न होता है ? ( चरक )
Which disorder is developed when nasya is given to a person who has taken bath from head ? ( Charaka )

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार ज्वर का रोगी विरेचन के योग्य होता हैं । कथन2 .चरक सिद्धि अनुसार शुक्र दोष का रोगी विरेचन के योग्य होता हैं।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Virechana is indicated for patient of Jwara. Statement 2- According to Charaka, Virechana is indicated for patient of Shukra Dosha.

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दारुण कोष्ठवाले व्यक्ति को विरेचन देने से क्या परिणाम होता है ? ( चरक )
What is the effect when a person with dāruna koshtha is given virechana ? ( Charaka )

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विरेचन के बाद नस्य देने से क्या परिणाम हो सकता है ? ( चरक )
What is the consequence if nasya is given after virechana ? ( Charaka )

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कृमि कोष्ठ में निर्दिष्ट कर्म है
Which karma is advised in krimi Koshtha

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अनुवासन पश्चात् नस्य देने से क्या परिणाम हो सकता है ? ( चरक )
What is the consequence if nasya is administered after anuvāsana ? ( Charaka )

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किस स्थिति में नस्य का प्रयोग निषिद्ध है
In which disease nasya is contraindicated

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चरकानुसार निम्न में से किस स्थिति में नस्य का निषेध है
Nasya is contraindicated in which disease mentioned below

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अनुवासन बस्ति निषिद्ध है -
Anuvāsana basti is contraindicated in -

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निम्न में से किस अवस्था ने शिरोविरेचन नही करना चाहिए
Which of the following situation is contraindicated for Shirovirechana

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निम्न में से किस उदररोग में निरुह का प्रयोग नही करना चाहिए
Which if the udara roga is contraindicated for niruha

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चरकानुसार अनुवासन के अयोग्य रोगी हैं
A patient contraindicated for anuvāsana according to charaka is

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गर्भिणी गर्भ स्तम्भयेत् स काणः कुणिः पक्षहतः पीठसर्पी वा जायते - यह कारण किस कर्म के सन्दर्भ मे आये है ?
"Garbhinī Garbh stambhagauravanigrahe sa kānah kunih pakshadharmā pīthasarpi vā jāyate" this reason is in the context of which karma

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A.चरक अनुसार अतिस्थूल और अति कृश को वमन नहीं कराना चाहिए। R.अतिस्थूल और अति कृश स्वभाव से दुर्बल होते हैं और वमन औषधि के बल को सहन नही कर पाते हैं और सेवन करने से प्राण नष्ट हो जाते हैं।
A. According to Charaka, Vamana should not be given to emaciated and obese person. R. Obese and emaciated individuals are incapable to tolerate effects of drugs which are used for Vamana causing danger to their lives.

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चरक ने किस स्थिति में नस्य का निषेध किया है ?
Charaka has contraindicated Nasya in which condition ?

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कथन 1. चरक अनुसार नूतन ज्वर में वमन देना चाहिए। कथन 2 .चरक अनुसार राजयक्ष्मा में रोगी को वमन करना चाहिए ।
Statement 1- According to Charaka, Vamana should be done in Nūtana Jwara. Statement 2- According to Charaka, Vamana should be done in patient of Rājayakshmā.

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शीत (हेमन्त) ऋतु में नस्य देने का समय क्या है
At what time nasya should be given in shīta(Hemanta ritu)

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केदारसेतुभेदे शाल्याद्यशोदोषविनाशवत् - यह किस कर्म के सन्दर्भ मे कहा गया है ?
"Kedārasetubhede shālyādhyashodoshavināshvat" is said in the context of

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शिरोविरेचन निषिद्ध है-
Shirovirechana is contraindicated in -

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प्रधानतममित्युक्तं वनस्पतिमूलच्छेदवत् - यह किस कर्म के सन्दर्भ मे कहा गया है ?
"Pradhāntamamitiyuktam vanaspatimūlachchhedavat" is said in the context of which karma

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वमन कराना उचित है
Vamana is preferred in

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार नूतन प्रतिश्याय से पीड़ित रोगी शिरो विरेचन योग्य होता हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार नूतन प्रतिश्याय से पीड़ित रोगी शिरो विरेचन के अयोग्य होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, patient of acute Pratishyāya is indicated for Shiro Virechana. Statement 2- According to Charaka Siddhi, patient of acute Pratishyāya is contraindicated for Shiro Virechana.

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कथन 1. चरक अनुसार उर्ध्वग रक्तपित्त में वमन नहीं कराना चाहिए। कथन 2. उर्ध्वग रक्तपित्त का रोगी जब वमन द्रव सेवन करता हैं तो वमन द्रव्य समान वायु को ऊपर ले जाकर प्राण को नष्ट कर देता है और रक्त को अधिक मात्रा में निकालता हैं ।
Statement 1- According to Charaka, Vamana should not be given in Urdhvaga Raktapitta. Statement 2- Patient of Urdhvaga Raktapitta may take out vital breath by pushing Samāna Vāyu upwards and may cause excessive bleeding.

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निम्न में से कौन से रोगी मे निरुहवस्ति के अयोग्य है ?
Which of the following patient is not suitable for Nirūha Bastī

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निम्न में से किस स्थिति में वमन , विरेचन कर्म - दोनो वर्जित है ?
In which of the following Vamana and Virechana both are contraindicated

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गुल्म में कौनसा कर्म निषिद्ध है
Which karma is contraindicated in.gulma

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चरक मतानुसार नस्य किस ऋतु में करना चाहिए ?
According to Charaka, Nasta should be done in which ritu ?

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निम्न में से किस व्याधि मे वमन कर्म निर्दिष्ट है ?
Vamana karma is indicated in which of the following

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चरकानुसार शिरोविरेचन के अयोग्य है
Contraindications for Shirovirechana according to Charaka

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार अजीर्ण से पीड़ित रोगी शिरो विरेचन अयोग्य होता हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार सिर से स्नान किया हुआ शिरो विरेचन के अयोग्य होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, a patient suffering from Ajīrna is contraindicated for ShiroVirechana. Statement 2- According to Charaka Siddhi, a person who has taken bath from head is contraindicated for ShiroVirechana.

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ग्रीष्म ऋतु में नस्य देने का काल है
Time period of nasya in Grīshma ritu

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किस रोग में निरुह बस्ति का निषेध है
Niruha Basti is contraindicated in which disease

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अजीर्ण के रोगी को नस्य देने से कौनसा विकार उत्पन्न होता है ? ( चरक )
Which disorder is developed when a patient of ajīrna is administered nasya ? ( Charaka )

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार प्रावृट् ,शरद व बसंत ऋतु में नस्य का प्रयोग करना चाहिए । कथन 2 .चरक सिद्धि अनुसार दुर्दिन में नस्य नहीं देना चाहिए ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Use of Nasya should be done in Prāvrut, Sharada and Vasanta Ritu. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Nasya should not be given in bad days.

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चरक अनुसार अनास्थाप्य रोग है -
According to Charaka, Anāsthāpya Roga is -

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इति्युक्तमग्नयुपशमेअ्ग्निगृहवत् - यह किस कर्म के सन्दर्भ मे कहा गया है ?
"Itiyuktanagnayupshameagnigruhavat" is said in the context of which karma

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A.चरक सिद्धि अनुसार नूतन सिर से स्नान किए हुए रोगी को शिरो विरेचन नही देना चाहिए। R. ऐसा करने से रोगी को प्रतिश्याय हो जाता हैं।
A. According to Charaka Siddhi, a person who has taken head bath should not be given Shirovirechana. R. Doing this can lead to Pratishyāya.

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कथन 1.चरक अनुसार मंद अग्नि से पीड़ित को वमन करना चाहिए । कथन 2.चरक अनुसार अतिसार के रोगी को वमन करना चाहिए।
Statement 1- According to Charaka, a person suffering from Mandāgni should be given Vamana. Statement 2- According to Charaka, patient of Atisāra should be given Vamana.

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उर्ध्वजत्रुगत रोगों में प्रयोज्य प्रधान कर्म है (चरक)
Pradhāna karma for Urdhavajatrugata roga is

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निम्न में से किस व्याधि मे विरेचन कर्म निर्दिष्ट है ?
In which of the following virechana karma is indicated

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मुञ्जादीषिकामिवासक्तां केवलं विकारकरं दोषमपकर्षति - यह किस कर्म के सन्दर्भ मे कहा गया है ?
"Munjādīshikāmivāsaktām kevalam vikārakaram doshamapakarshati" is said in the context of which karma

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कथन 1.चरक अनुसार तिमिर रोगी वमन के अयोग्य हैं । कथन 2.चरक अनुसार तिमिर रोगी वमन के योग्य हैं ।
Statement 1- According to Charaka, Vamana is contraindicated in patient of Timira. Statement 2- According to Charaka, Vamana is indicated in patient of Timira.

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