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Charak Siddhi Chapter 9 Trimarmiya Siddhi

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Charak Siddhi Chapter 9 Trimarmiya Siddhi

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रक्तग्रन्थि का स्थान है -
Site of Raktagranthi is -

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार स्त्री के मूत्र मार्ग में उत्तर वस्ति देते समय दो अंगुल पुष्प नेत्र अंदर प्रविष्ट करना चाहिए । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार स्त्री को उत्तर वस्ति देते समय उत्तान सुलाना चाहिए ।
Statement 1 - According to Charaka Siddhi, while giving Uttara Basti in urinary tract of females, Pushpa Netra should be inserted upto Two Angula. Statement 2 - According to Charaka Siddhi, Female should be given Supine position while giving Uttarabasti.

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शिरकम्प और अर्दित रोगोंं मे किस नस्य का प्रयोग किया जाता है ?
Which nasya is used in disease such as shirah kampa and ardita ?

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अर्धाववेधक में उतम माना गया है
What is best in ardhāvabhedaka

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पुष्पनेत्र प्रमाण तु प्रमदानाम् कितने अंगुल निर्दिष्ट है ?
How many angula are indicated in " Pushpanetra Pramāna Tu Pramadānām " ?

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हृदये व्याकुलीभावो वाक्चेष्टेन्द्रियगौरवम् - यह निम्न मे से किस व्याधि के लक्षण है ?
"Hrudye vyākulībhāvo vākcheshtendriyagauravam" is the symptom of which disease ?

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स्त्रियों मे उत्तर बस्ति किस तरह शयन करवाकर देनी चाहिए ?
In females Uttara basti is given by laying down in which direction

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कथन 1.'त्रिरात्रात्जीवीतं हन्ति' शंखक व्याधि के लिए कहा गया है । कथन 2."कपोत इव कूजेच्च" अपतंत्रक व्याधि का लक्षण हैं।
Statement 1- "Trirātrātjīvītam Hanti" is said for Shankhaka. Statement 2- "Kapota Eva Kūjechha" is the symptom of Apatantraka.

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चरकानुसार मर्मत्रय है
Marmatraya according to charaka are

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छोटी बालिकाओं के मूत्रमार्ग में कितना बस्ति नेत्र प्रविष्ट करना चाहिए। (चरक)
What length of Basti Netra should be inserted in mutramārga of younger women

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार स्त्री के योनि मार्ग में उत्तर वस्ति देते समय चार अंगुल पुष्प नेत्र अंदर प्रविष्ट करना चाहिए । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार स्त्री के मूत्र मार्ग में उत्तर वस्ति देते समय दो अंगुल पुष्प नेत्र अंदर प्रविष्ट करना चाहिए ।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, Pushpa Netra should be inserted upto Four Angula in Vagina of females while giving Uttara Basti. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, Pushpa Netra should be inserted two Angula in Urinary tract while giving Uttara Basti in females.

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चिरं धारयतो मूत्रं त्वरया न प्रवर्तते किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Chiram dhāryato mūtram tvarayā na pravartate" has been said in context of

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जिह्वानिर्गममुखतालुशोष - निम्न मे से किस स्थान के आघात के लक्षण है ?
"Jihvānirgamamukhatālushosha" is the symptom caused due to trauma on which region ?

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उत्तरवस्ति देते समय स्त्रियों के अपत्यमार्ग में बस्ति नेत्र कितना प्रविष्ट करते हैं
How much basti netra should be inserted in apatyamārga of a female while administering uttara vasti

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सूर्यावर्त रोग मे शिर की पीड़ा कब बढ़ती है ?
When the discomfort in sūryāvarta roga is increased

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार नस्य कर्म के पांच भेद होते हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार नस्य कर्म के दो भेद होते हैं ।
Statement 1 - According to Charaka Siddhi, Nasta Karma is of Five Types. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Nasya karma is of two types.

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कथन 1.चरकानुसार सूर्यावर्त रोग मे भोजन से पहले घृतपान करने को कहा गया है । कथन 2.चरकानुसार सूर्यावर्त रोग मे भोजन के बाद घृतपान करने को कहा गया है ।
Statement 1- According to Charaka, in Sūryāvarta, intake of Ghruta should be done before meal. Statement 2- According to Charaka, in Sūryāvarta, intake of Ghruta should be done after meal.

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निम्न मे से किस बस्ति रोग मे मूत्र और मल की रुकावट होती है ?
In which of the following basti roga , there is obstruction in urine and stool ?

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मूत्र और मल मार्ग की रुकावट होना निम्न मे से किस व्याधि का लक्षण है ?
Obstruction in Mūtra and mala mārga is the lakshana of

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार शरीर में स्कंध और शाखा के आश्रित 107 मर्म होते हैं । कथन 2. स्कंध में होने वाले मर्मो से हृदय, वस्ति और शिर के मर्म प्रधान होते हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Marma residing in Skanda and Shākhā are 107. Statement 2- In Marmas of Skandha, Hrudya, Basti and Shira are superior.

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तन्द्रा की चिकित्सा है
Treatment of tandra is

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चरकानुसार सूर्यावर्त में दोष प्राधान्य है
Dosha pradhānya in suryāvarya according to Charaka

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तीक्ष्ण प्र्धमन नस्य किसकी चिकित्सा है (चरक)
Tīkshana Pradhamana Nasya is the treatment for

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चरकोक्त कथन कौन सा है
Which of the following is said by Charaka

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चरक अनुसार वातकुण्डलिका है -
According to Charaka, Vātakundalikā is -

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कथन 1.चरक अनुसार " तीव्रांं कुर्वन्ति सा चाक्षिभ्रूशंखेष्ववतिष्ठते " - यह अनंतवात व्याधि का लक्षण है । कथन 2.चरक अनुसार " तीव्रांं कुर्वन्ति सा चाक्षिभ्रूशंखेष्ववतिष्ठते " - यह शंखक व्याधि का लक्षण है ।
Statement 1- According to Charaka, "Tīvrām Kurvanti Sā Chākshibhrūshankheshvavatishthate" is the symptom of Anantavāta. Statement 2- "Tīvrām Kurvanti Sā Chākshibhrūshankheshvavatishthate" is the symptom of Shankhaka accordingto Charaka.

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स्त्रियों मे पुष्प नेत्र को प्रविष्ट करने सम्बंदित कौन सा कथन असत्य है ?
Which of the following statement is wrong with respect to the entry of Pushpa Netra in females

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अर्धावभेदक मे शस्त्र से काटने समान या अरणी मन्थन के समान तीव्र वेदना किस स्थान मे उत्पन्न होती है ?
In Ardhāvbhedaka disease, heavy pain is like cutting with Shastra and Aranī manthana is seen at

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किस व्याधि मे वायु मूत्रस्थान और मूत्र मार्ग मे भग्न , व्याविद्ध और कुण्डली के समान चलती हुए मूत्र की रुकावट कर देती है ?
In which disease, Vāyu running like kundalī, bhagna, and vyāviddha causes obstruction of urine in the Mūtra mārga and Mūtra sthāna

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चरकानुसार सूर्यावर्त रोग मे कब घृतपान करने को कहा गया है ?
According to Charaka , when should ghrutapāna be done in sūryāvarta ?

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किस धातु का सम्बन्ध विशेष रूप से मर्म के साथ होता है ?
Which of the following dhātu is specifically related to marma ?

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रक्तपित्त मे किस नस्य का प्रयोग किया जाता है ?
Which nasya is used in raktapitta ?

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वाताष्ठीला का लक्षण है
Symptom of Vāta Ashthīlā is

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कथन 1 " जिह्वानिर्गममुखतालुशोष " - हृदय मर्म आघात का लक्षण है । कथन 2 ." जिह्वानिर्गममुखतालुशोष " - शिर मर्म आघात का लक्षण है ।
Statement 1- "Jihvānirgamana Mukhatālushosha" is the symptom of trauma to Hrudya Marma. Statement 2- Jihvānirgamana Mukhatālushosha" is the symptom of trauma to Shira Marma.

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कण्डुयुक्त वस्तिरोग कौन सा है
Vastiroga with itching is

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चरकानुसार नावन के भेद हैं -
Types of Nāvana, according to Charaka -

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हृदि मुक्त नर: स्वास्थ्यम् याति मोहं वृते पुनः यह किस रोग के सन्दर्भ में आया है
"Hridi mukta narah svāsthyama yāti moham vritte punah" is in the context of which disease

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पित श्लेष्म हर चिकित्सा की जाती है
Pitta shleshmahara chikitsā is done.for

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चरक के अनुसार पुरुष में पुष्प नेत्र की लम्बाई होनी चाहिए
Length of pushpa netra for a male according to Charaka

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उत्तरबस्ति के सन्दर्भ में इस श्लोक को पूरा करें - पुष्पनेत्रप्रमाणं तु प्रमादानां ...........
Complete the sentence said in the context of uttarabasti. Pushpanetrapramānam tu pramādānām...........

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A. स्त्री में उत्तर वस्ति ऋतु काल में दी जाती हैं । R. ऋतु काल में गर्भाशय का मुख खुला रहता हैं और योनि शीघ्र ही स्नेह को धारण कर लेती हैं ।
A. Uttara Basti in females is given in Ritukāla. R. In Ritukāla, the mouth of the uterus remains open and the vagina soon embraces the Sneha.

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ऐसा कौनसा शिरोरोग है जिसके अधिक बढ़ जाने पर नेत्र व श्रवणेन्द्रिय नष्ट हो सकती है ?
Aggravation of which disease can destroy netra and shravanendriya

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार अर्धावभेदक में वात, कफ प्रमुख दोष होते हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार शंखक में वात, पित्त रक्त दोष कारण होते हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Vāta, Kapha dosha are dominant in Ardhāvabhedaka. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Vāta, Pitta, Rakta dosha are dominant in Shankhaka.

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कौनसे रोग की अतिवृद्धि होने पर नयन एवं श्रोत्र का विनाश होता है (चरक)
Severity of which disease destroys vision and hearing according to Charaka

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अनन्तवात मे किस स्थान पर तीव्र वेदना होती है ?
In Anantavāta , there is severe pain in which region ?

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार सूर्यावर्त में वात और रक्त दोष कारण होते हैं । कथन 2. चरक सिद्धि अनुसार अर्धावभेदक यदि बढ़ जाए तो नेत्र या कर्ण इंद्री को नष्ट कर देता है। ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Vāta and Rakta dosha are cause in Sūryāvarta. Statement 2- According to Charaka Siddhi, if Ardhāvabhedaka increases, it destroys senses of eyes and ears.

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ज्वर तथा शोक आदि से सन्तप्त पुरुषोंं मे नस्य प्रयोग से किस व्याधि की उत्पति होती है ?
Which disease occurs when nasya is given in a person rested with jwara and shoka ?

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मुत्रौकसाद बस्ति रोग की चिकित्सा है
Treatment of Mūtouksāda Basti roga is

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चक्षुर्विभ्रममोहोद्वेष्टन - निम्न मे से किस स्थान के आघात के लक्षण है ?
"Chakshurvibhramamohodveshtana" is the symptom caused due to trauma on which region ?

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चरकानुसार शंखक रोग में प्रधान दोष क्या हैं
Pradhāna dosha in shamkhaka roga

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प्रतिमर्श नस्य का प्रयोग किस ऋतु मे किया जाता है ?
Pratimarsha nasya is used in which ritu ?

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार नावन के दो भेद होते हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार अवपीड़ के दो भेद होते हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Nāvana is of two types. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Avapīda is of two types.

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त्रिरात्रात्जीवीतं हन्ति' किस व्याधि के लिए कहा गया है ?
"Trirātrātjīvītam hanti" is said for which disease ?

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अर्धावभेदक में दोष है (चरक)
Dosha in ardhāvabhedaka according to Charaka
ed

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तन्द्रा की चिकित्सा मे किस रस से युक्त भोजन लेना चाहिए ?
For the treatment of Tandrā , food should be taken containing which rasa ?

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कथन 1 .मुत्रौकसाद बस्ति रोग की चिकित्सा वात और कफ नाशक है । कथन 2.मुत्रौकसाद बस्ति रोग की चिकित्सा पित्त और कफ नाशक है ।
Statement 1- Treatment of Mutraukasāda Basti Roga is Vāta and Kapha Nāshaka. Statement 2- Treatment of Mutraukasāda Basti Roga is Pitta and Kapha Nāshaka.

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नस्य का प्रयोग किस काल मे करना चाहिए ?
Use of nasya should be done in which time of the day ?

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हृदि मुक्त नरः स्वास्थ्यं याति मोहं वृते पुनः - यह किस व्याधि के विषय मे कहा गया है ?
"hrudi mukta narah swāsthyam yāti moham vrite punah" is said in relation to which disease ?

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निम्न मे से क्या हृदय मे वर्तमान रहता है ?
Which of the following is found in Hridaya

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स्त्रियों में उत्तरबस्ति देने के लिए पुष्प नेत्र का प्रमाण कितना होना चाहिए
What should be the pramāna of pushpa netra for adminstering uttarabasti in women

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कथन 1.उदावर्त ,गुल्म अष्ठीला हृदय मर्म आघात के लक्षण है । कथन 2.उदावर्त ,गुल्म वात अष्ठीला- वस्ति मर्म आघात के लक्षण है
Statement 1- Udāvarta, Gulma, Ashthīlā - are symptoms of injury to Hrudya Marma. Statement 2- Udāvarta, Gulma, Vāta Ashthīlā - are symptoms of injury to Basti Marma.

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चरकानूसार कर्म के आधार पर नस्य के भेद हैं
Types of nasya according to karma by charaka

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चरक ने किस स्थिति में नस्य का निषेध किया है ?
Charaka has contraindicated nasya in which condition ?

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कपोत इव कूजेच्च किस व्याधि का लक्षण है
"Kapota iva kūjechcha" is symptom of which disease

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आचार्य चरक मतानुसार, शरीर मे शाखा और स्कन्ध आश्रित कितने मर्म है ?
How many marma of shākhā and skandha resides in the body according to Charaka ?

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आचार्य चरक के अनुसार सूर्यावर्त में किस दोष की प्रमुखता है।
Dosha dominance in suryāvarta according to charaka is

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कथन 1.अपस्मार , उन्माद , संज्ञा नाश - शिर मर्म आघात के लक्षण है । कथन 2.अपस्मार , उन्माद , संज्ञा नाश - वस्ति मर्म आघात के लक्षण है
Statement 1- Apasmāra, Unmāda, Sangnā Nāsha - are symptoms of Shira Marma Āghāta. Statement 2- Apasmāra, Unmāda, Sangnā Nāsha - are symptoms of Basti Marma Āghāta.

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चरकानुसार निम्न में से किस वस्तिरोग को "घोरं शस्त्रविषोपमम्" कहा गया है
"Ghoram shastravishopamam" has been said for which vasti roga by charaka

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शंखक रोग के विषय मे कौन सा कथन असत्य है ?
Which of the following statement is wrong with respect to Shankhaka

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चरक अनुसार, प्रधमन नस्य हेतु नलिका की लम्बाई कितनी होनी चाहिए ?
According to Charaka, the length of nozzle to be used for "Pradhamana Nasya" is -

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार शंखक में प्रधान दोष वात,पित्त और रक्त होते हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार शंखक में विसर्प समान चिकित्सा करनी चाहिए ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, predominant dosha in Shankhaka is Vāta, Pitta and Rakta. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Treatment similar to Visarpa should be done in Shankhaka.

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चरकानुसार निम्न मे व्याधियो से सम्बंदित दोषों के विषय मे कौन सा युग्म गलत है ?
According to Charaka , which of the following pair is incorrect for disease related to doshas ?

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जिस प्रकार सूर्य मे सूर्य की किरणें बंधी रहती है - यह उपमा निम्न मे से किसके सन्दर्भ मे दी गयी है ?
"Like rays of sun remain in sun" this is said in context of

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार अपतंत्रक में तीक्ष्ण प्रधमन किया जाता हैं । कथन 2.अपतंत्रक में कफ वात शामक और हृदय रोग शामक कर्म हितकर होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Tīkshna Pradhamana is done in Apatantraka. Statement 2- Kapha Vāta Shāmaka and Hrudya Roga Shāmaka Karma is beneficial in Apatantraka.

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निम्न मे से किस व्याधि मे शुक्र मूत्र से पहले या पीछे गिरता है ?
In which of the following disease Shukra come before and after urine

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार नावन के दो भेद होते हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार स्नेहन और शोधन अवपीड़ के दो भेद होते हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Nāvana is of two types. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Snehana and Shodhana Avapīda is of two types.

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शस्त्र से काटने समान या अरणी मन्थन के समान तीव्र वेदना किस व्याधि मे उत्पन्न होती है ?
In which disease, heavy pain is like cutting with Shastra and Aranī manthana

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निम्न मे से कौन सा लक्षण मूत्र जठर व्याधि मे नही मिलता ?
Which of the following symptoms is not seen in Mūtra jathara disease

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देहस्त्रोतोविशोधनम् - निम्न में से किसका गुण है ?
"Dehastrotovishodhanam" is the quality of which of the following ?

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मर्मस्थानोंं की रक्षा विशेष रूप से किस से करनी चाहिए ?
Regions of marma should be specially protected with which of the following ?

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार प्रतिमर्श नस्य स्नेहन और शोधन दोनो करता हैं । कथन 2.चरक सिद्धि अनुसार मद्य पीने वाले पुरुष में नस्य के प्रयोग से तिमिर हो जाता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Pratimarsha Nasya does Snehana and Shodhana. Statement 2- According to Charaka Siddhi, use of Nasya in alcoholic person causes Timira.

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उत्तर वस्ति में द्रव्य प्रमाण है (चरक)
Pramāna of dravya in uttara vasti

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मनुष्य के प्राण किस मे आश्रित रहते है ?
Where does prāna of a person resides ?

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विसर्प नाशक चिकित्सा किस व्याधि में कही गयी है
Visarpa nāshaka chikitsā is said in which disease

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कथन 1. चरक अनुसार मूत्र जठर में मूत्र विरेचन औषधि का प्रयोग करना चाहिए । कथन 2. मुत्रौकसाद बस्ति रोग की चिकित्सा पित्त और कफ नाशक है ।
Statement 1- According to Charaka, Mūtra Virechana medicines should be used in Mūtra Jathara. Statement 2- Treatment of Mutraikasāda Basti roga is Pitta and Kapha Nāshaka.

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चरक ने नस्य के कितने भेद किये हैं
Types of nasya according to Charaka

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ऐसा कौनसा शिरोरोग है, जिसके अधिक बढ़ जाने से नेत्र व श्रवणेन्द्रिय नष्ट हो सकती है ?
Which is Shiroroga, due to which its increase can destroy the eyes and hearing?

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कथन 1 .चरक सिद्धिस्थान 9 मे 12 प्रकार के वस्ति रोग कहे गए है । कथन 2.चरक सिद्धिस्थान 9 मे 13 प्रकार के वस्ति रोग कहे गए है ।
Statement 1- In Charaka Siddhi Sthana 9, 12 types of Basti Roga are mentioned. Statement 2- In Charaka Siddhi Sthana 9, 13 types of Basti Roga are mentioned.

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अश्मरी के समान वेदना होती है
Pain similar to Ashmari is felt in

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अर्धावभेदक मे किस प्रकरण मे वर्णित चिकित्सा करनी चाहिए ?
Which type of same treatment is done in Ardhāvbhedaka

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मूत्रौकसाद मे किस वर्ण के मूत्र का त्याग होता है ?
In mūtraukasāda , urine of which colour expels out ?

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कथन 1.चरकानुसार मर्मत्रय हृदय वस्ति और शिर हैं । कथन 2.चरकानुसार मर्मत्रय हृदय वस्ति और क्लोम हैं ।
Statement 1- According to Charaka, Marma Traya are Hrudya, Basti and Shira. Statement 2- According to Charaka, Marma Traya are Hrudya, Basti and Kloma.

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द्वारं हि शिरसो नासा - इस श्लोक का रेफेरेंस बताये ?
" dwāram hi shiraso nāsā " reference of this shloka is -

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अपतन्त्रक व्याधि मे कुपित वायु किन स्थानों में जाकर पीड़ा उत्पन्न करती है ?
In apatantraka disease , dominant vāyu causes pain in which region ?

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मूत्रक्षय ......दोष प्रधान है
Mūtrakshaya is .......dosha pradhāna

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चरक के अनुसार शंखक व्याधि कितने दिनों में प्राणों को हर लेती है
Samkhaka Vyādhi kills a patient in how many days according to charaka

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चरक सिद्धिस्थान 9 मे कितनी प्रकार के वस्ति रोग कहे गए है ?
How many types of basti roga are mentioned in Charaka Siddhi sthāna 9 ?

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पूरत्ययुदरं मूत्रं तदा निमित्तरुककिस बस्ति रोग का लषन है
"Puratyayudaram mūtram tadā nimitta ruka" is symptom of which mūtra roga

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आचार्य चरक के अनुसार स्त्री के मूत्रमार्ग में प्रवेशार्थ बस्ति नेत्र की लम्बाई कितनी होनी चाहिए ?
According to Charaka, how much should be the length of basti netra use of insert in the urinary tract of female ?

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स्त्रियों में उत्तरबस्ति देने की स्थिति क्या है
In what position women are given uttara vasti

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तीव्रांं कुर्वन्ति सा चाक्षिभ्रूशंखेष्ववतिष्ठते - यह किस व्याधि का लक्षण है ?
" Tīvrām kurvanti sā chākshibhranshakheshvavatishthate " is the symptom of which disease ?

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रक्तग्रंथि व्याधि मे रक्त की दुष्टि मुख्यतः किस दोष द्वारा होती है ?
In raktagranthi disease , dushti of rakta mainly occurs due to which dosha ?

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उत्तरबस्ति हेतु स्त्रियों के लिए प्रयोग किये जाने वाले पुष्पनेत्र की लम्बाई आचार्य चरक मतानुसार कितने अंगुल होती है ?
According to Āchārya Charaka, how much Angula long Pushpa netra should be used for giving Uttarabasti in females ?

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चरक अनुसार रक्तग्रंथि का स्थान क्या है ?
Where is rakta Granthi located according to Charaka

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प्रतिमर्श नस्य किस प्रकार का कार्य करता है ?
Pratimarsha nasya does which type of function ?

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शिरोविरेचन नस्य का प्रयोग निम्न मे से किस मे करते है ?
Use of shirovirechana nasya is done in which of the following condition ?

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निम्न मे से क्या हृदय मे वर्तमान रहता है ?
Which of the following resides in Hridaya

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अपस्मार , उन्माद , संज्ञा नाश - निम्न मे से किस स्थान के आघात के लक्षण है ?
Apasmāra , unmāda and sangnā nāsha are symptoms caused due to trauma of which region ?

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हृदय पर आघात से होता है (चरक)
What happens due to Āghāta on hridaya

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चरक के अनुसार नस्य भेदो में ...... नहीं आता।
According to Charaka, .......... does not come under types of Nasya .

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चरक ने सिद्धि स्थान में कितने मूत्र दोषो का वर्णन किया है
Number of mūtradosha described in charaka siddhi sthāna

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उत्तरवस्ति देने का सुयोग्य काल क्या है
When should Uttāna Vasti be given

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार अवपीड़ के दो भेद होते हैं । कथन 2.कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार स्नेहन और शोधन अवपीड़ के दो भेद होते हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Avapīda is of two types. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Snehana and Shodhana are types of Avapīda.

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र का प्रमाण 10 अंगुल स्त्री के लिए होता हैं । कथन 2. चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र का प्रमाण 12 अंगुल पुरुष के लिए होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, for females, length of Uttara Basti Netra is 10 angulas. Statement 2- According to Charaka Siddhi, length of Uttarabasti Netra for males is 12 angula.

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कथन 1. चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र का प्रमाण 12 अंगुल पुरुष के लिए होता हैं । कथन 2. चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र का प्रमाण 10 अंगुल पुरुष के लिए होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, length of Uttara Basti Netra for males is 12 angula. Statement 2- According to Charaka Siddhi, length of Uttara Basti netra for males is 10 angula.

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कथन 1.चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र सोने या चांदी का होना चाहिए। कथन 2. चरक सिद्धि अनुसार उत्तर वस्ति का नेत्र का प्रमाण 12 अंगुल पुरुष के लिए होता हैं ।
Statement 1- According to Charaka Siddhi, Netra of Uttara Basti should be of Gold or Silver. Statement 2- According to Charaka Siddhi, Netra of Uttara Basti should be of length 12 Angula.

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गर्भिणी को शिरोविरेचन से उत्पन्न हुए उपद्रवों में विशेष रूप से प्रयोग करना चाहिए
Pregnant women suffering from complications of Shirovirechana should use

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विच्छिन्नमुच्छेषगुरुशेफस: किसका लक्ष्ण है
Vichchinnamuchcheshagurushefasah is the symptom of

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कपोत इव कुजनम् ...लक्षण है -
Kapota iva kujanam.... is the symptom of

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चिरं धारयतो मूत्रं त्वरया न प्रवर्तते किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Chiram dhārayto mūtram tvarayā na pravartate" is said in context to which of the following ?

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किस व्याधि मे मूत्र कुछ देर से रुककर आता है
In which disease mūtra comes out after a while ?

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अवपीड़न नस्य के भेद है -
Types of avapīdana nasya

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