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Dosabhediya adhyaya AIAPGET MCQS

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12.Dosabhediya adhyaya

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अष्टांग हृदय के अनुसार कुपित कफ से मुख का रस होता है -
According to ashtānga samgraha, taste of mouth due to kupita kapha

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........युक्ता रुक्षाद्या वायो: कुर्वन्ति संचयं ।। रिक्त स्थान में है -
".......yuktā rukshādhyā vāyoh kurvanti samchayam" fill in the blank

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, अपान वायु का स्थान नही है -
Which of the following is not a sthāna of apāna vāyu according to Ashtānga Hrudya ?

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अन्नसंघात क्लेदनात् किसका कर्म है -
"Anna samghāta kledanāta" is karma of

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अष्टांगहृदय अनुसार वृद्ध दोषों के कितने भेद होते है
Types of Vriddha dosha according to Ashtāmga Hridaya

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वाग्भट के अनुसार व्याधि का त्रिविधत्व है-
Trividhatva of vyādhi according to Vāgabhatta is

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साधक पित्त का स्थान है -
Site of Sādhaka Pitta is -

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........... तत्र पक्वामाशयमध्यगं स्थान है -
"...............tatra pakvāmāshaya madhyagam" is the sthāna of

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कथन 1. अष्टांग हृदय सूत्र 12 के अनुसार व्याधि तीन और दो प्रकार की होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कर्म जन्य रोग कर्म के क्षय से शांत होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya Sutra 12, Vyādhi is of Three and Two Types. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Karma Janta Roga subsides by decay in Karma.

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार "उर: कण्ठचरो बुद्धिहृदयेन्द्रियचित्तधृक्" प्राण वायु का कर्म है - कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार ष्ठीवन, क्षवथु, उद्गार उदान वायु का कर्म है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Urah Kanthacharo Buddhihrudyendriyachittadhruk" is the karma of Prāna Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shthīvana, Kshavathu, Udgāra is the karma of Udāna Vāyu.

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नानारुपैरसंख्येयैविकारै: कुपिता मला: संदर्भ है -
"Nānārupairasamkhyeyaivikāraih kupitā malāh" find the correct reference

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महारम्भोSल्पके हतावातंको किस व्याधि के लिए कहा गया है ?
"Mahārambho alpake hatāvātanko" is said for which disease ?

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वाग्भट अनुसार कफ व पित्तदोष दोनों का स्थान है -
According to Vāgbhata, Sthāna of both kapha and pitta dosha is

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कफ दोष के 5 भेद सर्वप्रथम किस आचार्य ने बताये है -
5 types of kapha are given by which Āchārya for the first time

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......... तून्मार्गगामिता
..........tūnmārgagāmitā

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ऊर्जा प्रदान करने वाली है -
Ūrjā dāyaka is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "दोषा ऐव हि सर्वेषां रोगाणामेककारणम" । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार काल शीत, उष्ण और वर्षा के भेद से तीन प्रकार का होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Doshā ēva hi sarveshām rogānāmekakāranam". Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Kāla is of three types as Shīta, Ushna and Varshā.

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महाजव: है -
"Mahājavah" is

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार पक्वाशय वायु का विशेष स्थान हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार नाभी पित्त का विशेष स्थान हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Pakvāshaya is the specific site of Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Nābhi is the specific site of Pitta.

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मध्यम रोगमार्ग में होने वाला रोग है -
Diseases that manifest in Madhyama Rogamārga are

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार बसंत में कफ का संचय होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार ग्रीष्म में कफ का संचय होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Kapha is in Vasanta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Kapha is in Grīshma.

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यतैजसगुणोदयात् त्यक्तद्रवत्वं किस पित्त के सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Ya taijasa guno dayāta tyakta dravatvam" has been said in context of which pitta

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उन्मेषनिमेष कर्म किसके आधीन है
Unmesha Nimesha are karma of

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एक दोष की अधिक वृद्घि से संसर्ग के कितने भेद होते है -
Types of Samsarga due to vriddhi of one dosha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार अर्दित, पक्षवध, यक्ष्मा मध्यम मार्ग रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मर्म अस्थि सन्धि में होने वाले रोग मध्यम मार्गज रोग है ।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, Ardita, Pakshavadha, Yakshmā are Madhyama Mārga Roga. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, diseases occuring in Marma Asthi Sandhi are Madhyama Mārgaja Roga.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वसंत में कफ का संचय होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार शिशिर में कफ का संचय होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Kapha occurs in Vasanta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Kapha occurs in Shishira.

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मूर्धा (शिर) प्रदेश में स्थित रहने वाली वायु है -
Vāyu that is located in Mūrdhā(shira) is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार क्लेदक कफ आमाशय में स्थित रहता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार बोधक कफ शिर में रहता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kledaka Kapha resides in Āmāshaya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Bodhaka Kapha resides in Shira.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वर्षा में पित्त का संचय होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार शरद में पित्त का शमन होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Pitta occurs in Varshā. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shamana of Pitta occurs in Sharada.

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अष्टांग हृदय के मतानुसार शीत ऋतू में कफ का प्रकोप निम्नलिखित से नहीं होता है।
According to Ashtāmga Hridaya, which of the following is not a cause of kapha prakopa in shīta ritu

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किस एक ऋतू में वातदोष की चयावस्था होती है
Chaya avasthā of vāta dosha is found in which Ritu?

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रंजक पित्त का स्थान आमाशय बताया है -
Who specified the sthāna of ranjaka pitta as Āmāshaya ?

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दोषा एव हि सर्वेषां रोगाणामेककारणं' का सन्दर्भ
"Dosha eva hi sarveshām rogānāmekakāranam" find the correct reference

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार उष्ण गुण से वायु का संचय होता हैं। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार उष्ण गुण से वायु का शमन होता हैं। ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Vāyu occurs due to Ushna property. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shamana of Vāyu occurs due to Ushna property.

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, निम्नलिखित में से कौन सा एक ह्रदय में अवस्थित नहीं है ?
Which of the following is not situated in heart according to Ashtānga Hrudya ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय ने "हृदि स्थितः कृत्सनदेहचारी महाजवः" व्यान वायु के संदर्भ में कहा हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार समान वायु अग्नि के समीप रहती हैं ।
Statement 1- Ashtānga Hrudya has said "Krutsanadehachārī Mahājavah" in context to Vyāna Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Samāna Vāyu resides near to Agni.

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.........प्राप्यते दृष्टि: कर्म सिद्धिप्रकाशिनी ।। रिक्त स्थान में है -
"...........prāpyate drishtih karma siddhiprakāshinī" fill in the blank

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ष्ठीवन, क्षवथु, उद्गार किस वायु का कर्म है -
Shthīvana, kshavathu and udgāra are karma of which vāyu

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उर: प्रदेश में स्थित दोष है -
Dosha located in Urah pradesha is

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वाग्भट के अनुसार व्याधि का द्विविधत्व है -
Dvi vidhitva of vyādhi according to Vāgabhatta

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अष्टाङ्गहृदय मतानुसार , आमाशय में स्थित दोष है -
Dosha located in Āmāshaya is according to Ashtānga Hrudya is -

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रञ्जक पित्त का स्थान आमाशय किस आचार्य ने बतलाया है ?
Site of Ranjaka Pitta as "Āmāshaya" is said by which Ācharyā ?

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आभ्यांतर मार्ग में होने वाला रोग है -
Disease that occurs in ābhyāmtara mārga is

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार "अन्नप्रवेशकृत" उदान वायु का कर्म हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "अन्नप्रवेशकृत" प्राण वायु का कर्म हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Annapraveshakrut" is the karma of Udāna Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Annapraveshakrut" is the karma of Prāna Vāyu.

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अवलम्बक कफ का स्थान क्या है ?
What is the seat of Avalambaka Kapha ?

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न हि सर्वविकाराणां नामतो अस्ति ध्रुवा स्थिति:।' का सन्दर्भ
"Na hi sarva vikārānām nāmato asti dhruvā sthitih" find the correct reference

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वात, पित्त व कफ का प्रकोप होता है क्रमशः -
Vāta,pitta,kapha prakopa occurs respectively in

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पित्त जो त्वचा में स्थित रहता है, त्वचा को चमक प्रदान करता है और अनेक प्रकार के अनुप्रयोगों जैसे अभ्यंग, परिषेक का जिसके कारण पाचन हो जाता है। उस पित्त को कहते है .........
The pitta which is located in skin, it shines the skin and various applications on skin like abhyanga , parisheka are assimilated because of this pitta . This pitta is known as ........

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भाषणं सामिभुक्तस्य कौनसा मिथ्या योग है -
"Bhāshanam sāmibhuktasya" is mithyāyoga of

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बिना हेतु सेवन के उत्पन्न व्याधि होती है -
Diseases that occurs without hetu sevana is

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बाह्य मार्गगत व्याधि है -
Bāhya mārgagata vyādhi is

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A. अष्टांग हृदय अनुसार मनुष्य के शरीर में ग्रीष्म काल में वायु संचय होता हैं। R. क्योंकि ग्रीष्म में मनुष्य पंखे की हवा लेता हैं जिससे वजह से वायु का संचय होता हैं।
A. According to Ashtānga Hrudya, in Grīshma season, acculumation of Vāyu occurs in body of human. R. Because in Grīshma human takes air from the fan which leads to Vāyu accumulation.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वर्षा में वायु का प्रकोप होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार ग्रीष्म में वायु का संचय होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vāyu Prakopa occurs in Varshā. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vāyu Sanchaya occurs in Grīshma.

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परीक्ष्य भाव में शामिल नहीं -
What is not included in Purīsha bhāva

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दोषज रोग की चिकित्सा है -
Treatment of doshaja roga is

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महारम्भोऽल्पके हेतावातंको ......... रिक्त स्थान में है -
"Mahārambho alpake hetāvātamko.........." fill in the blank

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कोष्ठे चरति सर्वत: वायु है -
"Koshthe charati sarvatah" vāyu is

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तर्पक कफ का स्थान है -
Site of Tarpaka Kapha is -

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वाग्भट के अनुसार पित्त का विशेष स्थान है -
Vishesh sthāna of pitta according to Vāgabhatta is

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बुद्धि मेधाभिमानाधैरभिप्रेतार्थ साधनात् किसका कर्म है -
"Buddhi medhā abhimānādhairabhipretārtha sādhanāta" is the karma of

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अष्टाङ्ग हृदय के अनुसार , निम्नलिखित में से कौन सा वायु का स्थान नहीं है ?
According to Ashtānga Hrudya, which one is NOT the sthāna of vāta ?

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उर: कण्ठचरो बुद्धिहृदयेन्द्रियचित्तधृक् कर्म है -
"Urah kanthacharo buddhi hridayendriyachittadhrika" is karma of

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साधक पित्त का स्थान क्या है ?
What is the seat of Sādhaka Pitta ?

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श्लेषक कफ का स्थान क्या है ?
Which is the site of Shleshaka Kapha ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार रंजक पित्त आमाशय में रहता हैं। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार साधक पित्त त्वचा में रहता हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Ranjaka Pitta resides in Āmāshaya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Sādhaka Pitta resides in Tvachā.

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राजयक्ष्मा किस मार्गगत व्याधि है
Rājayakshmā is which mārga gata vyādhi

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कुपित पित्त का कर्म नही है -
Which of the following is not karma of kupita pitta ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार मषक, व्यंग, गण्ड, अलजी, अर्बुद बाह्य मार्ग में होने वाले रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कास, श्वास, उदर और ज्वर बाह्य मार्ग में होने वाले रोग हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Mashaka, Vyanga, Ganda, Alajī Arbuda are diseases of Bāhya Mārga. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Kāsa, Shwāsa, Udara and Jwara are diseases of Bāhya Mārga.

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संश्लेषण का कार्य करता है -
Samshlesha is karma of

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गुर्वल्पव्याधि संस्थानं ............ दृश्यतेऽप्यन्यधाकारं रिक्त स्थान में है -
"Gurvalpavyādhi samsthānam.......drishyate apyanyadhākāram" fill in the blank

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शीतेन युक्ता स्निग्धाद्या' से कफ का क्या होता है
"Shītena yuktā snigdhādhyā" causes kapha

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वाग्भट के अनुसार रंजक पित्त का स्थान है -
Sthāna of Ranjaka pitta according to Vāgabhatta is

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यथास्वजन्मोपशया: .......... स्पष्ट लक्षणा: व्याधि है-
"Yathāsvajanmopashayāh...........spashta lakshanāh" disease is

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चिकित्सा क्रम में निर्दिष्ट है -
What is advised in chikitsā krama

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प्राय: सर्वा: क्रियास्तस्मिन् प्रतिबद्धा: शरीरिणाम्। किसका लक्षण है ?
"Prāyah sarvāh kriyāstasmina pratibaddhāh sharīrīnām

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पूर्वरूप है
Pūrvarūpa is

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A. अष्टांग हृदय अनुसार तर्पक कफ शिर में रहता हैं । R.. अष्टांग हृदय अनुसार तर्पक कफ इन्द्रियों के बोधन करता हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, Tarpaka Kapha resides in Shira. R. According to Ashtānga Hrudya, Tarpaka Kapha does perception of senses.

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यथा पक्षी परिपतन् सर्वत: सर्वमप्यह:, छायामत्येति का सन्दर्भ है -
"Yathā pakshī paripatana sarvatah sarvampyahah chāyāmatyeti" find the correct reference

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार नाभी पित्त का विशेष स्थान हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार उर कफ का विशेष स्थान हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Nābhī is the specific site of Pitta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Ura is the specific site of Kapha.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शाखा शब्द से रक्त आदि धातु और त्वचा लेनी चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार शाखा शब्द से रस आदि धातु और त्वचा लेनी चाहिए ।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudya, Rakta etc Dhātu and Tvachā should be considered from the word Shākhā. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudya, Rasa etc Dhātu and Tvachā should be considered from the word Shākhā.

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वाक्प्रवृत्ति" निम्न में से किस वायु का कर्म है ?
"Vākpravritti" is karma of which of the following vāyu

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अस्थि-सिरा स्नायु कण्डरा गत व्याधि का रोगमार्ग है -
Rogamārga of asthi sirā snāyu kandarā gata vyādhi

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वाग्भट के अनुसार ऐसा वैद्य जो गुरु व्याधित को लघु व्याधित मानकर चिकित्सा करते है उनकी संज्ञा दी है -
What is the term given to the Vaidyās who treat guru vyādhita as laghu vyādhita (according to Vāgabhatta)

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दोषों की वृद्धि के कुल भेद है -
Types of dosha Vriddhi are

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार ग्रीष्म में वायु का संचय होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार ग्रीष्म में वायु प्रकोप होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Vāyu occurs in Grīshma. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Prakopa of Vāyu occurs in Grīshma.

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अम्बुकर्म किस का मुख्य कर्म है -
Mukhya karma of ambu karma is

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. साधक पित्त का स्थान है
Sthāna of sādhaka pitta is

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दोषों के प्रकोप के कारण होते है -
How many are dosha Prakopa kārana

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वाग्भट के अनुसार व्यान वायु का स्थान है -
Sthāna of Vyāna vāyu according to Vāgabhatta is

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मर्मगत व्याधियाँ किस रोगमार्गगत होती है -
Marmagata Vyādhia are which roga mārga gata

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कफ दोष का स्थान नही है -
Which of the following is not sthāna of kapha dosha

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, कर्म के कितने भेद होते है ?
How many types of karma are there according to Ashtānga Hrudya ?

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अष्टांग हृदय अनुसार, क्लोम किस दोष का स्थान है ?
Kloma is sthāna of which dosha according to Ashtanga Hridya ?

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, "मेधा" किसका वैशिष्ट है ?
According to Ashtānga Hridaya, 'Medhā' is the attribute of:

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वाग्भट के अनुसार बोधक कफ का स्थान है
Sthāna of bodhaka kapha according to Vāgabhatta

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वाग्भट अनुसार, वात का प्रशम किस ऋतू में होता है -
Vāta prashamana occurs in which season according to Vāgbhata -

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शिर:संस्थोऽक्षतर्पनात् है -
"Shirah samstho akshatarpanāt" is

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काठिन्य किस दोष की कुपितावस्था का लक्षण है -
Kāthinya is symptom of kupitāvasthā of which dosha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "वाक्प्रवृत्तिप्रयत्नोर्जाबलवर्णस्मृतिक्रियः" व्यान वायु का कर्म हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार "वाक्प्रवृत्तिप्रयत्नोर्जाबलवर्णस्मृतिक्रियः" उदान वायु का कर्म हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Vākpravruttiprayatnorjābalavarnasmrutikriyah" is the karma of Vyāna Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Vākpravruttiprayatnorjābalavarnasmrutikriyah" is the karma of Udāna Vāyu.

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निम्न में से कौनसे रोग बाह्य मार्ग व आभ्यांतर मार्ग दोनों में ही होते है -
Which of the following diseases occur both in bāhya and ābhyamtara mārga

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पित्त का संचय किस ऋतु में होता है ?
Sanchaya of Pitta occurs in which Ritu ?

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वर्णकर वायु है -
Varnakara vāyu is

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दोषों का त्रिषष्ट: भेद होता है -
Trishastah bheda of dosha is

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काल कितने प्रकार का होता है -
How many types of kāla are there

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कुपित पित्त से मुख का रस होता है -
Taste of mouth due to kupita pita

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दोष चय अर्थात् -
Dosha Chaya means -

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शाखा रक्तादयस्त्वक् च ।। है -
"Shākhā raktādayastvaka cha" is

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तत्रस्थमेव पित्तानां शेषाणामप्यनुग्रहं किसके लिए कहा गया है -
"Tatrasthameva pittānām sheshānāmapyanugraham" has been said for

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कुपित वायु से मुख का रस होता है -
Taste in mouth due to kupita vāyu is

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार क्लेद किस दोष से उत्पन्न होता है ?
Kleda originates due to which dosha as per Ashtānga Hrudya ?

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वात,पित्त व कफ का शमन काल है क्रमशः -
Vāta, pitta, kapha shamana kāla respectively is

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तर्पक कफ का स्थान है -
Site of Tarpaka Kapha is -

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अष्टांग हृदय अनुसार, वातदोष के स्थानों में प्रमुख स्थान है-
According to Ashtānga Hrudya, Main sthāna of Vāta among all sthāna is -

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वात दोष का संचय किस ऋतु में होता है ?
Vāta dosha samchāya occurs in which season

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शिरोरोग है
Shiro roga is

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. "विकारानामाकुशलो न जिह्रीयात कदाचन ........." सन्दर्भ है -
"Vikārānāmākushalo na jihriyāta kadāchana......" find the correct reference

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शीतेन युक्ता ......... कुर्वते श्लेष्मणश्चयं ।। रिक्त स्थान में है
"Shītena yuktā......... kurvate shleshmanashchayam" fill in the blank

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नीचे दो कथन दिए गए हैं

कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्निग्ध गुण से कफ का संचय होता हैं। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार रुक्ष गुण से कफ का शमन होता हैं ।
उपरोक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों मे से सही उत्तर का चयन कीजिए

Below are given two statements
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sanchaya of Kapha is due to Snigdha property. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shamana of Kapha is due to Ruksha property.
In the light of above statements choose right answer.

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कथन 1. अष्टांग हृदय ने "कोष्ठों चरति सर्वत" व्यान वायु के संदर्भ में कहा हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय ने "अन्न ग्रहणति पचति " समान वायु के संदर्भ में कहा हैं ।
Statement 1- Ashtānga Hrudya has said "Koshtho Charati Sarvat" in context to Vyāna Vāyu. Statement 2- Ashtānga Hrudya has said "Anna Grahanati" in context to Samāna Vāyu.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार साधक पित्त हृदय में रहता हैं। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार आलोचक पित्त आंखों में रहता हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sādhka Pitta is situated in Heart. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Ālochaka Pitta is situated in Eyes.

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पित्त का संचय किस ऋतु में होता है ?
Sanchaya of Pitta takes place in which ritu ?

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त्रिदोष हेतु "दोषा एव हि सर्वेषां रोगाणामेककारणं" किस आचार्य का कथन है ?
"Doshā eva hi sarveshām rogānām ekakāranam" this is the saying of which Āchārya in context of Tridosha

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शीतेन युक्ता तीक्षणाद्या' से पित्त का क्या होता है
"Shītena yuktā tīkshanādhyā" causes pitta

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हृदय प्रदेश में स्थित है -
What is located in Hridaya pradesha

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हेतु सेवन से उत्पन्न व्याधि है-
Disease due to hetu sevana is

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यथा पक्षी परिपतन् सर्वत: सर्वमप्यह:, छायामत्येति' किसके लिए कहा गया है
"Yathā pakshī paripatan sarvatah saevamapyah chhāyāmatyeti" is said for

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अष्टाङ्ग हृदय अनुसार प्राणवायु का स्थान कौनसा है ?
According to Ashtānga Hrudya, which is the site of Prāna Vāyu ?

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आचार्य वाग्भट ने कफ के कुल कितने स्थान बताये है ?
Ācharyā Vāgbhata has mentioned how many sites of Kapha ?

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दोषों की वृद्धि के पृथक, संसर्ग व सन्निपात के कुल भेद होते है क्रमशः -
Total types of Prithaka, Samsarga and Sannipāta of doshā vriddhi are

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार काल शीत, उष्ण और वर्षा के भेद से तीन प्रकार का होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कर्म कायिक, वाचिक,मानसिक और इंद्रिय भेद से 4 प्रकार का होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kāla is of 3 types as Shīta, Ushna and Varshā. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Karma is of 4 types on the basis of Kāyika, Vāchika, Mānasika and Indriya.

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विपरीत गुणेच्छा किसका लक्षण है
Viparīta gunechchā is symptom of

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कफ प्रकोप काल है -
Kapha prakopa kāla is -

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अष्टांगहृदय अनुसार कुल दोषभेद है
Total dosha bheda according to Ashtāmga Hridaya

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वात व पित्तदोष दोनों का स्थान है -
Which of the following is sthāna of both Vāta and Pitta dosha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पाचक पित्त पक्वाशय और आमाशय के मध्य स्थित रहता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार रंजक पित्त आमाशय में रहता हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Pāchaka Pitta is situated between Pakvāshaya and Āmāshaya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Ranjaka Pitta is situated in Āmāshaya.

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कुपित श्लेष्मा का कर्म नही है -
Which of the following is not a karma of kupita shleshmā

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...........युक्तास्तीक्ष्णाद्याश्चयं पित्तस्य कुर्वते ।। रिक्त स्थान में है -
"..........yuktāstīkshnādhyāshchayam pittasya kurvate" fill in the blank

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दो दोषों की समान वृद्घि से संसर्ग के कितने भेद होते है -
Types of samsarga due to samāna vriddhi of two doshās

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परतंत्र व्याधि के दो भेद है -
Two types of partamtra vyādhi is

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चयो वृध्दि: स्वधाम्न्येव, प्रद्वेषो वृद्घि हेतुषु ।। सन्दर्भ है -
"Chayo vridhhih svadhāmnyeva, pradveshā vriddhi hetushu" find the correct reference

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अन्नसंघात" किस कफ का विशिष्ट कर्म है ?
"Annasanghāta" is the specific karma of which Kapha ?

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