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Dravyadi vijnaniya adhyaya aiapget mcqs

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9. Dravyadi vijnaniya adhyaya

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वाग्भट के अनुसार द्रव्य की योनि है-
Dravya yoni according to Vāgabhatta is

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A.अष्टांग हृदय अनुसार रसादी में द्रव्य श्रेष्ठ होता हैं । R. क्योंकि रस आदि द्रव्य के आश्रित होते हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, dravya is best in Rasa etc. R. Because Rasa etc resides in dravya.

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A. अष्टांग हृदय अनुसार दंती रस, वीर्य, विपाक में चित्रक के समान होने पर भी विरेचक होती हैं । R. दंती प्रभाव से विरेचन कराती हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, Dantī is similar to Chitraka in Rasa, Vīrya, Vipāka but inspite of it is Virechaka. R. Dantī does Virechana by Prabhāva.

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विचित्र प्रत्यारब्ध द्रव्य नही है -
Which one is not vichitra pratyārabdha dravya

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार अग्नि और वायु की प्रधानता वाले द्रव्य प्राय: उर्ध्वगामी गति करने वाले होते हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार जल और पृथ्वी की प्रधानता वाले द्रव्य प्राय: अधोगामी गति कराने वाले होते हैं ।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, dravya having predominance of Agni and Vāyu have usually Ūrdhvagāmī movement. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, dravya having predominance of Jala and Pruthvī have usually Adhogami movement.

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A. अष्टांग हृदय अनुसार मत्स्य मधुर और गुरु होने के बावजूद उष्ण वीर्य वाली होती हैं। R.अष्टांग हृदय अनुसार ऐसा मत्स्य के विचित्रप्रत्यारब्ध के कारण होता हैं ।
A. According to Ashtānga Hrudya, Matsya is Madhura and Guru inspite of having Ushna Vīrya. R. According to Ashtānga Hrudya, this is due to Vichitrapratyārabadha of Matsya.

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रिक्त स्थान भरे - " रसादिसाम्ये यत् कर्म विशिष्टम् तत्........। "
Fill in the blank - "Rasādisāmye yat karma vishishtam tat........ "

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विचित्र प्रत्यायारब्ध द्रव्य है -
Which one is vichitra pratyārabdha dravya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार मधुर और लवण का अम्ल विपाक होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार अम्ल रस का विपाक कटु होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vipāka of Madhura and Lavana is Amla. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vipāka of Amla rasa is Katu.

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वाग्भट के अनुसार विपाक सांख्य है -
Number of Vipāka according to Vāgabhatta

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अष्टांगहृदय में वर्णित अन्य आचार्य मतानुसार वीर्य के भेद है - (अष्टांगहृदय सूत्र 9)
Types of Vīrya mentioned by other Āchārya in t Ashtāmga Hridaya are -

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. "सौषिर्य लाघवकरं " है -
"Saushīrya lāghavakaram" is

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सूक्ष्म, विशद, लघु' किसके गुण है
"Sūkshama, vishada, laghu" are guna of

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यव ' वात वर्धक है -
"Yava" is vatavardhaka due to

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बन्धकृत है -
Bandhakrita is

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रसादि सात्म्ये यत् कर्म विशिष्टं तत् .... यह किसकी परिभाषा है -
"Rasādi sātmye yata karma vishishtam tat..." this is definition of

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार विपाक तीन प्रकार का होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मधुर और लवण का मधुर विपाक होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vipāka is of three types. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vipāka of Madhura and Lavana rasa is Madhura.
ed

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विचित्र प्रत्यायारब्ध द्रव्य किस आचार्य की मौलिक देन है ?
"Vichitra pratyārabdha dravya" is given by which Āchārya

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जाठरेणाग्निना योगाद्यदुदेति रसांतरं ........ विपाक की उक्त परिभाषा किस आचार्य की मौलिक देन है -
"Jātharenāgninā yogādhyadudeti rasāmtaram ....." this definition of Vipāka is given by which Āchārya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार द्रव्य पृथ्वी महाभूत का आश्रय लेकर उत्पन्न होते है । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार द्रव्य जल महाभूत का आश्रय लेकर उत्पन्न होते है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, dravya gets originated by taking residence of Pruthvī Mahābhūta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, dravya gets originated by taking residence of Jala Mahābhūta.

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निम्न द्रव्य प्रभाव के अनुसार कार्य नही करता -
Which dravya does not work according to Prabhāva

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षष्टी से भिन्न अन्य व्रीहि धान्यो का विपाक है
What is Vipāka of Vrīhi dhānya other than Shashtī

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लवण रस वाले द्रव्यों का विपाक होता है -
What is Vipāka of Lavana rasa dravyās

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द्रव्य का प्रयोग निम्न दो प्रकार से करने का उल्लेख है -
Dravya should be used in which of the following two types

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द्रव्य किस महाभूत का आश्रय लेकर उत्पन्न होते है-
Dravya is formed by taking Āshraya ofwhich Mahābhūta

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विपाक नही है -
Which of the following is not a Vipāka

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बलसात्म्य होने पर द्रव्य के रस,विपाक, वीर्य, प्रभाव की पराभूत का सही क्रम है -
The correct ascending sequence of rasa, vipāka, Vīrya and prabhāva on maturity

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......मेव रसादिनां श्रेष्ठं ते हि तदाश्रया:
..........meva rasādinām shreshtham te hi tadāshrayāh

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तत्र व्यक्तो ..........स्मृत:, अव्यक्तो ........ रिक्त स्थान में है क्रमशः -
"Tatra vyakto........smritah, avyakto........" fill in the blank respectively

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निम्न में से किस द्रव्य में द्रव व सांद्र दो विपरित गुण पाये जाते हैं ?
In which of the following dravya, drava and sāmdra two opposite guna are found

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समान प्रत्यायारब्ध द्रव्य नही है-
Which one is not samāna pratyārabdha dravya

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किसने विचित्र प्रत्यारब्ध की अवधारणा प्रथमत: प्रारंभ की थी ?
Who started the concept of vichitra pratyārabdha for the first time

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......... जगत्येवमनौषधं का संदर्भ है -
".................jagatyevamanaushadham" find the reference

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.......... एव रसादीनां श्रेष्ठं
.......... eva rasādinām shreshtham

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संघातोपचयावहं यह कर्म किस द्रव्य का है-
"Samghātopachayāvaham" this is karma of which dravya

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पंचभूतात्मकं तत्तु क्ष्मामधिष्ठाय जायते' में 'क्ष्म' का क्या अर्थ है
"Panchbhūtātmakam tattu kshmāmadhishdhāya jāyate" what does kshama mean here

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अनुरस के सन्दर्भ में कौनसा कथन सही नही है-
Which of the following is not true in context of Anurasa

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जाठरेणाग्निना योगाद् यदुदेति रसान्तरम् रसानां परिणामांते..... संदर्भ किस आचार्य ने दिया है
Jātharenāgninā yogāda yadudeti rasāntaram rasānām parināmāmte..... this is said by which Āchārya

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अष्टांगहृदय अनुसार वीर्य के भेद (अष्टांगहृदय सूत्र 9)
Types of Vīrya according to Ashtāmga Hridaya sutra 9

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कथन 1. अष्टांग हृदय में विचित्र प्रत्यारब्ध की अवधारणा प्रथमत: उल्लेख आता हैं । कथन 2.सुश्रुत संहिता में विचित्र प्रत्यारब्ध की अवधारणा प्रथमत: उल्लेख आता हैं ।
Statement 1- Accreditation of Vichitra Pratyārabdha is first mentioned in Ashtānga Hrudya. Statement 2- Accreditation of Vichitra Pratyārabdha is first mentioned in Sushruta Samhitā.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "सौषिर्यलाघवकरम" वायव्य द्रव्य के लक्षण हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "सौषिर्यलाघवकरम"आकाशात्मक द्रव्य के लक्षण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Saushiryalāghavakaram" is characteristic of Vāyavya Dravya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Saushiryalāghavakaram" is characteristic of Ākāshātmaka Dravya.

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नानात्मकमपि ...........अग्निषोमौ महाबलौ रिक्त स्थान में है -
"Nānātmakamapi ............agnishomau mahābalau" fill in the blank

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निम्न मे विचित्रप्रत्यारब्ध द्रव्य है
Which of the following is Vichitra pratyārabdha t

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व्यपदेशस्तु भूयसां यह संदर्भ वर्णित है -
"Vyapdeshastu bhūyasām" find the correct reference

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रसैरसौ तुल्यफलस्तत्र किसके लिए कहा गया है -
"Rasairasau tulyaphalastatra" has been said for

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जाठरेणाग्निना योगाद्यदुदेति रसान्तरम' किसकी व्याख्या है
"Jātharenāgninā yogādhyadudeti rasāntaram" is the explaination of

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विपाक किसका अन्तिम उत्पादक है -
Vipaka is the end product of -

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कथन 1. जाठरेणाग्निना योगाद्यदुदेति रसान्तरम । ‌‌रसानां परिणामान्ते स विपाक इति स्मृत : । (A.H) कथन 2. जाठरेणाग्निना योगाद्यदुदेति रसान्तरम । रसानां परिणामान्ते स वीर्य इति स्मृत : । (A.H)
Statement 1- "Jātharenāgninā Yogādyadudeti Rasāntaram, Rasānām Parināmānte Sa Vipāka Iti Smrutah" Statement 2- "Jātharenāgninā Yogādyadudeti Rasāntaram, Rasānām Parināmānte Sa Vīrya Iti Smrutah"

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रसादि साम्यं यत् कर्म विशिष्टं तत् ...........।"
"Rasādi Sāmyam Yat Karma Vishitam Tat........ "

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विचारग्लानि कारकं है
"Vichāra glāni kārakam" is

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द्रव्य की निर्वृत्ति विशेष में कारणभूत महाभूत है -
Mahābhūta reponsible for dravya nirvritti

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निम्न में से भूत संघातसम्भवात है-
Which of the following is bhūta samghāta sambhavāta

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कथन 1. रसादिसाम्ये यत कर्म विशिष्टं तत प्रभावजम । (A.H) कथन 2. रसादिसाम्ये यत कर्म विशिष्टं तत वीर्यं । (A.H)
Statement 1- "Rasādisāmye yat karma vishishtam tat prabhāvajam" ( A. H.) Statement 2- "Rasādisāmye yat karma vishishtam tat Vīryam" ( A. H)

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