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Matrasitiy adhyaya aiapget mcqs

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8.Matrasitiy adhyaya

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त्रिण्यप्येतानि मृत्युं वा घोरान् व्यधीन् सृजन्ति वा किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Trinyapyetāni mrityum vā ghorān vyadhīna srijanti vā" has been said in context of

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इसके सिवाय सभी को नित्य अभ्यास में न लें -
Except which of the following others cannot be consumed regularly

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विसूचिका का उपचार किसके समान करना चाहिए -
Visūchikā should be treated like

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किस व्याधि में तीव्र पीड़ा होने पर भी शूलघ्न औषध वर्जित है-
Shulaghna aushadha is contraindicated in which disease with excessive pain

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार अल्प दोष होने में लंघन पथ्य हैं । कथन 2 . अष्टांग हृदय अनुसार दोष के मध्यम होने में लंघन और पाचन पथ्य है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Langhana is favourable in Alpa Dosha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Langhana and Pāchana is favourable in Madhyama Dosha.

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कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार आम जीर्ण कफ के कारण होता हैं । कथन . अष्टांग हृदय अनुसार वायु के कारण विदग्ध जीर्ण होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Āma Jīrna is due to Kapha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vidagdha Jīrna is due to Vāyu.

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सूचीभिरिव गात्राणि लक्षण है -
"Sūchībhiriva gātrāni" is the symptom of

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मांस खाने के पश्चात मन्दाग्नि होने में अनुपान है -
Anupāna in Mandāgni after intake of māmsa is -

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तत्राल्पे .........पथ्यं, मध्ये........प्रभूते........। आम दोष के संदर्भ में रिक्त स्थान में क्रमशः सही है -
"Tatrālpe........pathyam, madhye.........prabhute........." fill in the blank in context of Āmadosha

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विपरीतं यदन्नस्य गुणै: स्यादविरोधि च' किसका लक्षण है
"Viparītam yadannasya gunaih syādavirodhi cha" is symptom of

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अष्टांगहृदय ने आमाशय के कितने भाग किये है
Parts of Āmāshaya in Ashtāmga Hridaya

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अश्रद्धा हृद्वयथा शुद्धेऽप्युद्गारे किसका लक्षण है ?
"Ashraddhā hridavyathā shuddhe apyaudgāre" is the symptom of

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पथ्य और अपथ्य को मिलाकर खाना समशन कहलाता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार पथ्य और अपथ्य को मिलाकर खाना अध्यशन कहलाता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, combined intake of Pathya and Apathya is called Samashana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, combined intake of Pathya and Apathya is called Adhyashana.

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. हीनमात्र व अतिमात्र भोजन से उत्पन्न स्थिति है क्रमशः -
Hīnamātra and atimātra bhojana respectively leads to

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अतिमात्रा में भोजन करने से त्रिदोष प्रकोप के फलस्वरूप उत्पन्न रोग है -
The disease acquired due to aggregation of tridosha because of excess of food taken is

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निरंतर सेवन करने योग्य नहीं है
Which of the following should not be consumed regularly

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.............ह्यग्ने: प्रवर्तिका । रिक्त स्थान में है
"...............hyagneh pravartikā" fill in the blank

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............कृशानां पुष्टयर्थं रिक्त स्थान में है -
"................krishānām pushtyartham" fill in the blank

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निम्न में से कौन निरंतर सेवनीय है -
Which of the following can be consumed regularly

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आमजन्य विकृतियों में निर्दिष्ट उपक्रम है-
Upakrama in Āmajanya vikriti

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विविधैर्वेदनोद्भेदैर्वाय्वादिभृशकोपत:' किसके लक्षण है
"VividhairVedanodbhedairVāyavyādiBhrishaKpatah" is the symptom of

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अनुपान का निषेध किसमे है
Anupāna is contraindicated in

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शान्तिरामविकाराणां भवति तु ...............
Shāntirāmavikārānām bhavati tu........

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार नेत्र की ज्योति के लिए रात्री में घृत और मधु के साथ त्रिफला खाना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विदग्घ जीर्ण में वमन करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, for improving light of Netra, Ghruta and Madhu along with Triphalā should be given during night. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vamana should be done in Vidagdha Jīrna.

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A. अष्टांग हृदय अनुसार अजीर्ण अवस्था में औषध नही देनी चाहिए । R. क्योंकि आम के कारण मंद अग्नि, दोष, औषध और भोजन को पकाने में समर्थ नहीं होती हैं ।
A - According to Ashtānga Hrudya, medicine should not be given in Ajīrna condition. R - Because of Āma, Mandāgni is unable to digest Dosha Medicine and Meal.

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अष्टांगहृदय ने आमाशय के कितने भाग किये है
Āmāshaya is is divided into how many parts according to Ashtāmga Hridaya

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अनुपान का निषेध किसमे है
Anupāna is contraindicated in

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अकाले बहु चाल्पं वा भुक्तं तु .......... " रिक्त स्थान में है -
"Akāle bahu chālpam vā bhuktam tu......." fill in the blank

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पार्ष्णि दाह किसकी चिकित्सा है
Pārshni dāha is treatment of

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार लघु, रूक्ष,कटु,तीक्ष्ण और सर पदार्थ को भोजन के अंत में खाए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन के मध्य में शुक्त आदि अम्ल एवं लवण पदार्थ को खाए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Laghu, Rūksha, Katu, Tīkshana and Sara substances should be taken at the end of meal. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Amla substance like Shukta and Lavana should be taken between meal.

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खाये हुए अन्न के बिना पचे दोबारा भोजन करना क्या कहलाता है
Having food before complete digestion of previous meal is called

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इनमें से कौनसा पान (द्रव) के अयोग्य है ?
Which of the following is contraindicated for pāna(drava)

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निम्न में कौन विरुद्धोपक्रम होने से अचिकित्सिय है -
Which of the following is Achikitsiya being Viruddhopakrama

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गरियसो भवेल्लीनादामादेव ...........
Garīyaso bhavellinādāmādeva.....

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विलम्बिका में दोष होते है -
Dosha in Vilambikā are

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अनुपान के पश्चात त्याज्य है -
What should not be done after Anupāna

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार दधी, मद्य, विष,मधु सेवन में शीतल जल अनुपान करना चाहिए। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कृश पुरुष की पुष्टि हेतु सुरा अनुपान हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in Dadhī, Madya, Visha, Madhu, anupāna should be cold water. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, anupāna is Surā for giving strength to weak person.

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पिष्टमय पदार्थों का अनुपान है
Ānupāna of pishtamaya padārtha is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार विसूचिका रोग बढ़ने ने पार्ष्णियो में दाह करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार आम जन्य रोगों की शांति अपतर्पण से होती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, if Visūchikā is aggravated, Dāha should be done on Pārshni. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Āmajanya diseases are calmed by Apatarpana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार आम जीर्ण में लंघन करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विदग्घ जीर्ण में वमन करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Langhana should be done in Āma Jīrna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vamana should be done in Vidagdha Jīrna.

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आमाजीर्ण चिकित्सा है-
Treatment of Āmājīrna

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विदग्धे ........ रिक्त स्थान में है -
"Vidagdhe..........." fill in the blanks

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गरीयसो भवेल्लीनादामादेव ........'
"Garīyaso bhavellīnādāmādeva......."

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पिष्टान्न सेवन के उपरान्त अनुपान है-
Anupāna after consuming Pishtānna

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कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार वायु के कारण विदग्ध जीर्ण होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वायु के कारण विष्टब्ध अजीर्ण होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vidagdha Jīrna is due to Vāyu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vishtabdha Jīrna is due to Vāyu.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार जितनी आहार राशि से तृप्ति हो उससे आधी मात्रा में गुरु द्रव्यों का सेवन करना चाहिए कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार लघु द्रव्यों को पेट भर कर खाना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, one should take half quantity of Guru substances as much as the amount of food desired. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Laghu substances should be taken with full stomach.

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सधोभुक्त इवोद्गार: किसका लक्षण है -
"Sadhyobhukta ivodagārah" is the symptom of

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अतिशय रूप से लीन हुए आमदोष से उत्पन्न व्याधि की संज्ञा है -
The disease developed from Āma Dosha which is līna by atishaya rūpa

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लघु द्रव्यों का सेवन करना चाहिए-
Laghu dravya should be consumed

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कथन 1.अष्टांग ह्रदय अनुसार 'विविधैर्वेदनोद्भेदैर्वाय्वादिभृशकोपत: सूची भिरवगात्राणि विध्यतीती" अलसक का लक्षण हैं । कथन 2.अष्टांग ह्रदय अनुसार 'विविधैर्वेदनोद्भेदैर्वाय्वादिभृशकोपत: सूची भिरवगात्राणि विध्यतीती" विसूचिका का लक्षण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Vividhairvedanodbhdedairvāyvyādi Bhrushakopatah Sūchī Bhiravagātrāni Vidhyatītī" is the symptom of Alasaka. Statement 2- "Vividhairvedanodbhdedairvāyvyādi Bhrushakopatah Sūchī Bhiravagātrāni Vidhyatītī" is the symptom of Visūchikā.

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वाग्भट के अनुसार विष्टब्धाजीर्ण की चिकित्सा क्या है
Treatment of Vishtabdhājīrna by Vāgbhata

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार 'विपरीतं यदन्नस्य गुणै: स्यादविरोधि च' अनुपान का लक्षण है । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार 'विपरीतं यदन्नस्य गुणै: स्यादविरोधि च' आम का लक्षण है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Viparītam Yadannasya Gunaih Syādavirodhi cha" is the characteristic of Anupāna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Viparītam Yadannasya Gunaih Syādavirodhi cha" is the characteristic of Āma.

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अनुपान से संबंधित सन्दर्भ वर्णित है -
Anupāna is explained in

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निम्न में से किन का अधिक अभ्यास नही करना चाहिए ?
Which of the following should not be consumed regularly

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मधु सेवन के उपरान्त अनुपान है -
Anupāna after madhu sevana is

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विबंधोऽतिप्रवृतिर्वा किस व्याधि का लक्षण हैं ?
"Vibandho atipravrittirvā" is the symptom of which vyādhi

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स्थूलानां तु ............ अनुपान के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है - (अष्टांग हृदय)
"Sthūlānām tu......." fill in the blank in context of Anupāna

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पथ्यमपथ्यं मिश्रं च भुक्तं ................ रिक्त स्थान में है -
"Pathyam apathyam mishram cha bhuktam......." fill in the blanks

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निम्न में असाध्य है -
Which of the following is Asādhya

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गुरु द्रव्यों का सेवन करना चाहिए -
Gurū dravya should be consumed

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शोफोऽक्षिगण्डयो: किसका लक्षण है -
"Shopho akshigandayoh" is the symptom of

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अकाल में भोजन करने को कहते है
Akāla bhojana is called

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अष्टांग हृदय मे अनुपान का वर्णन कहाँ आया है
Where is Anupāna explained in Ashtāmga Hridaya

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विसूचिका का लक्षण हैं-
Symptom of Visūchikā is

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.............. महाघोरं वर्जयेत् विषसंज्ञकम्
............mahāghoram varjayeta vishasamjnakam"

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वाग्भट के अनुसार भोजन प्रारंभ,मध्य व अन्त में सही निर्देश है -
According to Vāgabhatta, what should be consumed in beginning, mid and end of a meal

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अलसक की चिकित्सा का क्रम है -
Chikitsā krama of Alasaka is

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इसके सिवाय सभी का नित्य सेवन करना चाहिए -
What should be consumed regularly except

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स्थौल्य चिकित्सा में अष्टांग हृदय ने त्रिफला का जल के साथ क्या अनुपान बताया है ?
Anupāna of triphalā by Astānga Hridaya in Sthaulya treatment along with water ?

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अलसक में दोष स्थित होते है -
Dosha in Alasaka are situated in

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नेत्रबल हेतु निर्दिष्ट स्वस्थ्यानुवर्तन योग है -
Svasthyānuvartana yoga advised for Netra bala is

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. हीनमात्र व अतिमात्र भोजन से उत्पन्न स्थिति है क्रमशः -
Hīnamātra and atimātra bhojana respectively leads to

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मात्रा ........अपेक्षन्ते ।। रिक्त स्थान में है -
"Mātrā...........apekshante" fill in the blank

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पिष्टमय पदार्थों का अनुपान है(vaagbhat)
Anupāna of pishtamaya padārtha is(Vāgabhatta)

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शूलादीन् कुरुते तीव्रास्छर्द्यतीसार्वर्जितान् ........... किसका लक्षण है -
"Shūlādīna kurute tīvrāschardhyatīsārvarjitān......." is the symptom of

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आमाजीर्ण में दोष प्राधान्य
Dosha pradhānya in Āmājīrna

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शोष में श्रेष्ठ अनुपान है -
Shreshtha Anupāna in Shosha is

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क्षीणेवृद्धे च बाले च ............पथ्यं यथाऽमृतं रिक्त स्थान में है -
"Kshīne vriddhe cha bāle cha......pathyam yathā amritam" fill in the blank

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अष्टांगहृदय अनुसार "विलम्बिका" में निम्नलिखित किन दोषों का अनुबंध होता है ?
As per Ashtanga Hridaya, which dosha anubandha is involved in 'Vilambika' ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार आम जन्य दोष के मध्यम होने में लंघन और पाचन पथ्य है । कथन 2 . अष्टांग हृदय अनुसार आम जन्य प्रभूत दोष होने में शोधन करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Langhana and Pāchana is wholesome in moderate Doshas of Āma. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Shodhana should be done in excess Doshas of Āma.

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वाग्भट अनुसार विदग्धाजीर्ण की श्रेष्ठ चिकित्सा है -
According to Vāgabhatta, best treatment for Vidagdhājīrna is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार आम जीर्ण में स्वेदन करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विदग्घ जीर्ण में लंघन करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Swedana should be done in Āma Jīrna. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Langhana should be done in Vidgadha Jīrna.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार यव और गोधूम के भोजन करने के बाद उष्ण जल का अनुपान करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार यव और गोधूम के भोजन करने के बाद शीत जल का अनुपान करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Anupāna of Ushna Jala after intake of Yava and Godhūma in meal should be done. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Anupāna of Shīta Jala after intake of Yava and Godhūma in meal should be done.

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आम दोष की चिकित्सा में यदि निदानविपर्यय चिकित्सा से लाभ न हो तो किया गया उपाय है -
What is the treatment done if nidāna viparyaya fails to treat Āmadosha

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अष्टांग हृदय के अनुसार शीलन करने के योग्य आहार क्या है ?
As per Ashtang Hridyam Which Āhāra can be consumed regularly(shīlana yogya) ?

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निम्न में कौन अनुपान के अयोग्य नही है-
Which of the following is not contraindicated for Anupāna

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इसके सिवाय सभी नित्य सेवनीय है -
Except which of the following all can be consumed regularly

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भोजन प्रमाण के संदर्भ में सही है -
What is true in the context of quantity of food

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार मांस सेवन पश्चात मद्य अनुपान हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार अग्नि मंद में मद्य अनुपान हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, after intake of meat, Anupāna is Madya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Anupāna is Madya in Mandāgni.

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सद्योभुक्त इवोद्गार किसका लक्षण है
"Sadhyobhukta ivodgāra" is the symptom of

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गरियसो भवेल्लिनादामादेव ......'
"Garīyaso bhavellinādāmādeva......."

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अत्यर्थदुष्टासु दोषा दुष्टामबद्धखा:।यान्तस्तिर्यक्तनु' किससे सम्बंधित है
"Aryarthadushtāsu doshā dushtāmabaddhakhāh. Yāntastiryaktanu" is related to

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार गुरु, स्निग्ध, स्वादु, मंद और स्थिर पदार्थ को भोजन के अंत में खाए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार लघु, रूक्ष,कटु,तीक्ष्ण और सर पदार्थ को भोजन के शुरू में खाए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Guru, Snigdha, Svādu, Manda and Sthira substances should be eaten at the end of meal. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Laghu, Rūksha, Katu, Tīkshna and Sara substances should be eaten at the start of meal.

94 / 106

आचार्य वाग्भट के अनुसार भोजन के संदर्भ में सही है -
What is true in context of food according to Āchārya Vāgabhatta

95 / 106

कुक्षि का चार भागों में विभक्त किन आचार्यो द्वारा किया गया है ?
Which Āchārya has done four parts of kukshi(stomach)

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार श्वास कास पीनस में अनुपान हितकारी नहीं होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार स्वर भेद में अनुपान हितकारी होता हैं ।
Statement 1- According is Ashtānga Hrudya, Anupāna is not beneficial in Shwāsa, Kāsa, Pīnasa. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Anupāna is beneficial in SwaraBheda.

97 / 106

शीलन करने के अयोग्य आहार है
Which Āhāra should not be consumed regularly(shīlana ayogya)

98 / 106

प्रशस्त अनुपान होता है -
Prashasta Anupāna is

99 / 106

चतुर्विध कुक्षी भाग किस आचार्य की देन है -
Chaturvidha kukshī bhāga is given by which Āchārya

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भुक्तस्योपरि भोजनम्' है
"Bhuktasyopari bhojanam" is

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विष्टब्धाजीर्ण चिकित्सा है -
Treatment of Vishtabdhājīrna is

102 / 106

शाक सेवन के उपरान्त अनुपान है -
Anupāna after consuming shāka

103 / 106

प्रयाति नोर्ध्वनाधस्तादाहरों न पच्यते यह लक्षण है -
"Prayāti nordhava nādhastādāharom na pachyate" is the symptom of

104 / 106

पार्ष्णि दाह किस व्याधि में निर्दिष्ट है-
Pārshnī dāha is indicated in which disease ?

105 / 106

वाग्भट के अनुसार क्षीण,बालक,वृद्ध में अनुपान है
Accoring to Vagbhata anupana for Kshina,Balaka & Vrudha is

106 / 106

...........करोति ऊर्जा तृप्तिं व्याप्तिं दृढांंगतां रिक्त स्थान में है-
".............karoti ūrjā triptim vyāptim dridhāmgatām" fill in the blank

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