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Roganutpadaniya adhyaya aiapget mcqs

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4.Roganutpadaniya adhyaya

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अरुचि, कम्प, विबंध हृदय उरसो' किस वेग के रोकने से होते है
"Aruchi kampa vibandha hridaya uraso" is due to holding which natural urge

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अन्नपानं च विड्भेदि किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Annapānam cha vidabhedi" is treatment of which vegavarodha

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देशकालात्मविज्ञान सदवृत्तस्यानुवर्तनं किन रोगों की चिकित्सा है ?
"Deshakālātmavijnāna sadavritasyānuvartnam" is treatment of which diseases

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जृंभा का वेगावरोध करने से किस वेगावरोध के समान लक्षण उत्पन्न होते है ?
Vegavarodha of Jrimbhā causes symptom like which vegavarodha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शुक्र को रोकने से अंगभंग और हृदय व्यथा होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार शुक्र जन्य वेग धारण चिकित्सा में ताम्रचूड़रस और अवगाहन से चिकित्सा करनी चाहिए।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, suppression of urge of semen leads to Angabhanga and Hrudaya vyathā. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, treatment of suppression of urge of semen is Tāmrachūda Rasa and Avagāhana.

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हिद्मावत्तत्र भेषजं किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Hidmāvattatra bheshajam" is treatment of which vegavarodha

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शीत: सर्वो विधिर्हित: किस वेगावरोध की चिकित्सा है -
"Shītah sarvo vidhirhitāh" is treatment of which vegavarodha

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पानानि बस्तयश्चैव शस्तं वातानुलोमनं किस वेगावरोध की चिकित्सा है-
"Pānāni bastyashchaiva shastam vātānulomanam" is treatment of which Vegavarodha

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पिण्डिकोद्वेष्टन किस वेगावरोध से उत्पन्न होता है?
"Pindikodveshtana" is dhe to which vegavarodha

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शोषांगसादबाधिर्यसंमोहभ्रमहृद्गदा:' किस वेगधारण का लक्षण है
"Shosha amgasāda bādhirya sammoha bhrama hrida gadā" is lakshana of which Vegadhārana

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार लोभ,ईर्ष्या का वेग धारण करना चाहिए । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार लोभ,ईर्ष्या का वेग धारण नहीं करना चाहिए।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, the urge of greed, jealousy should be holded. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, the urge of greed, jealousy should not be holded.

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कार्श्य लक्षण किस वेगावरोध से उत्पन्न होता है ?
Kārshaya is symptom of which vega avarodha

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार मल वेग रोकने से पिण्डिकोद्वेष्टन,और प्रतिश्याय होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार मल वेग रोकने से परिकर्तिका होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of urge to pass feces leads to Pindikodveshtana and Pratishyāya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of urge to pass feces leads to Parikartikā.

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, "मन्यास्तंभ" लक्षण किस वेगावरोध में मिलता है ?
According to Ashtānga Hrudya, "Manyāstambha" is symptom found in which vegavarodha ?

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वाग्भट मतानुसार अंगभंग लक्षण किस कारण से होता है
Amga bhamga is symptom of which of the following according to Vāgabhatta

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सर्वश्चाsनिलजिद्विधि:' किस वेगधारणजन्य रोगों की चिकित्सा है
"Sarvashchā anilajidvidhi" is treatment of which Vegadhārana janya roga

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प्राग्भक्तं शस्यते घृतं जीर्णान्तिकं चोत्तमया मात्रया उपरोक्त विधि से किस घृतपान की संज्ञा दी है ?
"Prāgbhaktam shasyate ghritam jīrnāntikam chottamayā mātrayā" which ghritapāna is indicated by this vidhi

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शीतोद्भवं दोषचय..........विशोधयन् ग्रीश्मजमभ्रकाले। रिक्त स्थान में है -
"Shītodabhavam doshachaya .........vishodhyana grīshamajamabhrakāle" fill in the blanks

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन को रोकने से अंगभंग होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वमन जन्य वेग धारण चिकित्सा में रक्तमोक्षण और विरेचन चिकित्सा करनी चाहिए।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, suppression of Vamana urge causes Angabhanga. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, treatment of suppression of Vamana urge is Raktamokshana and Virechana.

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार मल वेग रोकने से अंग भंग होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार मूत्र वेग रोकने से अंग भंग होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of faeces urge leads to Angabhanga. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of urine urge leads to Angabhanga.

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क्षुत वेगावरोध से उत्पन्न लक्षण है -
Symptom due to Kshuta vegavarodha isw

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दोषा: कदाचित्कुप्यन्ति जिता लंघनपाचनै । ये तु संशोधनै: शुद्धा न तेषां पुनरुद्भव: ।। इस श्लोक का संदर्भ है ?
Doshāh kadāchitkupyati jitā lamghana pāchanai. Ye tu samshodhnaih shuddha na teshām punarudbhavah" correct reference of this shloka is

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बस्तिशुद्धिकरै : सिद्धे भजेत्क्षीरं किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Bastishuddhikaraih siddhe bhajetkshīram" is treatment of which vegavarodha

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अधोवात का वेग रोकने से होने वाली व्याधि है -
Disease due to holding Adhovāta vega is

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मूर्धाक्षि गौरव होता है -
Mūrdhākshi gaurava is -

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. " विबंधो हृदयोरसो: " किस वेगावरोध का लक्षण है ?
"Vibandho hridhayorasoh" is symptom of which vegavarodha

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अत्यर्थसंचितास्ते हि क्रुद्धा: स्युजीवितच्छिद: किसके सन्दर्भ में कहा गया है ?
"Atyarthsamchitāste hi kruddhāh syujīvitachchidah" has been said in context of

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हृद्व्यथा लक्षण किस वेगावरोध में मिलता है ? ( अष्टाङ्ग हृदय )
Hrida vyathā as symptom s found in which vegavarodha ? ( Ashtānga Hrudya )

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शोषो हिध्मा च ........... किस वेगावरोध से उत्पन्न लक्षण है ?
"Shosho hidhmā cha........." is symptom due to which vegavarodha

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मूत्रसंग तथा अंंगभंग लक्षण किस वेगावरोध में मिलता है ?
Mūtra samga and amgabhamga are found as symptoms in which vegavarodha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार भूत विष वायु अग्नि से उत्पन्न रोग आगंतुक रोग कहलाते हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार राग, द्वेष, भय से उत्पन्न रोग आगंतुक रोग कहलाते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, disease originating from Bhūta Visha Vāyu Agni are called as Āgantuka Roga. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, diseases originating from Rāga, Dvesha, Bhaya are called as Āgantuka Roga.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार श्रम जन्य श्वास रोकने से गुल्म हृदय रोग होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार श्रम जन्य श्वास वेग धारण चिकित्सा में वातघ्न क्रिया करनी चाहिए।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of exertion urge due to dysnea can causes Gulma Hrudya Roga. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, treatment of suppresion of exertional urge due to dysnea is Vātaghna activities.

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कथन 1.अष्टांग ह्रदय अनुसार "मोहमूर्धाअक्षिगौरवसी' निद्रा वेगधारण का लक्षण है . कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार 'शोषांगसादबाधिर्यसंमोहभ्रमहृद्गदा:' पिपासा वेगधारण का लक्षण है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Mohamūrdhākshigauravasī" is the symptom of Nidrā Vegadhārana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Shoshāngasādabādhiryasammohabhramahrudgadāh" is the symptom of Pipāsā Vegadhārana.

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स्रुतिस्त्रस्य शस्तं चात्र विरेचनं किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Srutistrasya Shashtam chātra virechanam" is treatment of which vegavarodha

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तीक्ष्णधूमांजनाघ्राणनावनार्कविलोकनै: किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Tīkshana dhūmāmjana ghrāna nāvana arka vilokanaih" is treatment of which vegavarodha

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प्राग्भक्तं शस्यते घृतं किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Prāgbhaktam shasyate ghritam" is treatment of which vegavarodha

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ये भूतविषवाय्वग्निक्षतभंगादिसम्भवा: रोग होते है ?
"Ye bhūta visha vāyava agni kshata bhamgādisambhavah" diseases are

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तत्रेष्ट: स्वप्न: संवाहनानि च ...... किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Tatreshtah svapnah samvāhanāni cha" is treatment of which vegavarodha

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वृद्धि रोग किस वेगावरोध के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होता है ?
Vriddhi roga occurs due to vegavarodha of

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार क्षुधा वेग रोकने से अंग भंग होता हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार मूत्र वेग रोकने से अंग भंग होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudaya, suppression of urge of Kshudhā causes Angabhanga. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, suppression of urge of Mūtra causes Angabhanga.

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संशोधनोपरान्त सेवनीय है ?
Samshodhanoparānta Samshodhanoparānta sevanīya is

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विट् वेग रोकने से उत्पन्न लक्षण है-
Symptom due to vita Vegavarodha

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तृष्णा वेगावरोध से उत्पन्न लक्षण है-
Symptom due to Trishnā vegavarodha is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "बस्तिशुद्धिकरै : सिद्धे भजेत्क्षीरं " शुक्र वेगावरोध की चिकित्सा है । कथन 2."रोगा: सर्वेऽपि जायन्ते वेगोदीरण धारणै: " अष्टांग हृदय का कथन हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Bastishuddhikaraih Siddhe Bhajetkshīram" Statement 2- "Rogāh Sarve Api Jāyante Vegodīrana Dhāranaih" is the statement of Ashtānga Hrudya.

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अष्टांग हृदय सूत्र स्थान के ४ थे अध्याय का नाम क्या है ?
What is the name of Ashtāmga Hridaya fourth chapter

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बस्तिकर्म किस वेगावरोध की चिकित्सा है?
Basti karma is treatment of which vegavarodha

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन से पहले घृतपान करना मूत्र वेगावरोधज रोगों की चिकित्सा है । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मल वेग धारण करने से उत्पन्न रोग में मलभेदी अन्न पान देना चाहिए।
Statement 1 - According to Ashtānga Hrudaya, intake of Ghruta before meal is the treatment of suppression of urge of Mūtra. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudaya, in the disease caused by suppression of urge of Mala, Malabhedī Annapāna should be given.

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. "रोगा: सर्वेऽपि जायन्ते वेगोदीरण धारणै: " का संदर्भ है -
"Rogāh sarve api jāyante vegodīrana dhāranaih" is the reference of

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छर्दि वेगावरोध से उत्पन्न होने वाला रोग है ?
Roga due to Chardī vegavarodha is

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तत्र वातघ्नश्च क्रिया क्रम: किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Tatra vātaghnashcha kriyā kramah" is treatment of which vegavarodha

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार उद्गार धारण जन्य रोग में हिध्मा की तरह चिकित्सा करे । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार पिपासा वेग धारण करने से बाधिर्य होता हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in diseases of suppresion of Udgāra, treatment similar to Hidhmā should be done. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, suppresion of Pipāsā urge leads to Bādhirya.

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निद्रा वेग धारण करने से उत्पन्न लक्षण है -
Symptom due to Nidrā Vegadhārana is

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गुल्म लक्षण कौनसे वेगावरोध में मिलता है ?
Gulma is symptom of which vegavarodha

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सक्षारलवणं तैलमभ्यंगार्थं च शस्यते" किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Sakshāralavanam tailamabhyamgārtham cha shasyate" is treatment of which vegavarodha

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मोहमूर्धाअक्षिगौरव' किस वेगधारण का लक्षण है (अष्टांगहृदय)
"Moha mūrdhā akshi gaurav" is lakshana of which vega dhārana (Ashtāmga Hridaya)

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तत्र स्वप्नो मद्यं प्रिया: कथा: किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Tatra svapno madhyam priyāh kathāh" is treatment of which vegavarodha

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स्वास्थ्य संरक्षण के दृष्टिकोण से "नित्यं हिताहार विहार सेवी समीक्ष्यकारी विषयेषुसक्त" कहाँ का सन्दर्भ है ?
With the approach of health protection, "Narohitāhāra Sevī Samīkshyakārī Vishayeshusakta" is the reference from -

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अक्षिगौरव लक्षण किस वेगावरोध में मिलता है ?
Akshigaurava is symptom due to which vegavarodha

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गण्डूषधूमनाहारा रुक्षं भुक्त्वा किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
"Gandūsha dhūmanāhāra ruksham bhuktvā" is treatment of which vegavarodha

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वर्त्यभ्यंगावगाहाश्च स्वेदनं....' किस वेगावरोधज रोगों की चिकित्सा है । वाग्भट
"Vartya abhyamga avagāhāshcha svedanam" is treatment of which vegavarodhaja roga

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अवपीडक घृत किस वेगावरोध की चिकित्सा है ?
Avapīdaka ghrita is treatment of which vegavarodha

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श्वासsरुचिहृदमया' किस वेगावरोध का लक्षण है
"Shvāsa aruchi hridamayā" is symptom of which vegavarodha

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कथन १ - अंग भंग मूत्र वेगावधारण का लक्षण है। कथन २- अंग भंग क्षुधा वेगावधारण का लक्षण नहीं है
statement 1-angabhang is the symptom of mutra vegavdharan. statement 2- angabhang is not a symptom of kshuda vegavdhaaran.

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वाग्भट ने आगन्तुज रोगों का वर्णन किस अध्याय में किया है ?
Vāgabhatta has described āgantuja diseases in which chapter

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उद्गार के वेग को रोकने से उत्पन्न लक्षण है -
Symptom due to Udgāra vega avarodha is

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निम्न में अधारणीय वेग है ?
Adāranīya vega among the following is

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नित्यं हिताहारविहारसेवी समीक्ष्यकारी ...... का संदर्भ है -
"Nityam hitāhāravihāhārasevī samīkshyakārī....." is reference of

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मन्यास्तंभारुचि भ्रमा: किस वेगावरोध का लक्षण हैं ?
"Manyāstambha aruchi bhramāh" is symptom of which vegavarodha

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