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Sneha vidhi adhyaya AIAPGET MCQs

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16.Sneha vidhi adhyaya

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प्रावृट ऋतू मे किसका प्रयोग करना चाहिए
In Pravruta ritu which Sneha is used?

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क्षपाशय का तात्पर्य है -
Kshapāshaya means -

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तुवरक स्नेह का अनुपान
Anupana for Tuwaraka Sneha is

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स्नेहन के योग्य है -
Ṣnēhana is indicated in-

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किन-किन स्थितियों में रोगी को स्नेहन के पूर्व रुक्षण करना अनिवार्य है -
In which of the following conditions, rukshana should be done compulsorily before snehana ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्नेह सेवन करने वाले को "क्षपाशय " निर्देशित हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मृदु कोष्ठ वाला व्यक्ति तीन दिन तक शुद्ध स्नेह पान करे ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Kshapāshaya" is indicated for individuals taking Sneha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, a person of Mrudu Koshtha can take Sneha for three days.

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स्नेहपान क्रम में किस प्रकार का भोजन सेवनीय है -
While taking snehapāna, which kind of meal should be consumed ?

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निम्न में से लवण का वैशिष्ट्य है -
Which of the following is the characteristic feature of lavana ?

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भोजन पूर्व पीया गया बृंहण स्नेह किस व्याधि का नाश करता है ?
Brimhana sneha taken before meals destroys which of the following disease ?

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, शोधनार्थ प्रयुक्त स्नेह की मात्रा है -
Sneha mātra useful for shodhana purpose according to Ashtānga Hrudya is -

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स्नेहपान के विहार नियम है-
Vihāra niyamas for snehapāna are -

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लघुता व दृढ़ता की इच्छा रखने वाले को किस स्नेह का सेवन करना चाहिए ?
Which sneha should be consumed by those who desire laghutā and dRidhatā ?

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शीत ऋतु में रात्रि में घृत का प्रयोग करने पर कौनसे रोग उत्पन्न होते है ?
In shīta Ritu, use of ghrita during night time leads to which disease ?

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कथन 1 . अष्टांग हृदय अनुसार चार स्नेह में मज्जा सबसे अधिक गुरु होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार दो स्नेह के मिलने से त्रिवृत संज्ञा होती हैं
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in all four Sneha, Majjā is most heavy. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, combining Two Sneha is named as Trivruta.

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कुष्ठी, शोफी व प्रमेही में स्नेहन हेतु प्रयुक्त द्रव्य है -
Dravyas useful for snehana in kushtha,shopha and prameha rogī -

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ग्रीष्म ऋतु में स्नेहनार्थ किस स्नेह का प्रयोग करना चाहिए ?
Which sneha should be used for snehana in Grīshma Ritu ?

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भ्रष्टयोनि में प्रयुक्त स्नेह है -
Sneha useful in "bhrashtayoni" ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार ग्रीष्म काल में पित्त प्रकोप वात प्रकोप तथा पित्त प्रधान संसर्गज विकारों में घृत का प्रयोग रात में करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार रस भेदो के साथ तथा केवल स्नेह भेद से स्नेह की चौंसठ विचारणा बनती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in Grīshma Kāla, Pitta Prakopa, Vāta Prakopa and Pitta predominant Sansargaja diseases , use of Ghruta should be done in Night. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, on basis of Rasa types and only Sneha types, Sixty Four Vichāranā are formed.

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सर्वप्रथम दोषादि को देखकर स्नेह की कौनसी मात्रा प्रयुक्त करनी चाहिए ?
Which sneha mātrā should be used with reference to doshas etc. ?

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कुष्ठी, शोफी व प्रमेही में निषिद्ध द्रव्य नही है -
Which of the following is not contraindicated in kushthī, shophī and pramehī ?

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार दो स्नेहों के मिलने से यमक संज्ञा होती हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार तीन स्नेहों के मिलने से त्रिवृत संज्ञा होती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, combination of Two Sneha is named as Yamaka. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, combination of Three Sneha is named as Trivruta.

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कर्णशिरोरुजि में प्रयुक्त स्नेह है -
Sneha useful in "karnashiroruji" -

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प्राय: सभी स्नेह पान के उपरान्त सेवनीय है -
Following is normally taken after all kinds of snehapāna ?

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स्नेह व्यापद् की चिकित्सा है -
Treatment of sneha vyāpada is -

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मृदु कोष्ठ वाले को अच्छ स्नेह का सेवन कितने दिन तक करना चाहिए
For how many days Achchha Sneha can be given to a Mridu Koshtha person?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्नेहन करने के 3 दिन बाद विरेचन लेना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "दृढेन्द्रिय‌ मंन्दजर: शतायु:"स्नेह सेवन से होने वाले लाभ हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Virechana should be given 3 days after Snehana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Drudhendriyah Mandajarah Shatāyuh" is the benefit of intake of Sneha.

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किस स्नेहपान के सिवाय स्नेहपान के उपरान्त उष्णोदक पिया जा सकता है ?
Ushnodaka are taken post snehapāna except for these snehas ?

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स्नेहन के अयोग्य नहीं हैं -
Which of the following are not snehana ayogya -

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पंचप्रसृत पेया के घटक है -
Contents of panchaprasRita peyā -

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दधि द्वारा स्नेहन किसमें निषिद्ध है -
Snehana with dadhi is contraindicated in -

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बृहणार्थ स्नेह की कौनसी मात्रा प्रयुक्त होती है
Sneha matra used For Brimghana

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स्नेहन के योग्य है -
Following are snehana yogya -

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स्नेहन के अयोग्य है सिवाय -
Snehana is contraindicated in the following except -

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क्षीण धातु की स्थिति में प्रयुक्त स्नेह है -
Sneha used in condition of kshīna dhātu -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्नेह व्यापद् में तक्रारिष्ट का प्रयोग करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार स्नेह व्यापद् में गुग्गुल का प्रयोग करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, use of Takrārishta should be done in Sneha Vyāpad. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya use of Guggulu should be done in Sneha Vyāpada.

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स्नेहपान में परिहार काल है -
Parihāra kāla for snehapāna is -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार प्रावृट ऋतु मे तैल का प्रयोग करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वर्षा के अंत में घृत का प्रयोग करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Taila should be used in Prāvruta Ritu. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Ghruta should be used at the end of Varshā.

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अष्टांग हृदय ने कितने सद्यः स्नेहन द्रव्यों का उल्लेख किया है ?
How many Sadyah Snehana dravya are told by Astanga Hridaya?

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स्नेह व्यापद् में किन अधारणीय वेग को भी धारण का निर्देश है ?
Which adhārnīya vega are advised to be suppressed during sneha vyāpad ?

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बृंहणार्थ स्नेह दिया जाता है -
Snehana kāla for brimhana karma -

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वातावृतपथेषु की स्थिति में किस स्नेह का प्रयोग करना श्रेष्ठ है ?
Which sneha should be used in the condition of "vātāvRitapatheshu" ?

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स्नेह की मध्यम मात्रा कितने प्रहर मे पचती है
Time (prahara) taken to digest the Medium dose of sneha?

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ग्रंथि रोग में श्रेष्ठ स्नेह है ?
Best sneha in granthi roga is -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "वातानुलोम्यं दीप्तोऽग्निर्वर्च: स्निग्धमसंहतम" अति स्निग्ध के लक्षण हैं। । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "पाण्डुत्वं घ्राणवक्त्रगुदास्त्रवा:" अति स्निग्ध के लक्षण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Vātānulomyam Dīpto Agnirvarchah Snigdhamasamhatam" is the symptom of Ati Snigdha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Pāndutvam Ghrānavaktragudāstravāh" is the symptom of Ati Snigdha.

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सम्यक् स्निग्ध का लक्षण हैं -
Which of the following is the lakshana of samyak snighdha ?

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कृमि रोग में प्रयुक्त होता है -
Following is useful in kRimi roga -

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स्नेह की हृस्व, मध्य व उत्तम मात्रा क्रमशः कितने याम में जीर्ण होती है ?
Hraswa, madhya and uttama mātrā of sneha gets digested in how many "yāma" respectively ?

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वातानुलोम्यं दीप्तोऽग्निर्वर्च: स्निग्धमसंहतया ........ उपरोक्त लक्षण किसका है ?
"Vātānulomyam dīptoagnirvarchah sigdhamasamhatayā..........." is the lakshana of ?

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स्नेहन के योग्य है सिवाय -
Following are snehana yogya except for -

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स्नेहन निषेध है -
Snehana is contraindicated in -

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सम्यक् स्निग्ध के/का लक्षण है
Lakshanas of Samyaka Snigdha is/are?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन के मध्य पिया स्नेह अधोभाग के रोगों को नष्ट करता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन से पूर्व पिया स्नेह ऊर्ध्व भाग के रोगों को नष्ट करता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, sneha taken in between meal destroys diseases of lower extremity. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, sneha taken before meal destroys diseases of upper extremity.

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शमनार्थ स्नेह का प्रयोग कैसे होता है (a.h. 16/19)
Sneha For Shamana is used as

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अष्टांगहृदय अनुसार निम्न में सबसे कम पित्त शामक है
Least PIttashamaka is(A.H.)

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अयुक्ति युक्त स्नेह पान से उत्पन्न विकार है सिवाय -
Which of the following disease caused due to ayukti yukta sneha pāna except for ?

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सम्यक् स्निग्ध का लक्षण नही है -
Which of the following is not a lakshana of samyaka snighdha ?

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अष्टांग हृदय अनुसार, क्रूर कोष्ठी में प्रयुक्त स्नेह है -
Snehana useful in krūra koshthī according to Ashtānga Hrudya is -

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शोधनार्थ स्नेह काल है -
Sneha kāla for shodhana -

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अष्टांग हृदय के अनुसार वातकफजन्य रोगों मे कौनसा स्नेह श्रेष्ठ है ?
According to Astang Hridaya which Sneha is best for Vaatkaphaja rogas ?

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साधारण ऋतु में स्नेह का प्रयोग कब करना चाहिए ?
During sādhārana Ritu sneha should be used at which time ?

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तिल व क्षीर द्वारा स्नेहन किस रोगी में निषिद्ध है -
Snehana with tila and kshīra is contra indicated in -

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मृदु व क्रूर कोष्ठी व्यक्ति को क्रमशः कितने दिन तक अच्छ स्नेहपान करना चाहिए ?
Accha snehapāna should be given for how many days for mRidu and krūra koshthī person respectively ?

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. कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार दो याम में जीर्ण होने वाली स्नेह की मात्रा उत्तम हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार चार याम में जीर्ण होने वाली स्नेह की मात्रा मध्यम हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, dose of sneha getting digested in two yāma is Uttama. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, dose of sneha getting digested in four yāma is madhyama.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्नेहन द्रव्य गुरु, शीतल, सर गुण वाले होते हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार स्नेहन द्रव्य गुरु, उष्ण, सर गुण वाले होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Snehana dravya have Guna of Guru, Shītala, Sara. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Snehana dravya have Guru, Ushna, Sara Guna.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन के अंत में पिया स्नेह ऊर्ध्व भाग के रोगों को नष्ट करता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन से पूर्व पिया स्नेह अधो भाग के रोगों को नष्ट करता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Sneha taken at the end of meal deatroys diseases of Upper part of body. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Sneha taken before meal destroys diseases of Lower part of body.

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कथन 1.. अष्टांग हृदय अनुसार मृदु कोष्ठ वाला व्यक्ति तीन दिन तक शुद्ध स्नेह पान करे । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार क्रूर कोष्ठ वाला व्यक्ति सात दिन तक शुद्ध स्नेह पान करे ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, a person of Mrudu Koshtha should take pure Sneha for three days. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, a person of Krūra Koshtha should take pure Sneha for seven days.

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स्नेहो में सर्पि की श्रेष्ठता का हेतु है ?
Sarpi is best in Sneha dravyas because

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स्नेहपान की मात्रा कितने प्रकार की होती है ?
Mātrā of snehapāna is of how many types ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार तिमिर का रोगी स्नेहन के सर्वथा अयोग्य हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार तिमिर का रोगी स्नेहन योग्य हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Timira is always contraindicated for Snehana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, patient of Timira is always indicated for Snehana.

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धी स्मृति मेधादिकांक्षी के लिए कौनसा स्नेह उत्तम है
Dhi smrati medhadikamkshi is said for which snehana

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. अष्टांग हृदय अनुसार शमनार्थ स्नेह की कौनसी मात्र प्रयुक्त होती है
According to Astang Hridya which matra of Sneha is used for Shamana?

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार शमन स्नेह सेवन में किसके समान उपचार करना चाहिए
According to Astang Hridaya when Shaman Sneha is given, treatment must be done as

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन से पूर्व पिया स्नेह अधोभाग के रोगों को नष्ट करता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार भोजन से पूर्व पिया स्नेह ऊर्ध्व भाग के रोगों को नष्ट करता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, sneha taken before meal destroys diseases of lower part. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, sneha taken before meal destroys diseases of upper part.

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भोजन के पश्चात पीया गया बृंहण स्नेह किस भाग की व्याधि का नाश करता है ?
Brimhana sneha taken after meals destroys which of the following disease ?

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स्नेहन के कितने दिन पश्चात् विरेचन देना चाहिए (अष्टाङ्गहृदय)
According to Astang Hridaya time gap between snehana and virechana is?

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ग्रन्थि रोग के लिए उपयुक्त स्नेह है। वाग्भट
According to Astang Hridaya Sneha used in Granthi roga is?

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स्नेह व्यापद् में करणीय है -
Which of the following is done in sneha vyāpada ?

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नाड़ी रोग में प्रयुक्त होता है -
Following is useful in nādī roga ?

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निम्न चारों स्नेहों में उत्तम स्नेह है -
Best Sneha in the following is

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स्नेहन के अयोग्य है -
Which of the following are snehana ayogya ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "ह्यस्तने जीर्ण एवान्ने स्नेहोऽच्छः शुध्दये बहुः" । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार "शमन: क्षुध्दोऽनत्रो उत्तममात्रश्च शस्यते"।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Hyastane Jīrna Evānne Sneho Achchhah Shudhyaye Bahuh" . Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Shamanah Kshuddho Ananno Uttamamātrashcha Shasyate"

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अभिकथन (A. अष्टांग हृदय अनुसार लवण प्रचुर स्नेह सद्य स्नेहन करते हैं । तर्क (R). क्योंकि लवण अभिष्यंदि, अरुक्ष,उष्ण शीत, व्यवायी होता हैं ।
Assertion A - According to Ashtānga Hrudya, Lavana Sneha in abundance does immediate Snehana. R. Because Lavana is Abhishyandi, Aruksha, Ushna, Shīta, Vyavāyī.

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अत्यग्नि में प्रयुक्त स्नेह है - (अष्टांग हृदय)
Sneha used in Atyagni - (ashtānga hRidaya)

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स्नेह की मध्यम मात्रा.....प्रहर में जीर्ण हो जाती है।। वाग्भट
Madhyama mātrā of sneha becomes jīrna in ...... prahara ( Vāgbhata )

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार क्षीण शुक्र मनुष्य स्नेहन के अयोग्य हैं । कथन 2.अष्टांग हृदय अनुसार तिमिर का रोगी स्नेहन योग्य हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, individual of Kshīna Shukra is contraindicated for Snehana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, patient of Timira is indicated for Snehana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार " तु सन्ध्यस्थिमर्मकोष्ठरुजासु च" तैल स्नेह के सन्दर्भ में कहा हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "दग्धाहत" में वसा स्नेह प्रयुक्त है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Tu Sandhyasthimarmakoshtharujāsu cha" is said in context to Sneha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vasā Sneha is used in "Dagdhāhat".

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सद्य: स्नेहार्थ वाग्भट ने कितने योग बताए है ?
Vāgbhata has described how many sadya snehana yoga ?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार क्रूर कोष्ठी के लिए तैल प्रशस्त हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार भ्रष्ट योनि में वसा प्रशस्त हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Taila is ideal for Krūra Koshthī. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vasā is best in Bhrashta Yoni.

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सद्य: स्नेहन के योग्य है ?
Which of the following is indicated for sadya snehana ?

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कितने दिन के बाद स्नेह सात्म्य हो जाता है ?
Sneha becomes sātmya after how many days ?

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घृत,तैल,वसा,मज्जा इन चारों स्नेह का नाम है
All Sneha Dravayas collectively known as

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दो व तीन,चार स्नेहों का एकत्र योग कहलाता है क्रमशः-
Two Three and Four All Combinations of Sneha Dravyas are respectively known as

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स्नेह की पूर्व पूर्व श्रेष्ठ पित्त शामकता का क्रम है
Sequence of snehas for Pitta Shamana is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार दो याम में जीर्ण होने वाली स्नेह की मात्रा हृस्व होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार चार याम में जीर्ण होने वाली स्नेह की मात्रा मध्यम हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, dose of Sneha which gets digested in Two Yāma is Hrasva. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, the dose of Sneha which gets digested in Four Yāma is Madhyama.

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श्रेष्ठ स्नेह कल्प है -
Best sneha kalpa -

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार "धी स्मृति मेधादिकांक्षी" के लिए घृत उत्तम है । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "धी स्मृति मेधादिकांक्षी" के लिए तैल उत्तम है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Ghruta is best for "Dhī Smruti Medhādikānkshī". Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Taila is best for "Dhī Smruti Medhādikānkshī".

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आत्यायिक अवस्था में घृत व तैल का प्रयोग क्रमशः ग्रीष्म व शीत काल में करने का उपयुक्त समय है क्रमशः -
In emergency situation, time period of using ghRita and taila in grīshma and shīta kāla is respectively -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार घृत उत्तम पित्त नाशक हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार घृत वात कफ का नाश करने में अन्य स्नेहों की अपेक्षा अवर होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Ghruta is best in destroying Pitta. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Ghruta is inferior in destroying Vāta Kapha as compared to other Sneha.

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सभी स्नेहों में प्रवर स्नेह है -
Best Sneha in all Sneha dravyas is/are

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दग्धाहत में प्रयुक्त स्नेह है -
Sneha useful in "dagdhāhata" -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार तुवरक और अरूषकर तैल के सेवन पश्चात उष्ण जल पिए। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार तुवरक और अरूषकर तैल के सेवन पश्चात शीत जल पिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, hot water should be taken after intake of Tuvaraka and Arūshakara Taila. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Cold water should be taken after intake of Tuvaraka and Arūshakara Taila.

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रूक्षक्लेशक्षम व्यक्ति में प्रयुक्त स्नेह है -
Sneha useful in the condition of "rukshakleshakshama" -

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भोजन के बीच में पीया गया बृंहण स्नेह किस भाग की व्याधि का नाश करता है ?
Brimhana sneha taken in between meals destroys which of the following disease ?

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रसभेद से स्नेह की कुल कितनी प्रविचारणा होती है ? ( वाग्भट )
Total number of sneha pravicharnā according to rasabheda ? ( Vāgbhata )

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स्नेहन के कितने दिन बाद क्रमशः वमन व विरेचन करवाया जा सकता है ?
Vamana and virechana should be done respectively after how many days post snehana karma ?

106 / 114

कथन 1. मोहन अतिमंदाग्नि से पीड़ित हैं, अष्टांग हृदय अनुसार मोहन स्नेहन के अयोग्य हैं । कथन 2.सोहन अति तीक्ष्ण अग्नि से पीड़ित हैं, अष्टांग हृदय अनुसार सोहन स्नेहन के योग्य हैं ।
Statement 1- Mohan is suffering from excess Mandāgni, According to Ashtānga Hrudya, Mohan is contraindicated for Snehana. Statement 2- Sohan is suffering from excess Tīkshnagni, According to Ashtānga Hrudya, Sohan is indicated for Snehana.

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ग्रीष्म ऋतु में दिन में तैल का प्रयोग करने पर कौनसे रोग होते है ?
In grīshma Ritu, taila used during day time leads to which disease ?

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सद्य स्नेहन का निषेध किसमे है
Sadhya sneha is Contraindicated in?
ed

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स्नेह के कितने विकल्प होते है ?
How many vikalpa are there of sneha ?

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स्नेहन द्रव्य में निम्न गुण होता है -
Following Guna is present in Sneha Dravayas

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वर्षा के अंत में घृत का प्रयोग करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वसा और मज्जा को माधव में प्रयोग करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Ghruta should be used at the end of Varshā. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vasā and Majjā should be used in Mādhava.

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शमन स्नेह के समय सभी उपचार किसके समान करने चाहिए ?
During shamana sneha all treatments should be done similar to what among the following ?

113 / 114

.............तु सन्ध्यस्थिमर्मकोष्ठरुजासु च स्नेह के सन्दर्भ में रिक्त स्थान में है -
".......................tu sandhyasthimarmakoshtharujāsu cha" fill in the blanks -

114 / 114

किस रस से युक्त द्रव्य सद्य स्नेहन करते है ?
Dravya used for sadya snehana should contain which rasa ?

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