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Svedavidhi adhyaya

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17.Svedavidhi adhyaya

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स्वेदनं ........ तीक्ष्णोष्णम् प्रायः
Swedanam........ Teekshanoshnam praya

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कथन . अष्टांग हृदय अनुसार रात्रि में बांधे गए उपनाह को दिन में खोल देना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार दिन में बांधे गए उपनाह को रात्रि में खोल देना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Upanāha tied during night should be opened in day. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Upanāha tied during day should be opened during night.

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार अतिरुक्ष व्यक्ति स्वेदन के अयोग्य होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार अति स्थूल व्यक्ति स्वेदन के योग्य होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, excess dry person is contraindicated for Swedana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, excess obese person is indicated for Swedana.

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सर्वांगेऽनिले इस स्थिति में किस स्वेद का प्रयोग उचित है -
"Sarvānge anile" in this condition , use of which sweda is correct ?

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यदि वात के साथ पित्त संसृष्ट है तो किस गण के द्रव्य मिलाकर उपनाह स्वेद करना चाहिए ?
If pitta is associated with Vāta, then the Upanāha sweda is done with mixing which gana dravya

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार अति स्वेद से पित्त रक्त कुपित होता हैं और संधि पीड़ा भी होती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार गुरु, तीक्ष्ण,और उष्ण गुण वाली औषध प्राय: स्वेदन करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Pitta Rakta gets aggravated with excess Sweda and also causes pain in joints. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, medicine having Guna of Guru, Tīkshna and Ushna mainly does Swedana.

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अवगाहन स्वेद का प्रयोग किसमे करते है
Awagaha Sweda is used in

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार लघु,मंद शीत गुण वाली औषध प्राय: स्वेदन करती हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार गुरु, तीक्ष्ण,और उष्ण गुण वाली औषध प्राय: स्वेदन करती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, medicine having Laghu, Manda, Shīta property mainly does Swedana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, medicine having property of Guru, Tīkshna and Ushna does mainly Swedana.

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स्वेदन के अयोग्य है -
Swedana is contraindicated in -

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कथन 1.अष्टांग हृदय अनुसार आढ्य रोगी स्वेदन के अयोग्य होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार पांडु ,कामला पीड़ित स्वेदन के योग्य होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Ādhya Vāta is contraindicated for Swedana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, patient suffering from Pāndu, Kāmalā is indicated for Swedana.

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अष्टाङ्ग हृदय मतानुसार, अल्प स्वेदन करने योग्य अवयव है -
Which organ is indicated for alpa svedana

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार तिक्त, कषाय एवं मधुर रस वाले द्रव्य होते है
According to Astang Hridaya, Tikta, Madhur, and kashaya rasa dravyas are

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दोनों वंक्षणों में किस तरह का स्वेद करना चाहिये (अष्टांगहृदय)
Swedana done on both Vankshana

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स्वेदन द्रव्य में निम्न गुण होते है सिवाय -
Following gunas are present in swedana except -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "सर्वांगेऽनिले" इस स्थिति में अवगाह स्वेद का प्रयोग उचित है । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वंक्षण में मध्यम स्वेद करना चाहिए।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Sarvānge Anile" in the condition, Avagāha Sweda is advised. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Madhyama Sweda should be done on Vankshana.

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अभिकथन (A. अष्टांग हृदय अनुसार वंक्षण भाग में अल्प स्वेद करना चाहिए । तर्क (R). अष्टांग हृदय अनुसार आंख, वृषण हृदय पे मध्यम स्वेद करना चाहिए ।
Assertion (A : According to Ashtānga Hrudya, Alpa Sweda should be done in Vankshana region. Reason ( R) : According to Ashtānga Hrudya, Madhyama Sweda should be done on Eyes, Vrushana, Hrudya.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार तिमिर से पीड़ित व्यक्ति स्वेदन के योग्य हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार उदर रोग से पीड़ित स्वेदन के योग्य हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, person suffering from Timira is indicated for Swedana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, person suffering from Udararoga is indicated for Swedana.

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स्वेदन के अतियोग में करते है
............ done in SWEDANA Atiyoga

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विषक्षाराग्न्यतीसारच्छर्दिमोहातुरेषु उपरोक्त स्थिति में प्रयुक्त चिकित्सा है -
"Vishakshārägnyātīsārachchhardimohātureshu" in the above said stage the treatment used is

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............ऽग्नितप्तवसन कालहस्ततलादिभि:।रिक्त स्थान में उपयुक्त है -
Fill in the blank - " ........... agnitaptavasana kālahastatalādibhih "

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अष्टाङ्गहृदय ने द्रव स्वेद के कितने भेद बताये है
Types of Drava Sweda by Astanga Hridaya are

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वाग्भट के अनुसार स्वेदन कितने प्रकार का होता है ?
According to Vāgbhata, swedana is classified into how many types ?

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स्वेदन के योग्य है
Swedana is done in

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उपनाह स्वेद में प्रयुक्त बन्धन द्रव्य है -
Bandhana dravya used in upanāha sweda is -

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार वायु के साथ पित्त का संसर्ग होने पर किस गण के द्रव्यों से उपनाह करना चाहिए
According to Astanga Hridaya when Pitta is associated with vaat, then upnaaha is done with which ganas?

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पादौष्ठत्वक्करै: श्यावै:' किसका लक्षण है
Paadaushtha twak kare shyawai is the Lakshana of

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शीतशूल क्षये .........जातेऽंंगानां च मार्दवे । यह लक्षण किसका है ?
"Shītashūla kshaye........ Jāte angānām cha mārdave|" is the lakshana of

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वायु अगर आमाशय में पहुंची हो तो प्रथम रुक्ष स्वेद करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार अगर कफ पक्वाशय में पहुंचा हो तो प्रथम स्निग्ध स्वेद करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, if Vāyu reaches in Āmāshaya, then first Ruksha Sweda should be given. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, if Kapha reaches Pakvāshaya, then first Snigdha Sweda should be done.

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अष्टांगहृदय ने अनाग्नेय स्वेद के कितने भेद बताये है
Types of Anaagneya sweda according to Astang Hridaya

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तुत्कारिकालोष्टपालोपलपांसुभि:। उपरोक्त द्रव्य निम्न स्वेद में प्रयोक्तव्य है -
"Tutkārikāloshtapālopalapāmsubhih" following dravya is used in which sweda ?

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स्तम्भन द्रव्य में रस होते है -
Rasa in stambhana dravya are -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वायु के मेद और कफ से आवृत होने पर साग्नि स्वेद कराना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार गुरु प्रावरण निराग्नि स्वेद हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, when Vāyu is covered with Meda and Kapha, then Sāgni Sweda should be given. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Guru Prāvarana is Nirāgni Sweda.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार शोष से पीड़ित स्वेदन के योग्य होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार हनु ग्रह पीड़ित स्वेदन साध्य है ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, person suffering from Shosha is indicated for Swedana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, suffering from Hanu Graha is curable by Swedana.

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यदि वात के साथ श्लेष्मा संसृष्ट है तो किस गण के द्रव्य मिलाकर उपनाह स्वेद करना चाहिए ?
If vāta is associated with shleshmā then upanāha sveda should be done mixing with which of the following gana of dravya

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कथन 1. अष्टाङ्ग हृदय अनुसार वायु के साथ पित्त का संसर्ग होने पर सुरसादी गण के द्रव्यों से उपनाह करना चाहिए । कथन 2.अष्टाङ्ग हृदय अनुसार वायु के साथ पित्त का संसर्ग होने पर पद्मकआदि गण के द्रव्यों से उपनाह करना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, if there is association of Pitta with Vāyu, then Upanāha of dravya of Surasādi Gana should be done. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, if there is association of Pitta with Vāyu, then Upanāha of dravya of Padmakādi Gana should be done.

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निराग्नि स्वेद नही है -
Which is not a Nirāgni Sweda ?

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वाग्भटमतानुसार स्वेद के अतियोग की चिकित्सा है -
According to Vāgbhata , treatment of atiyoga of sweda is -

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स्वल्प स्वेदन या स्वेदन न करने योग्य अवयव है -
Swalpa swedana or Alpa swedana is done on which part

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार श्वास, कास, प्रतिश्याय स्वेद साध्य रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार मूत्रकृच्छ,स्वेद साध्य रोग हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Shwāsa, Kāsa, Pratishyāya are Sweda Sādhya disease. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Mūtrakruchchhra is Sweda Sādhya disease.

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आमाशयगते वायौ होने पर निर्दिष्ट स्वेद है -
Sweda indicated in "Āmāshayagate vāyau " is -

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. उपनाह स्वेद में बन्धन हेतु प्रयुक्त चर्मपट्ट की विशेषता है -
Speciality of the Charmapatta used for bandaging in upanāha sweda

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स्वेद के अतियोग का लक्षण हैं -
Symptoms of atiyoga of sweda is

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मेदस् और कफ से आवृत वायु में कौनसा स्वेद देना चाहिए
Which Sweda is given in Meda and Kapha aavrat vaat?

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बद्धं रात्रोर्दिवा मुंचेन्मुंंचेद्रात्रौ दिवाकृतं । किस संदर्भ में कहा है ?
"Baddham rātrordivāmunchedrātrau divākrutam " is said in context to ?

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स्वेदनं ...…......... प्रायः
Swedanam............ Praya

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कौनसा स्वेद प्रकार साग्नि व निराग्नि दोनों में ही माना है -
Which type of sweda is mentioned in both sāgni and nirāgni ?

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स्वेदन द्रव्य में निम्न गुण होते है -
Following guna are there in swedana dravya -

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार स्वेद चार प्रकार के होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार स्वेद 2 प्रकार के होते हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Seeda is of Four Types. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Sweda is of 2 Types.

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आचार्य पाराशर ने कितने रसो का विपाक मधुर माना है ?
Ācharyā Pārāshara has considered Vipāka of how many Rasa as Madhura ?

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कथन 1. "...ऽग्नितप्तवसन कालहस्ततलादिभि:।"अष्टांग हृदय ने उपनाह स्वेद के संदर्भ में कहा हैं । कथन 2. "...ऽग्नितप्तवसन कालहस्ततलादिभि:।"अष्टांग हृदय ने ताप स्वेद के संदर्भ में कहा हैं ।
Statement 1- "...... Agnitaptavasana Kālahastatalādibhih" Ashtānga Hrudya has said in context to Upanāha Sweda. Statement 2- "...... Agnitaptavasana Kālahastatalādibhih" Ashtānga Hrudya has said in context to Tāpa Sweda.

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अष्टांगहृदय अनुसार साग्नि स्वेद के भेद है
Types of Sa-agni Sweda according to Astang hridaya

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उपनाह स्वेद में प्रयुक्त द्रव्य है -
Dravya used in upanāha sveda is -

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पादौष्ठत्वक्करै: श्यावै:' किसके अतियोग का लक्षण है
Paadaushtha twak kare shyawai is the Lakshana of which atiyoga

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सम्यक् स्विन्न के बाद करणीय है -
What should be done after samyaka swinna

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कफे पक्वाशयाश्रिते" होने पर निर्दिष्ट स्वेद है -
Sweda indicated in the condition of "kaphe pakvāshayāshrite " ?

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अतिस्तम्भित का लक्षण हैं -
Symptoms of atistambhita is

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स्वेदन व स्तंभन द्रव्य में किन गुणों की समानता है ?
How many gunas are common in swedana and stambhana dravya ?

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