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Vamana virecana vidhi adhyaya AIAPGET MCQs

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18.Vamana virecana vidhi adhyaya

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अपक्वम् वमनं दोषान् ...... विरेचनम्
Apakavam vamanam Doshaan............ Virechanam

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निष्ठीव कण्डू कोठ ज्वरादय है
Nisthivkandookoth jwaradaya is

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार "कंडूर्विदाह: पिटका: पीनसो वातविड्ग्रह " विरेचन के अयोग के लक्षण हैं। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कफ, पित्त का उत्क्लेश होना विरेचन के अयोग के लक्षण हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Kandūrvidāhah Pitakāh Pīnaso Vātavidgraha" is the symptom of inadequate administration of Virechana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, expulsion of Kapha, Pitta is the symptom of inadequate administration of Virechana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार " मांसधावनतुल्यं वा मेद:खण्डाभमेव वा " विरेचन के अतियोग के लक्षण में हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार सम्यक विरेचन होने पर धूमपान कराए।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, "Māmsadhāvanatulyam vā Medah Khandābhameva vā" is the symptom of excess administration of Virechana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Dhūmapāna should be advocated in proper administration of Virechana.

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विरेचन की किस अवस्था में पीनस होता है
Peenasha is seen in which stage of Virechana

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पित्त दोष में मधुर शीतल द्रव्यों से वमन करना चाहिए। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वायु मिश्रित कफ में स्निग्ध,अम्ल,और लवण द्रव्यों से वमन कराना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vamana with Madhura substances should be done in Pitta Dosha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vamana with Snigdha, Amla and Lavana dravyas should be done in Vāyu mixed Kapha.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार राजयक्ष्मा का रोगी वमन साध्य हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार योनि रोग विरेचन साध्य रोग हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Rājayakshmā is Vamana Sādhya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Yoni Roga is Virechana Sādhya.

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वमन की मध्य शुद्धि में कितने दिन पेयादि क्रम का सेवन करना चाहिए (अष्टाङ्गहृदय)
For how many days Peyadi Krama is followed in Madhyama Suddhi of Vamana?

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार जिसका पित्त एवं कफ थोड़ा निकला हो जो मद्य पायी हो उनको वमन विरेचन के पश्चात् क्या हितकर है
Accoring to Astanga Hridaya,the Hitakara dravyafor the person who is madyapayi and excreted less Pitta and Kapha after Vamana, Virechana is

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अष्टाङ्गहृदय अनुसार वमन की अवर शुद्धि में कितने वेग होते है
Vega of Vamana in Avara Suddhi (Astang Hridaya)

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन के प्रवर वेग में 10 वेग होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के जघन्य वेग में 10 वेग होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, 10 Vega are there in Pravara Vega of Vamana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, 10 Vega are there in Jaghanya Vega of Virechana.

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वाग्भट के अनुसार वमन में दोषो का निर्हरण क्रम क्या है
According to Vagbhatta sequence of dosha excreted in Vamana

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार कफ दोष में तीक्ष्ण, उष्ण,अम्ल द्रव्यो से वमन कराना चाहिए। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कफ दोष में तीक्ष्ण, उष्ण,कटु द्रव्यो से वमन कराना चाहिए ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vamana with Tīkshna, Ushna, Amla substances should be done in Kapha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Vamana with Tīkshna, Ushna, Katu substances should be done in Kapha Dosha.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वात रक्त का रोगी विरेचन साध्य होता हैं । कथन 2 . अष्टांग हृदय अनुसार कामला का रोगी विरेचन साध्य होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Vātarakta is Virechana Sādhya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, patient of Kāmalā is Virechana Sādhya.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार प्लीहा और तिमिर रोगी वमन के अयोग्य होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कृश‌ और स्थूल दोनो वमन के अयोग्य होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Plīhā and Timira are contraindicated for Vamana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, emaciated and obese person both are contraindicated for Vamana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के प्रवर वेग में निर्हरत दोष 4 प्रस्थ होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के मध्य वेग में निर्हरत दोष 1 प्रस्थ होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Dosha expelled in Pravara Vega of Virechana is 4 Prastha. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Dosha expelled in Madhya Vega of Virechana is 1 Prastha.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन पक्व हुए दोषों को बाहर निकालता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन दोषों को पच्यमान अवस्था में निकालता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vamana expels Pakva Doshas from the body. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Virechana expels Doshas in Pachyamāna stage.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार प्लीहा,तिमिर, काच के रोग विरेचन साध्य रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार योनि रोग और शुक्र रोग विरेचन साध्य रोग हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, diseases of Plīhā, Timira, Kācha are Virechana Sādhya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Yoni Roga and Shukra Roga are Virechana Sādhya.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन के हीन वेग में "कणाधात्रीसिध्दार्थकलवणोदकः" से पुनः: वमन कराना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "निष्ठीवकण्डूकोठज्वरादय:" वमन के सम्यक योग का लक्षण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in improper administration of Vamana, Vamana should be done again with "Kanādhātrīsiddhārthakalavanodakah". Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, symptom of proper administration of Vamana is " Nishthīvakandūkothajwarādayah" .

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कथन . अष्टांग हृदय अनुसार नव ज्वर वमन साध्य रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार जीर्ण ज्वर विरेचन साध्य रोग हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Nava Jwara is Vamana Sādhya Roga. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Jīrna Jwara is Virechana Sādhya Roga.

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क्षामता दाह: कण्ठशोषस्तमो भ्रम:' किसका लक्षण है
Kshaamtaa Daaha Kanthashoshashtamo bhrama is the lakshana of

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन के जघन्य वेग में छ वेग होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार वमन के प्रवर वेग में दस वेग होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, there are six Jaghanya Vega of Vamana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, there are Ten Pravara Vega of Vamana.

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अभिकथन(A. अष्टांग हृदय अनुसार संशोधन,रक्तमोक्षण, स्नेहपान और लंघन के बाद पेया,विलेपी आदि के क्रम का पालन करना चाहिए । तर्क (R). संशोधन,रक्तमोक्षण, स्नेहपान और लंघन के बाद अग्नि मंद हो जाती हैं पेया,विलेपी आदि के क्रम का पालन करने से अग्नि तीव्र हो जाती हैं।
Assertion (A : According to Ashtānga Hrudya, after Samshodhana, Raktamokshana, Snehapāna and Langhana, use of Peyā, Vilepī etc should be followed sequentially. Reason (R) After Samshodhana, Raktamokshana, Snehapāna and Langhana, digestive fire gets weakened and by following Peyā, Vilepi etc sequentially, digestive fire gets strong.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार क्रूर कोष्ठी विरेचन के अयोग्य होता हैं। कथन 2 . अष्टांग हृदय अनुसार क्रूर कोष्ठी विरेचन के योग्य होता हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Krūra Koshthī is contraindicated for Virechana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Krūra Koshthī is indicated for Virechana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के जघन्य वेग में निर्हरत दोष 1 प्रस्थ होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के मध्य वेग में निर्हरत दोष 2 प्रस्थ होता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Dosha expelled in Jaghanya Vega of Virechana is 1 Prastha. Statement 2 - According to Ashtānga Hrudya, Dosha expelled in Madhya Vega of Virechana is 2 Prastha.

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वमन के अयोग्य है -
Who is unfit for Vamana Karma -

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क्षीरेणापि विरिच्यते' किसके लिए कहा गया है
Ksheerenapi Virichyate is for?

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार नव ज्वर में वमन साध्य रोग हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार अतिसार वमन साध्य रोग हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Vamana is Sādhya in Nava Jwara. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Atisāra is Vamana Sādhya Roga.

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बुद्धिप्रसादं बलमिन्द्रियाणां धातुस्थिरत्वं' किसके लाभ है
Buddhi Prasadam Balamindriyanama Dhaatusthiratavam

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कफ विकारों में किस द्रव्यों से विरेचन देना चाहिये
Virechana Dravyas used in Kaphaja Vikaar are

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार पित्त दोष के लिए कषाय और मधुर द्रव्यों से विरेचन देना चाहिए। कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार कफ दोष के लिए कटु द्रव्यों से विरेचन देना चाहिए।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, for Pittq Dosha, Virechana with Kashāya and Madhura dravya should be given. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, for Kapha Dosha, Virechana with Katu dravya should be given.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार राजयक्ष्मा का रोगी वमन साध्य हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार गर्भिणी वमन के योग्य होती हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, patient of Rājayakshmā is Vamana Sādhya. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, pregnant woman is indicated for Vamana.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार जत्रु के ऊपर के रोगों में विरेचन करना चाहिए । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार स्तन्यदोष में वमन का प्रयोग प्रशस्त हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Virechana should be done in diseases above neck. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, use of Vamana is best in Stanyadosha.

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार बहु पित्त वाला कोष्ठ मृदु होता हैं ,इसका क्षीर से भी विरेचन हो जाता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार प्रचुर वायु वाला कोष्ठ क्रूर होता हैं,पर निशोथ आदि से आसानी से विरेचन हो जाता हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Koshtha with excess Pitta is Mrudu, Virechana with Kshīra can also be done. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Koshtha is excess Vāyu is Krūra, but Virechana can easily be done with Nishotha etc.

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वाग्भट के अनुसार, अवर शुद्धि में कितने अन्नकाल तक पेया आदि का सेवन कराना चाहिए
In Avara Suddhi for how many days Peya is given?

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मध्यम विरेचन में निकलने वाले मल का भार ह।वाग्भट
Quantity of Mala in Madhyama Virechana is (A.H.)

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के जघन्य वेग में 10 वेग होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार विरेचन के प्रवर वेग में 30 वेग होते हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, there are 10 Jaghanya Vega of Virechana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, there are 30 Pravara Vega .

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार कुष्ठ और प्रमेह विरेचन के योग्य होते हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार अजीर्ण में रोगी को गण्डूष और अंजन करा सकते हैं।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, Kushtha and Prameha are indicated for Virechana. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, Gandūsha and Anajana can be done in patients of Ajīrna.

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पाकं न प्रतिपालयेत्' किसके सन्दर्भ में कहा गया है
Paakam Na Pratipalayet is the reffrence of

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कथन 1. अष्टांग हृदय अनुसार वमन के अति योग में वमन द्रव में "फेनचंद्ररक्तवत" दर्शन होता हैं । कथन 2. अष्टांग हृदय अनुसार "वमित क्षामता दाह: कण्ठशोषस्तमो भ्रम " वमन अति योग के लक्षण हैं ।
Statement 1- According to Ashtānga Hrudya, in excess administration of Vamana, "Phenachandraraktavat" Vamana drava can be seen. Statement 2- According to Ashtānga Hrudya, "Vamita Kshāmatā Dāhah Kanthashoshastamo Bhrama" is the symptom of Excess administration of Vamana.

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वाग्भट के अनुसार वमन के हीनयोग में किन द्रव्यों से सिद्ध द्रव देना चाहिए -
Drugs mentioned by vagabhatt in the management of Hīna yoga of vamana?

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